विमानन क्षेत्र संकट में, इंडिगो-एयर इंडिया समेत एयरलाइंस पर बढ़ा दबाव
नई दिल्ली, 6 अक्टूबर - भारतीय नागरिक उड्डयन (एविएशन) क्षेत्र इस समय एक अभूतपूर्व और गंभीर विरोधाभास से गुजर रहा है। एक तरफ देश में नए हवाई अड्डों का तेजी से विस्तार का दावा किया जा रहा है तो दूसरी तरफ प्रमुख एयरलाइंस गहरे वित्तीय संकट, विमानों की ग्राउंडिंग और ढांचागत कमियों के बोझ तले दबी हुई हैं। रेटिंग एजेंसी इक्रा (आईसीआरए) के अनुमानों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में भारतीय एविएशन इंडस्ट्री को 17,000 से 18,000 करोड़ रुपये (170 से 180 अरब रुपये) का भारी-भरकम शुद्ध घाटा होने की आशंका है। दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा एविएशन मार्केट बनने का दावा करने वाले भारत के आसमान पर आखिरकार यह संकट क्यों गहरा रहा है और एयरलाइंस का गणित कहां बिगड़ रहा है, आइए इसे विस्तार से समझते हैं।
वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही (Q2FY27) के हालिया आंकड़े एविएशन इंडस्ट्री के लिए खतरे की घंटी हैं। इस तिमाही में घरेलू हवाई यात्रियों की संख्या गिरकर 3.67 करोड़ रह गई है। अगर इसकी तुलना पिछली तिमाही (Q1FY27) के 4.35 करोड़ यात्रियों से करें, तो यह 16% की भारी गिरावट है। वहीं, पिछले साल की इसी अवधि (Q2FY26) के 3.89 करोड़ यात्रियों के मुकाबले यह 6% की सालाना गिरावट है।

