अमन कानून की चुनौती
विगत दिवस तरनतारन ज़िले में एक सरपंच की गोलियां मार कर हत्या कर दी गई। इसका पूरा विवरण तो अभी सामने आना है परन्तु एक समाचार यह भी है कि कुछ समय पहले इस सरपंच को फिरौती देने के लिए धमकाया गया था। इस संबंध में पुलिस के पास शिकायत भी दर्ज करवाई गई थी। यह बात मृतक सरपंच की पत्नी ने बताई है और उसने यह भी कहा है कि पुलिस ने शिकायत तो दर्ज कर ली थी परन्तु उससे आगे कोई कार्रवाई नहीं की गई। पंजाब को कुछ ऐसी बुराइयां लग चुकी हैं, जिनसे शीघ्र कहीं इसका पीछा छूटने वाला नहीं है। इनमें से एक महत्त्वपूर्ण अमन कानून की स्थिति का बिगड़ते जाना है। इसके साथ ही प्रदेश में फैलते नशे ने एक बड़ी चुनौती खड़ी की हुई है।
विगत दिवस भारतीय जनता पार्टी ने इस संबंध में जागरूकता पैदा करने के लिए पंजाब भर में यात्राएं और रैलियां की थीं। जिसका उद्देश्य लोगों को इस बुराई के प्रति सुचेत करना था। इनके समापन समारोह में स्वयं केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आकर कुछ वर्षों के भीतर-भीतर नशे की बुराई को खत्म करने की घोषणा की थी। इससे पहले पंजाब सरकार ने भी नशों को खत्म करने के लिए बड़े कदम उठाए थे और इनमें संलिप्त आरोपियों के नाम भी उजागर किए थे। हज़ारों की संख्या में संबंधित व्यक्तियों पर मामले भी दर्ज किए गए और उनमें से ज्यादातर को जेल भी भेजा गया था। सत्तारूढ़ सरकार ने सत्ता सम्भालते ही इस बुराई को जड़ से उखाड़ने की घोषणा की थी। इससे पहले की सरकारों ने भी लगातार ऐसी घोषणा और बड़े-छोटे कदम उठाए थे परन्तु यह प्रचलन अभी तक भी जारी है और प्रदेश के समक्ष अभी भी एक चुनौती बनकर खड़ा है। इसके साथ ही अमन-कानून की बिगड़ती स्थिति ने भी प्रशासन के समक्ष हमेशा बड़ी चुनौतियां पैदा की रखी हैं। कुछ वर्षों में दर्जनों गांवों के सरपंचों को गोलियां मारने के समाचार सामने आए हैं। इनमें से ज्यादातर सभी मामले नशे से संबंधित हैं। नशे के आदी व्यक्ति हर हाल में नशा करने का यत्न करते हैं और इस तरह अपराध की दुनिया में भी दाखिल हो जाते हैं। ज्यादातर सभी नशेड़ी तो इसके लिए अपने परिवारों को भी निशाना बनाते हैं और समाज के लिए बड़ा दुखांत पैदा करने का कारण बनते हैं। विगत दिवस तरनतारन ज़िले में भी एक महिला सरपंच के पति की इसलिए गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, क्योंकि उसने इलाके में नशा बेचने वालों के विरुद्ध पुलिस को शिकायत दर्ज करवाई थी। जिसकी नशों के व्यापारियों ने उसे अपने तरीके से सज़ा दी थी। इसी तरह तहसील बटाला में नशे के आदी पति ने अपनी पत्नी और बेटी की हत्या कर दी थी। उसके पारिवारिक सदस्यों के अनुसार वह जितना भी कमाता था सब नशे में खर्च कर देता था और रोकने पर मारपीट भी करता था।
इस तरह नशे के कारण भी हुई बड़ी हत्याएं सामने आई हैं। सितम्बर महीने में अमृतसर ज़िले में पंजाब पुलिस के सहायक सब-इंस्पैक्टर की गोलियां मारकर हत्या कर दी गई थी, जिसकी ज़िम्मेदारी एक आतंकवादी संगठन ने ली थी। विगत अवधि में इसी तरह पुलिस कर्मचारियों की हुई हत्याओं ने भी एक भय का माहौल पैदा किया है। चाहे पुलिस की ओर से बड़े दावे भी किए जाते रहे हैं और लगातार कड़े कदम भी उठाए गए हैं, परन्तु इसके बावजूद सरकार और प्रशासन के लिए यह मामला आज भी एक गम्भीर चुनौती बनकर खड़ा है। इन बुराइयों का संयुक्त रूप में पार्टी स्तर से ऊपर उठ कर मुकाबला किया जाना बेहद ज़रूरी है, नहीं तो पहले ही ज़द में आए प्रदेश के लिए यह बुराइयां एक ऐसा बड़ा नुकसान सिद्ध होंगी, जिसकी आगामी लम्बी अवधि में पूर्ति कर पाना बेहद कठिन होगा।
—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

