प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी : सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष
7 अक्तूबर 2026 को श्री नरेन्द्र मोदी एक सरकार के प्रमुख के रूप में 25 वर्ष पूरे कर रहे हैं। यह सार्वजनिक जीवन की ऐसी यात्रा है, जिसकी शुरुआत 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने से हुई और 2014 में भारत के प्रधानमंत्री के रूप में पदभार संभालने के साथ राष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ी। यह उपलब्धि केवल इसकी लम्बी अवधि के कारण महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह वह दौर है, जिसमें भारत ने आर्थिक, तकनीकी, बुनियादी ढांचे और सामाजिक क्षेत्रों में व्यापक परिवर्तन देखा है।
2014 के बाद की इस अवधि की प्रमुख विशेषताओं में से एक ‘डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना’ का विस्तार रहा है। 2015 में शुरू किए गए डिजिटल इंडिया कार्यक्रम ने ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने में सहायता की, जिसमें पहचान, बैंकिंग, मोबाइल कनेक्टिविटी और सार्वजनिक सेवाएं बड़े पैमाने पर संचालित हो सकें। 2026 तक भारत में 144 करोड़ से अधिक आधार पहचाने, 57.71 करोड़ जन धन खाते और तेजी से विस्तारित होता डिजिटल सेवाओं का नेटवर्क मौजूद था।
यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) इस परिवर्तन के सबसे स्पष्ट प्रतीकों में से एक बन गया है। वित्त वर्ष 2016-17 में लगभग 2 करोड़ वार्षिक लेन-देन से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में यूपीआई लेन-देन 24,162 करोड़ से अधिक हो गए। वित्त वर्ष 2025-26 में लेन-देन का मूल्य लगभग 314 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जबकि यूपीआई का विस्तार अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी हुआ। इसका महत्व केवल सुविधा तक सीमित नहीं है। डिजिटल भुगतान ने छोटे व्यवसायों, रेहड़ी-पटरी वालों, उपभोक्ताओं और उद्यमियों को औपचारिक वित्तीय प्रणाली में अधिक आसानी से भाग लेने में मदद की है।
‘बुनियादी ढांचा’ भी इस अवधि का एक प्रमुख स्तंभ रहा है। पिछले 12 वर्षों के दौरान भारत ने सड़कों, रेलवे, हवाई अड्डों, बंदरगाहों, जलमार्गों, आवास, ऊर्जा और शहरी परिवहन में निवेश को तेज किया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार सार्वजनिक पूंजीगत व्यय वित्त वर्ष 2014-15 में लगभग 2 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2026-27 में 12.2 लाख करोड़ रुपये हो गया। रेलवे विद्युतीकरण, मेट्रो विस्तार और एकीकृत लॉजिस्टिक्स योजना इस निवेश के साथ आगे बढ़े हैं। मार्च 2026 तक भारतीय रेल नेटवर्क का 99.6 प्रतिशत विद्युतीकरण हो चुका था, जबकि देश का मेट्रो नेटवर्क 1155 किलोमीटर से अधिक हो गया था।
इस बुनियादी ढांचा विस्तार के साथ विनिर्माण और आर्थिक आत्मनिर्भरता पर भी जोर दिया गया है। ‘मेक इन इंडिया’, उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजनाओं और व्यापक ‘आत्मनिर्भर भारत’ ढांचे के माध्यम से घरेलू विनिर्माण क्षमता बढ़ाने, निवेश आकर्षित करने तथा इलेक्ट्रॉनिक्स और दूरसंचार से लेकर फार्मास्यूटिकल्स और रक्षा तक विभिन्न रणनीतिक क्षेत्रों में क्षमता विकसित करने का प्रयास किया गया है। व्यापक उद्देश्य भारत को मुख्यत: एक बड़े उपभोक्ता बाज़ार से आगे बढ़ाकर एक प्रमुख उत्पादक व निर्यातक के रूप में स्थापित करना रहा है।
इस अवधि में ‘प्रौद्योगिकी और प्रत्यक्ष हस्तांतरण’ के माध्यम से सामाजिक कल्याण के विस्तार को भी देखा गया है। जन धन खाते, आधार और मोबाइल कनेक्टिविटी ने प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के लिए आधार तैयार किया, जिससे सरकारी सहायता सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाई जा सके। आवास, स्वच्छता, खाना पकाने के ईंधन, पेयजल, स्वास्थ्य बीमा व खाद्य सुरक्षा से संबंधित योजनाओं के माध्यम से बड़े पैमाने पर बुनियादी घरेलू ज़रूरतों को पूरा करने का प्रयास किया गया है। 2026 के केंद्रीय मंत्रिमंडल के एक प्रस्ताव में सरकार ने दावा किया कि इस अवधि में 25 करोड़ से अधिक लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर आए हैं। ऐसे दावे महत्वपूर्ण हैं लेकिन गरीबी मापने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली पद्धतियों और स्वतंत्र आकलनों के संदर्भ में इन्हें समझना भी आवश्यक है।
मोदी काल का एक अन्य महत्वपूर्ण आयाम भारत की ‘वैश्विक आर्थिक और रणनीतिक उपस्थिति’ को मजबूत करने का प्रयास रहा है। भारत ने स्वयं को ग्लोबल साउथ की आवाज, एक प्रमुख प्रौद्योगिकी और विनिर्माण अर्थव्यवस्था तथा जलवायु कार्रवाई से लेकर डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना तक विभिन्न वैश्विक पहलों में एक महत्वपूर्ण भागीदार के रूप में प्रस्तुत किया है। 2023 में जी20 की सफल अध्यक्षता ने भारत को विकास संबंधी चिंताओं, डिजिटल समावेशन और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के हितों को अंतर्राष्ट्रीय एजेंडे पर अधिक प्रमुखता से रखने का मंच प्रदान किया।
हालांकि, सार्वजनिक जीवन के 25 वर्षों की कहानी को केवल उपलब्धियों की सूची तक सीमित नहीं किया जा सकता। इस अवधि में भारत की यात्रा रोज़गार, असमानता, कृषि संकट, केन्द्र-राज्य संबंधों, संस्थागत स्वायत्तता, सामाजिक समरसता और सार्वजनिक विमर्श की गुणवत्ता जैसे महत्वपूर्ण प्रश्नों से भी जुड़ी रही है। भारत के आर्थिक विस्तार ने महत्वपूर्ण अवसर पैदा किए हैं लेकिन यह सुनिश्चित करना कि आर्थिक विकास पर्याप्त उत्पादक रोज़गार पैदा करे और समाज के सभी वर्गों तक पहुंचे, अभी भी एक सतत चुनौती है। ये विमर्श शासन की किसी भी लंबी अवधि का मूल्यांकन करने का अभिन्न हिस्सा हैं।
इस प्रकार सार्वजनिक जीवन में 25 वर्ष केवल एक व्यक्तिगत राजनीतिक पड़ाव नहीं है। यह बदलते भारत पर विचार करने का भी एक अवसर है,एक ऐसा भारत जिसने नए राजमार्ग और डिजिटल नेटवर्क बनाए हैं, बैंकिंग और कल्याणकारी योजनाओं तक पहुंच का विस्तार किया है, उद्यमिता और प्रौद्योगिकी को अपनाया है और विश्व में अपनी बड़ी भूमिका की दिशा में प्रयास किया है।
प्रधानमंत्री के रूप में नरेन्द्र मोदी जी के कार्यकाल के दौरान हरियाणा को भी राष्ट्रीय विकास यात्रा में महत्वपूर्ण निवेश और विकास परियोजनाएं मिली हैं, जिससे राज्य की आर्थिक विकास में भूमिका मजबूत हुई है। प्रमुख परियोजनाओं में गुरुग्राम मेट्रो, एम्स रेवाड़ी, द्वारका एक्सप्रेस-वे तथा रेलवे और राजमार्ग कनेक्टिविटी का विस्तार शामिल है। उनकी सरकार ने राज्य में स्वास्थ्य, ऊर्जा, विमानन और औद्योगिक बुनियादी ढांचे से जुड़ी नई परियोजनाओं को भी समर्थन दिया है। 2026 में हरियाणा जींद और सोनीपत के बीच भारत की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन चालित ट्रेन का केन्द्र बना। इसके साथ लगभग 14,700 करोड़ रूपये की बुनियादी ढांचा परियोजनाएं भी जुड़ी हैं। ये पहल कनेक्टिविटी, निवेश, प्रौद्योगिकी व हरियाणा के लोगों के लिए अवसरों पर केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती हैं।
नरेन्द्र मोदी जी के सार्वजनिक जीवन के इस 25 वर्ष के सफर का महत्व अंतत: यात्रा के पैमाने और उससे उत्पन्न हुई आकांक्षाओं के पैमाने में निहित है। इस यात्रा का अगला मापदंड यह होगा कि आज की संस्थाओं, बुनियादी ढांचे और तकनीकी क्षमताओं को भारत के 140 करोड़ नागरिकों के लिए अवसर, समृद्धि और बेहतर जीवन स्तर में कितनी प्रभावी ढंग से बदला जा सकता है, तथा 2047 के विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने में कैसे देश के हर एक नागरिक के जीवन को जोड़ा जा सकता है।
(लेखक केंद्रीय विद्युत मंत्री और आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री हैं।)

