सुंदर और रंग-बिरंगी नगीना मछली
नगीना मछली ताजे पानी की एक सुंदर रंग-बिरंगी मछली है। अंग्रेजी में इसे ज्वेल फिश कहते हैं। इसके शरीर की त्वचा इस प्रकार की होती है मानो इस पर नगीने जड़े हों। इसीलिए इसे यह नाम दिया गया है। नगीना मछली एक्वेरियम की प्रिय मछली है। यह एक्वेरियम में हमेशा जोड़े से रहती है। नगीना मछली के जोड़े से यदि नर को अलग कर दिया जाए तथा इसके पास किसी नए नर को लाया जाए तो यह इसके साथ रहने तथा समागम करने से इनकार कर देती है और पहले वाले नर को पुन: लाने पर प्रसन्न हो जाती है। इसीलिए इसे पतिव्रता मछली कहते हैं।
नगीना मछली बहुत सीमित क्षेत्र में पायी जाती है। यह केवल उष्णकटिबंधीय अफ्रीका की नदियों में ही मिलती है। अफ्रीका की नाइजर, कांगों और नील नदी तथा इनकी सहायक नदियों में इसकी संख्या बहुत अधिक है। नगीना मछली नदियों में हमेशा अकेली अथवा जोड़े में रहती है। यह बड़ी लड़ाकू होती है तथा अन्य जातियों की मछलियों के साथ ही अपनी जाति की मछलियों से भी बहुत लड़ती है। नगीना मछली की शारीरिक संरचना ताजे पानी की सामान्य मछलियों से कुछ भिन्न होती है। सामान्यतया इसके शरीर की लंबाई 5 सेंटीमीटर से लेकर 10 सेंटीमीटर तक होती है, किंतु कभी-कभी 12 सेंटीमीर तक लंबी नगीना मछलियां भी देखने को मिल जाती हैं। नगीना मछली में नर और मादा की बाहरी शारीरिक संरचना तथा शरीर के रंग एक जैसे होते हैं अत: इन्हें सरलता से अलग-अलग नहीं पहचाना जा सकता। सामान्यतया मादा के शरीर के रंग अधिक चमकदार होते हैं तथा नर के शरीर पर नगीने अधिक होते हैं। नगीना मछली की पीठ और शरीर के ऊपर का भाग गहरे जैतूनी से लेकर ग्रे कत्थई तक होता है तथा पेट और नीचे का भाग कुछ हल्के रंगों वाला होता है। इसके पूरे शरीर पर हरे रंग की चमक होती है, जिससे इसके शरीर की सुंदरता और अधिक बढ़ जाती है। नगीना मछली के शरीर की दोनों बगलों पर हल्के नीले रंग के धब्बे तथा छह सात रेखाएं होती हैं। इसके साथ ही इसकी दोनों बगलों पर तीन बड़े धब्बे होते हैं। नर के शरीर के धब्बे मादा नगीना मछली की तुलना में अधिक बड़े और गहरे रंग के होते हैं। नगीना मछली के सिर, पेट और कंधों पर लाल अथवा सिंदूरी रंग की शानदार चमक होती है। इसके शरीर के सभी मीन-पंखों के किनारे भी सिंदूरी होते हैं।
नगीना मछली के शरीर के रंग बदलते रहते हैं तथा इसके रंगों की चमक भी घटती-बढ़ती रहती है। नगीना मछली का भोजन ताजे पानी की सामान्य मछलियों की तरह होता है। नगीना मछली उन सभी जीवों को अपना आहार बना लेती है, जिन्हें यह सरलता से खा सकती है। प्रजनन काल में नगीना मछली के शरीर का लाल रंग अधिक गहरा हो जाता है तथा गहरा होकर फैल जाता है। इसके शरीर का लाल रंग इतना अधिक फैलता है कि यह इसके शरीर के अधिकांश भागों को ढंक लेता है। नगीना मछलियों में नर और मादा दोनों ही शरीर के रंगों के आधार पर समागम हेतु साथी की खोज करते हैं। प्रजनन काल में साथी मिल जाने के बाद नर और मादा दोनों ही पानी के तल में आ जाते हैं और दो-तीन दिन तक पानी के तल की रेत पर एक-दूसरे के निकट पड़े रहते हैं। इस समय कभी ये उठ कर साथ-साथ तैरने लगते हैं और कभी एक-दूसरे के शरीर को अपने थूथन से धक्का देकर विचित्र प्रकार की प्रणय लीलाएं करते हैं। इसके बाद नर-मादा दोनों पानी के तल के पास की कोई कठोर चट्टान साफ करते हैं। इसी चट्टान पर मादा नगीना मछली अंडे देती है तथा नर उन पर शुकाणु डालकर उन्हें निषेचित करता है।
मादा नगीना मछली एक बार में 500 से लेकर 700 तक अंडे देती है। इसके अंडे कुछ बड़े आकार के होते हैं। मादा नगीना मछली के प्रत्येक अंडे का व्यास 25 मिलीमीटर होता है तथा यह पानी के तल के ठोस आधार से चिपका रहता है।
नगीना मछली के अंडे शीघ्र ही परिपक्व होकर फूटते हैं तथा इनसे छोटे-छोटे बच्चे निकल आते हैं। इसके बच्चे बड़े तेज होते हैं तथा एक सप्ताह के होते ही भोजन करना आरंभ कर देते हैं। इससे इनका तीव्र गति से विकास होता है और एक माह में ही ये वयस्कों के समान दिखाई देने लगते हैं। इसके बच्चे बड़े लड़ाकू होते हैं तथा आपस में एक-दूसरे से बहुत अधिक लड़ते हैं। नगीना मछलियों में नर और मादा अपने अंडों के समान ही अपने बच्चों की भी सुरक्षा करते हैं।
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