बढ़ती चुनाव सक्रियता
पंजाब विधानसभा का तीन दिवसीय सत्र कई पक्षों से महत्त्वपूर्ण माना जा सकता है। इस संक्षिप्त सत्र में रचनात्मक विचार-विमर्श कम हुए परन्तु एक दूसरे पर तीव्र आलोचनात्मक तीर अधिक छोड़े गए। फिर सरकारी पक्ष इसमें अपनी उपलब्धियां दर्शाने के लिए यत्नशील था। जबकि विपक्षी सदस्य उसकी पिछली कारगुज़ारी में रह गई कमियां और बड़ी त्रुटियां निकालते नज़र आए और बात कटुता और धक्का-मुक्की तक भी पहुंच गई।
दूसरी ओर चुनाव आयोग ने अपनी सक्रियता बढ़ानी शुरू कर दी है, क्योंकि आगामी वर्ष के शुरू में ही 5 राज्यों में चुनाव होने जा रहे हैं। पिछली 8 जनवरी, 2022 को चुनावों की घोषणा की गई थी और यह फरवरी और मार्च में पूर्ण हुए थे। चुनाव सक्रियता बढ़ने से इस अंतिम सत्र में सरकार द्वारा की जाने वाली किसी लम्बी और गम्भीर योजनाबंदी का विस्तार तो नहीं दिया जा सकता परन्तु सरकार ने विभिन्न प्रस्तावों द्वारा प्रदेश के दरियाई पानी संबंधी अधिकारों को विशेष महत्त्व दिया है। अन्य प्रदेशों को दिए जाने वाले पानी का विस्तार पेश करते हुए आवंटित पंजाब को मिलते यमुना के पानी पर भी प्रदेश का अधिकार जताया है। सरकार ने राजस्थान को दिए जा रहे पानी की कीमत वसूलने की मांग भी की है। हम महसूस करते हैं कि पानी के वितरण के लिए नया ट्रिब्यूनल बनना ज़रूरी है। जिसमें पंजाब के दरियाओं के वास्तविक बहाव और प्रदेशों की हिस्सेदारी संबंधी जायज़ा लिया जाए। ऐसे ट्रिब्यूनल के सामने संबंधित प्रदेश अपना पक्ष पेश कर सकते हैं और जिसके आधार पर आपसी सहमति से ही कोई फैसला किया जा सकता है। सत्र बेहद संक्षिप्त होने के कारण ज्यादा समय आपसी आरोप-प्रत्यारोप में गंवाने के कारण मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने सत्र के ज्यादातर समय में भाग नहीं लिया।
दूसरी तरफ सरकार ने विगत अवधि में अपनी कल्याण योजनाओं पर लगातार ज़ोर देने के साथ-साथ यह प्रभाव भी ज़रूर डाला है कि चुनावों के बाद यदि आगामी समय में उनकी पुन: सरकार आती है तो उनकी सरकार की ओर से ऐसी कल्याणकारी योजनाओं को जारी रखा जाएगा। सरकार ने अपनी उपलब्धियों का ज़िक्र करते हुए सदन को बताया कि मुख्यमंत्री मावां धीयां सत्कार योजना के तहत लगभग 80 लाख महिलाओं को पंजीकरण किया गया है। इस योजना के अधीन उन्हें 1000 से 1500 रुपये तक महीने के हिसाब से सहायता की किश्तें दी जा रही हैं। इसी तरह सरकार ने प्रत्येक महीने 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने को भी अपनी बड़ी उपलब्धि बताया। मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के तहत भी वार्षिक 10 लाख रुपये तक प्रत्येक परिवार को डाक्टरी सहायता देने का भी ज़िक्र किया गया। सरकार ने 1244 आम आदमी क्लीनिकों में अब तक 2 करोड़ से अधिक मरीज़ों के किए गए उपचार संबंधी भी दावा किया है। विपक्ष ने जहां विगत अवधि में प्रदेश पर चढ़े भारी कज़र् की बात की है, वहीं नशे के प्रचलन में सरकार की विफलता के लिए उसकी आलोचना की है।
अब जबकि चुनाव नज़दीक हैं तो मतदाताओं ने अपने मताधिकार के इस्तेमाल के समय उपरोक्त दावों और आलोचनाओं के संदर्भ में विचार-विमर्श करके कोई फैसला लेना है। इस समय राजनीतिक मैदान में सभी मुख्य पार्टियां तत्पर और सक्रिय हुई दिखाई देती हैं। प्रदेश के विकास की पिछली रफ्तार के दृष्टिगत ही इसके भविष्य संबंधी फैसला करने के लिए प्रत्येक मतदाता के लिए अपनी ज़िम्मेदारी को निभाना ज़रूरी होगा।
—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

