पंजाब व हरियाणा जल विवाद पर बातचीत के लिए सहमतडी.एन. चौधरी


चंडीगढ़, 12 मई : उत्तरी क्षेत्रीय परिषद् (एनजेडसी) की आज यहां चंडीगढ़ में केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई 28वीं बैठक में राज्यों के बीच पानी और बंटवारे के
मुद्दे अदालत के बाहर सुलझाने पर सहमति बन गई है। सहमति बनने से अब पंजाब व हरियाणा के बीच लंबे समय से चले आ रहे एसवाईएल मामले के सुलझने के आसार बन गए है
। बैठक में केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह के अतिरिक्त पंजाब के राज्यपाल व चंडीगढ़ के प्रशासक वी.पी. सिंह बदनौर, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खटटर, दिल्ली के लै.
जनरल अनिल बैजल, दिल्ली के वातावरण मंत्री अनिल माधव दवे, जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री डा. निर्मल कुमार सिंह, हिमाचल प्रदेश के स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्री ठाकुर कौल
सिंह और राजस्थान के जल संसाधन मंत्री डा. राम प्रताप उपस्थित थे। बैठक में केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह ने अपील की कि उत्तरी क्षेत्र के राज्य अपने यहां पढ़ रहे जम्मू-कश्मीर के
विद्यार्थियों का विशेष ख्याल रखें और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करें। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेन्द्र सिंह ने बैठक में प्रस्ताव रखा की पानी के मुद्दों को कोर्ट के बाहर आपसी
सहमति से सुलझाना चाहिए। इस पर सभी राज्य सहमत हो गए। इसके बाद पानी और ऊर्जा के बंटवारे के मामले कोर्ट से बाहर सुलझाने पर सहमति बन गई। परिषद की सचिव
संजीवनी कुट्टी और पंजाब के मुख्य सचिव करन अवतार सिंह ने भी इस बात की पुष्टि की कि सभी राज्य पानी के मुद्दे को कोर्ट से बाहर सुलझाने को लेकर सहमत हुए। बैठक में
हरियाणा के सी. एम मनोहर लाल के साथ वहां के कृषि मंत्री ओम प्रकाश धनखड़ और राज्य मंत्री कृष्ण बेदी ने भाग लिया। पंजाब के मुख्मंत्री कैप्टन अमरेन्द्र सिंह के साथ राज्य के
वित्तमंत्री मनप्रीत बादल ने भी बैठक में हिस्सा लिया। बैठक में जम्मू-कश्मीर की ओर से वहां के उपमुख्यमंत्री निर्मल सिंह बैठक में शामिल हुए। मुख्यमंत्री  कैप्टन अमरेन्द्र सिंह द्वारा
सतलुज यमुना लिंक नहर के विवाद को आपसी सहमति से हल करने पर जोर देते अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत रिपेरियन सिद्धात के आधार पर दरियाई पानी के उचित प्रयोग के
अनुकूल हल के लिए संबधित राज्यों को भारत सरकार के साथ तालमेल करने के दिए निमंत्रण के बाद क ेन्द्रीय गृह मंत्री ने यह पक्ष रखा।
 बैठक की अध्यक्षता कर रहे केन्द्रीय मंत्री ने कैप्टन अमरेन्द्र सिंह द्वारा इस मसले को आपसी बातचीत द्वारा हल करने के दिए सुझाव के साथ सहमति ज़ाहिर करते कहा कि सबसे
पहले तो आपसी बातचीत द्वारा इस मुददे का हल ढूंढा जाना चाहिए ओर यदि कोई मसला पूरा नही होता तो उसको अदालत के फैंसले पर छोड़ देना चाहिए। उन्होंने दोनों राज्याें के
मुख्यमंत्रियों और मुख्य सचिवों को आपस में बैठकर दोनों पक्षों को स्वीकृत हल तक पहुंचने के लिए मसला विचार करने का सुझाव दिया। पंजाब के मुख्यमंत्री ने सुझाव दिया कि
केन्द्रीय जल संशाधन मंत्रालय द्वारा इस प्रक्रिया को आगे ले जाने के लिए शीघ्र अति शीघ्र दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों और मुख्य सचिवों की ब्ैठक बुलाई जाए। 
कैप्टन अमरेन्द्र सिंह ने इस पक्ष को भी सांझा किया कि एसवाईएल के निर्माण हो जाने से दक्षिणी पंजाब के दस लाख एकड़ क्षेत्र में सूखा पड़ जाने की संभावना है ओैर यदि ऐसा हो
गया तो राज्य में आंतकवाद पुन: सिर उठा सकता है। मुख्यमंत्री ने सीमापार से नशों के तस्करी रोकने के लिए राज्य सरकार द्वारा शुरू किए यन्त्रों को आगे बढ़ाने के लिए केन्द्र
सरकार के सहयोग की मांग की क्योकि नशों के पूर्ण खात्मे के लिए राज्य सरकार पूर्ण रूप से बचनबद्ध है।
 मुख्यमंत्री ने पंजाब के पुर्नगठन के अवसर पर भारत सरकार द्वारा चंडीगढ़ प्रशासन में 60:40 के अनुपात के लिये फैसले की मौजूदा समय पालना ना होने पर चिंता ज़ाहिर करते हुए
कहा कि इस का सीधा संबंध भारत के केन्द्र शासित राज्य के सभी सरकारी कार्यालयों में पंजाब व हरियाणा के बीच है। उन्होंने केन्द्रीय मंत्री को अपील की कि सभी विभागों व
कर्मचारी श्रेणियों में भर्ती पर 60:40 के अनुपात की सख्ती से पालना को यकीनी बनाने के लिए चंडीगढ़ प्रशासन को आदेश जारी किए जाएं।