कबड्डी में अनियमितताओं पर रोक लगाने की ज़रूरत


पंजाबियों की लोकप्रिय सर्कल स्टाइल कबड्डी पंजाबियों की आत्मा में बसी हुई एक लोक खेल है। सड़कों और वाहनों की खेल आज इनडोर स्टेडियम तक जा पहुंची है। पंजाब की धरती पर कबड्डी विश्व कप और विश्व कबड्डी लीग का होना खेल कबड्डी के लिए शुभ संकेत माना जाता है। जिसके कारण खेल कबड्डी दुनिया के नक्शे पर प्रमुखता के साथ आई है। लेकिन पंजाबियों के खून में रची लोकप्रिय खेल कबड्डी को कई घातक रूझानों ने अपने आंचल में ले लिया है। पंजाबी खेल कबड्डी में अपना इतिहास, शूरवीरता, साहस और दम पर अपनी ताकत देखते आ रहे हैं, लेकिन पिछले कुछ समय से खेल कबड्डी हाशिये पर चली गई है। पंजाब में आने वाले दिनों में कबड्डी खेल मेले ज़ोर-शोर से शुरू होने जा रहे हैं। इन खेल मेलों में अनियमितताओं का खूब बोलबाला रहेगा, क्योंकि नियमों से कोसों दूर इन टूर्नामैंटों में अधिक धन का प्रचलन होगा, लेकिन अनियोजित ढंग के साथ, देर रात चलने वाले इन खेल मेलों में खिलाड़ियों का सीखने का व्यवहार, छोटी-सी तकरार से टूर्नामैंट में लम्बा विघ्न डालना, मैच रैफरी से बहसबाज़ी और धक्कामुक्की करना, मैच के दौरान खिलाड़ियों का आपस में गाली-गलौच करना, खेल भावना का न होना, अनुशासनहीनता, जो खेल कबड्डी के लिए चिंताजनक है। इसमें कोई संदेह नहीं कि गांवों की स्थानीय कबड्डी टूर्नामैंट कमेटियां बहुत बड़े स्तर पर खेल मेले करवाती हैं और पैसे लगाने में भी कोई कसर नहीं छोड़ती और खिलाड़ियों को मोटरसाइकिल, गाड़ियां, ट्रैक्टर, घोड़े आदि बेशकीमती पुरस्कार भी देती हैं जोकि उत्तम और नेक कार्य है। पंजाब के सभी क्षेत्रों से प्रसिद्ध टीमों को बुलाकर सुडौल शरीर वाले नौजवानों के कड़े और दिलकश मुकाबले दर्शकों की नज़र में सराहनीय प्रयास हैं। पर जिस गांव की टूर्नामैंटों में ज्यादा टीमों की एंट्री होती है। वह टूर्नामैंट बड़ी अनियमितताओं और धांधलियों की भेंट चढ़ जाता है, क्योंकि टीमें ज्यादा होने के कारण देर रात तक मैचों का चलना स्वाभाविक ही होता है। 
मैच खेलने का समय कम और शोर-शराबा अधिक, जितना अधिक पुरस्कार उतना अधिक खिलाड़ियों की ओर से नशों का सेवन करना और लड़ाई-झगड़ा तो ज़रूर होता है, जो कबड्डी के लिए भविष्य में खतरे का संकेत है। कबड्डी के लिए भविष्य में खतरे का संकेत है। इसीलिए कमेटियों को टूर्नामैंट में निर्धारित टीमों को शामिल करना चाहिए।(शेष अगले अंक में)