बहु गुणकारी हैं लैवेंडर के फूल-पौधे और उत्पाद


फूलों की बात करने पर हमारे मन मस्तिष्क में बेला, गेंदा गुलाब, चंपा, चमेली और मालती  के रंग-सुगंध उभारते हैं। ये फूल अब मंदिरों-मजारों की ही शोभा बढ़ाते नजर आते हैं या फिर नेताओं के गले में झूलते दिखते हैं। मगर एक फूल लैवेंडर का भी है जो बहुउपयोगी और औषधीय गुणों से भरपूर है। लैवेंडर को खास उसकी खुशबू के लिए जाना जाता है।  लैवेंडर एक बारहमासी आने वाला पौधा है। इस छोटे पौधे की लम्बी टहनियां  होती हैं।  इसमें छोटे-छोटे पर्पल कलर के फूल उगते हैं,उन्हें ही लैवेंडर कहा जाता है। लैवेंडर का फूल काफी सारी चीजों में प्रयोग किया जाता है, इसकी महक साबुन, शैंपू और इत्र बनाने में इस्तेमाल की जाती हैं । लैवेंडर फूल के पौधे की एक प्रजाति है। फूल छल्लों में होते हैं, पत्तों के साथ खूंटे के सहारे ऊपर की ओर बढ़ते हैं। फूल नीले, बनफशी या बैंगनी रंग के होते हैं। औषधीय और बहुउपयोगी गुणों के कारण दुनिया भर में इसकी खेती हो रही है और उद्यान लगाए जा रहे हैं।  लैवेंडर को तरोताजा प्रयुक्त पाउच हर्बल पूरक के रूप में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता है। सूखे और पाउच में बंद, लैवेंडर फूल कीट की रोकथाम करते हैं और कपड़ों में खुशबू फैलाते हैं।
 लैवेंडर का उपयोग बड़े पैमाने पर जड़ी बूटियों और अरोमाथेरपी के साथ किया जाता है। फूलों में प्रचुर मात्रा में अमृत होता है जिससे मधुमक्खियां उच्च गुणवत्ता वाली शहद बनाती हैं। लैवेंडर के जायके का इस्तेमाल बेक्ड व्यंजन और मिठाईयों में होता है। लैवेंडर के फूल का मिश्रण कभी-कभी काले, हरे या हर्बल चाय के साथ ताजेपन, सुगंध और स्वाद के लिए किया जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, लैवेंडर के कई उपयोग हैं। लैवेंडर की सुई लेने से, कीड़े के काटने और जलन से आराम मिलता है। लैवेंडर की गंध से कीड़े दूर भागते हैं। लैवेंडर के पौधों से निकाला जाने वाला तेल लैवेंडर का तेल कहलाता है। सिर पर लैवेंडर तेल लगाने से सिर दर्द में आराम मिलता है। तकिए में लैवेंडर के फूलों और बीजों को डालने से अच्छी नींद और विश्राम मिलता है। एक कप उबलते पानी में तीन फूलों का अर्क डालने से सोते समय आराम मिलता है। लैवेंडर तेल से मुंहासे ठीक हो जाते हैं, गुलाब जल, या सुपारी में मिलाकर लगाने से तेज जलन से त्वचा को आराम मिलता है।

—बाल मुकुन्द ओझा
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