वीज़ा फीस के लिए कैनेडा सरकार को अदालती केस का करना पड़ेगा सामना


टोरांटो, 9 नवम्बर (सतपाल सिंह जौहल): कैनेडा सरकार को एक ऐसे ऐतिहासिक कानूनी केस का सामना करना पड़ रहा है, जिसमें भारत, चीन और फिलपाईन के लोगों द्वारा ज़रूरत से अधिक वीज़ा फीस लेकर लाभ कमाने को चुनौती दी गई है। तीन वकीलों ने संयुक्त रूप से फैड्रल कोर्ट में फाईल किए केस में सैलानियों एवं कारोबारियों को दिये जाते मल्टीपल एंट्री वीज़ा (टैंप्रेरी रैज़ीडैंट परमिट) को आधार बनाया है, जिनमें सरकार ने आवदेन पत्र के निपटारे हेतु अपने खर्चे से अधिक फीसें वसूलीं। गत 20 वर्षों से वकालत के माहिर रिचर्ड कुरलैंड व लारेन वाल्डमैन ने कहा कि सरकार ने 2004 से अधिक फीसें वसूलने का रुझान पकड़ा हुआ है, जबकि सैलानियों, कारोबारियों, श्रमिकों एवं विद्यार्थियों के पास टैंप्रेरी रैजीडैंस परमिट (टी.आर.पी.) अप्लाई करने के इलावा अन्य कोई विकल्प नहीं। ऐसे लोगों की ज़रूरत (मज़बूरी) का नाजायज़ लाभ उठाने को केस में उजागर किया है, जिस बारे ब्रिटिश कोलंबिया से ऐलन हिंटन ने वकील तक पहुंच की थी। केस में जिन लोगों से अधिक फीस वसूली गई है वह वापिस करने की मांग की गई है क्योंकि सरकार द्वारा वीज़ा सिस्टम में निवेदन पत्र के निपटारे पर आते खर्च से अधिक फीस वसूलना गैरकानूनी है।