चावल की 5 प्रतिशत से ज्यादा पालिश उतारना खतरनाक


जालन्धर, 15 मई (शिव शर्मा): फैडरेशन आफ आल इंडिया राईस मिल्ज़र् एसोसिएशन ने इंडियन इंस्टीच्यूट आफ फूड प्रोसैसिंग टैक्नालोजी की आई एक रिपोर्ट में चावल की पालिश उतारने के मामले में कहा है कि यदि चावल तैयार करने समय उसकी 5 प्रतिशत से ज्यादा पालिश उतारी जाती है तो यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है व एफ.सी.आई. को इस रिपोर्ट की जगह असल नियमों को लागू करना चाहिए। एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल की भारतीय खाद्य निगम के एम.डी.डी.बी. प्रशाद के साथ हुई बैठक में आई रिपोर्ट संबंधी चर्चा की गई। तरसेम सैनी के नेतृत्व में मिले प्रतिनिधिमंडल का कहना था कि अब तक तो 5 प्रतिशत से ज्यादा चावलों की पालिश उतारने का ट्रायल किया गया है जबकि ज्यादा पालिश उतारने से उसके विटामिन, मिनरल व आयरन पालिश में चले जाते हैं। संगठन का कहना था कि केन्द्र ने शैलर मालिकों के लिए ज़रूरी किया है कि वह चावलों को पौष्टिक बनाने के लिए विदेशों से निर्यात करके विटामिन में डालें जिसके ऊपर 250 से लेकर 300 रुपए प्रति क्ंिवटल खर्चा आता है। यह इस कारण डालने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि 5 प्रतिशत ही चावलों से पालिश उतारी जाती है तो चावल में पहले ही कुदरती तौर पर विटामिन, मिनरल मौजूदा रहते हैं। तरसेम सैनी ने रिपोर्ट में इस का विशेष तौर पर एतराज़ किया कि इंस्टीच्यूट ने ट्रायल दौरान 100 किलो जीरी में से 68 से 69 किलो चावल निकलने की बात कही है जबकि जीरी में से 65 से 66 किलो चावल ही निकलते हैं। एसोसिएशन ने एम.डी. के साथ रिपोर्ट संबंधी बातचीत करते कहा है कि आंकड़े ट्रायल दौरान निकाले गए हैं, जबकि असल में इनमें काफी अन्तर है। इस बारे केन्द्र को सही सुझाव भेजने चाहिए थे ताकि रिपोर्ट के सही परिणाम बन सकें। बैठक में आंध्र प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र, ओडिशा, तामिलनाडु, उत्तर प्रदेश, पश्चिमी बंगाल, केरला, तेलंगाना आदि राज्यों के प्रधान मौजूद थे।