नीति आयोग की रिपोर्ट के बाद पानी मीटर नीति लागू होने का इंतज़ार करने लगे निगम व कमेटियां


जालन्धर, 10 जुलाई (शिव शर्मा): आगामी वर्षों में जालन्धर, अमृतसर सहित देश के 21 राज्यों में भूमिगत जल की चिंताजनक स्थिति बारे नीति आयोग की आई रिपोर्टों के बाद भी अभी तक निगमें, कमेटियां चौकस होना शुरू नहीं हुईं जिसमें पानी का दुरुपयोग रोकने के लिए योजनाबंदी की जा सके। नीति आयोग की रिपोर्ट इस समय चर्चा का विषय बनी हुई है और पर्यावरण प्रेमियों के अलावा अब कई लोग भी इन रिपोर्टों पर चिंता जता रहे हैं। पंजाब सरकार तो वैसे इस मामले में पहले ही अथारिटी बनाकर जल संकट से बचाने के लिए तैयारी शुरू कर चुकी है परंतु पानी बचाने के लिए इस समय मीटर नीति लाने को ज़रूरी समझा जा रहा है और साथ ही इमारतें बचाते समय बरसाती पानी का भंडार करने या फिर ज़मीन में भेजने की प्रणाली लागू करने की मांग की जा रही है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के निर्देश पर पूर्व सरकारों के कार्यकाल में पानी की बचत के लिए मीटर नीति तैयार की गई थी परंतु इस नीति को चुनावों के कारण ही लागू नहीं किया गया था परंतु यह नीति इस समय स्थानीय निकाय विभाग के पास मौजूद है जिसे लागू करने का फैसला किया जाना है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पानी कनैक्शनों पर इसलिए मीटर लगाने के लिए नीति तैयार करने की हिदायत दी थी क्योंकि हाईकोर्ट का मानना था कि बिना मीटरों से पानी का जमकर दुरुपयोग किया जा रहा है। नगर निगमों व कमेटियों के पानी व सीवरेज विभाग स्वयं मीटर नीति का कई वर्षों से इंतज़ार कर रहे हैं क्योंकि उनका भी कहना है कि यदि अभी तक नीति लागू नहीं की गई है तो वह कैसे पानी के कनैक्शनों पर मीटर लगाने का काम करवा सकते हैं। इस समय केवल व्यापारिक संस्थानों के पानी मीटर लगाए गए हैं। नीति आयोग द्वारा आने वाले जल संकट बारे चौकस किया गया है जिस कारण अब निगमों, कमेटियाें की ज़िम्मेवारी और भी बढ़ गई है कि पानी को बचाने के लिए वह कैसे अब मीटर नीति को लागू करने के अलावा बनाई जाने वाली इमारतों में बरसाती पानी को ज़मीन में निकासी करने के लिए वाटर हारवैस्टिंग जैसे प्रणाली लगाने के लिए प्रेरित करे।