विमान दुर्घटना का कारण बताता है ब्लैक बॉक्स


विमान दुर्घटनाएं अक्सर होती रहती हैं। जब विमान दुर्घटना के कारणों की जांच करने के लिए जांचकर्ताओं को नियुक्त किया जाता है तो जांचकर्ता सबके पहले ब्लैक-बॉक्स को ढूंढते हैं। इसी यंत्र से दुर्घटना के कारण का पता चल जाता है। ब्लैक-बॉक्स का नाम लेते ही जेहन में एक काले डिब्बे का नक्शा उभर आता है। वास्तव में काकपिट वायस रिकार्डर तथा ‘फ्लाइट डैटा रिकार्डर’ को ही आम शब्दों में ब्लैक बॉक्स कहते हैं। यह विमान का एक महत्त्वपूर्ण भाग होता है तथा इसका प्रयोग दुर्घटना के पश्चात होता है। संभावना रहती है कि विमान दुर्घटना होते ही कहीं ब्लैक बॉक्स के भी परखच्चे न उड़ जाए अथवा आग से न जल जाए। इस समस्या के निराकरण के लिए ब्लैक बॉक्स के ऊपर दो तरह के खोलों का उपयोग किया जाता है। दोनों खोलों के मध्य में विभिन्न प्रकार के रसायन व द्रव्य भरे जाते हैं। चूंकि खोलों के मध्य में भरे हुए रसायनों के कारण ऊष्मा के संचालन में व्यवधान पड़ता है, परिणामस्वरूप ब्लैक बॉक्स के अंदर के तापक्र म को कोई आंच नहीं पहुंचती, इस प्रकार इसके अंदर के सभी रिकार्डों को कोई क्षति नहीं पहुंचती। फ्लाइट डैटा रिकार्डर व काकपिट वायस रिकार्डर के कार्य अलग-अलग प्रकार के होते हैं। फ्लाइट डैटा रिकार्डर विमान के पिछले 25 घंटे की दिशा, गति, ऊंचाई तथा कई प्रकार के यंत्रों की कार्यविधि से संबंधित सूचनाएं एकत्र करता है। दूसरी ओर काकपिट वायस रिकार्डर चार पर्थो का एक टेप रिकार्डर होता है। काकपिट वायस रिकार्डर के कार्य चार पथों वाले टेप रिकार्डर में बंटे हुए होते हैं।इस टेप रिकार्डर के प्रथम पथ पर विमान चालक पायलट की हर बातचीत रिकार्ड होती रहती है। द्वितीय पक्ष का ताल्लुकात सह चालक से व तृतीय का उड़ान इंजीनियर से होता है। चौथा पथ विमान में अत्यंत सावधानी से लगाए हुए माइक्रोफोन से संबंध रखता है। चारों पथों पर अंकन व रिकार्डिंग का कार्य एक साथ होता है। काकपिट वायस रिकार्डर का टेप गोली बैल्ट जैसा होता है जो बिना रुके घूमता रहता है। इस टेप रिकार्डर में आधे घंटे तक रिकार्डिंग हो सकती है। आगे की रिकार्डिंग होने के साथ-साथ इसमें पीछे की रिकार्डिंग साफ होती रहती है। अब बारी आती है ब्लैक बॉक्स को विमान में फिट करने की। ब्लैक बॉक्स को विमान के एक सुरक्षित स्थान पर इस प्रकार फिट किया जाता है कि भगवान न करे विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने पर यह बॉक्स उससे सरलता से उखड़ कर अलग हो जाए। विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने के साथ ही ब्लैक बॉक्स विमान से अलग होकर सिग्नल देना प्रारंभ कर देता है। जांचकर्ता इन्हीं सिग्नलों की मदद से ब्लैक बॉक्स को ढूंढते हैं। इसके मिल जाने पर्रीलाइट डैटा रिकार्डर व काकपिट वायस रिकार्डर में दर्ज तथ्यों से काफी जानकारियां मिलती हैं।  इस प्रकार ब्लैक बॉक्स की सहायता से विमान दुर्घटना होने के कारणों का पता चल जाता है। 

— बजरंग सारस्वत