पक्षियों की बुद्धि


जिसप्रकार कुत्ता आदमी का पालतू जानवर है, वह उसके इशारों और बोलियों को समझता है। इसी प्रकार अनेक पक्षी भी आदमी के इशारों को समझता हैं। मैना और तोते के संबंध तो सब जानते हैं कि वह दोनों आदमी के समान बोल भी सकते हैं, परंतु कुछ पक्षी ऐसे हैं जो आदमी के इशारे पर फुदकते हैं और उनके पास चले जाते हैं। परंतु सभी पक्षियों में बौद्धिक स्तर समान नहीं होते। नगरों में रहने वाले पक्षियों का बौद्धिक स्तर जंगल में रहने वाले पक्षियों के बौद्धिक स्तर से भिन्न होता है। इनमें बहुत से पक्षी समझदार होतेहैं तथा बहुत से पक्षी बिल्कुल बेवकूफ। पक्षियों में बुद्धि का विकास उनके निवास स्थान के मुताबिक होता है। आमतौर से घरों में रहने वाले पक्षी गौरेये, चिड़िया आदि पक्षी काफी समझदार होते हैं, क्योंकि वह हर समय कुत्ते, बिल्ली आदि अपने शत्रुओं से घिर रहते हैं। कुछ पक्षी झुड़ों में रहते हैं। उनमें से कुछ की समझबूझ काफी पुष्ट होती है। पक्षियों की बुद्धिमता का एक उदाहरण कबूतर है। वे दिये गये संदेश को ठीक स्थान पर पहुंचा देते हैं। कबूतरों ने यह काम लड़ाई और अमन के वक्त बड़ी खूबी से किया है। कबूतर वैसे भी शांति का प्रतीक है। किसी अच्छे शांति समारोह का आरम्भ कबूतर उड़ाकर ही किया जाता है। पक्षियों का उदाहरण पालतू कबूतरों से भी मिलता है। कबूतरों को लोग शर्तें लगाकर उड़ाते हैं, परन्तु वह कहीं भी चले जायें वह प्राय: भटकता नहीं और अपने मालिक के मकान पर बनी छतरी पर आ बैठता है। निशानी के रूप में उनके पैरों में घुंघरनुमा छोटी-छोटी पेट्टियां सी बंधी रहती हैं।

-राम प्रकाश शर्मा