‘पानीपत’ के लिए इस्तेमाल हुए असली आभूषण

जोधा अकबर के बाद, निर्देशक आशुतोष गोवारिकर ने एक बार फिर से अपनी प्रसिद्ध रचना पानीपत के लिए असली सोने और हीरे के आभूषणों का प्रयोग किया है। मुगल और पेशवा युग के लिए आभूषण एक पसंदीदा विषय रहे हैं, इसलिए निर्माताओं ने उनके लिए सबसे अच्छे आभूषणों का इस्तेमाल किया है। क्योंकि निर्देशक आशुतोष गोवारिकर 18वीं शताब्दी से जुड़ी एक फिल्म बना रहे थे, इसलिए वह नहीं चाहते थे कि आभूषण नकली दिखें। उन्होंने इस बात का खास ख्याल रखा कि उस युग के हिसाब से सब कुछ वास्तविक होना और दिखना चाहिए। इसलिए उन्होंने फिल्म के लिए असली आभूषण का उपयोग करने का फैसला किया।  इस्तेमाल किये जाने वाले आभूषण बेहद असाधारण थे जिन्हे उस युग में पेशवा महिलाओं द्वारा इस्तेमाल किया जाता था। आशुतोष कहते हैं, ‘मैं घर में बहुत सारे आभूषणों के साथ-साथ हमारे यहाँ होने वाली महाराष्ट्रियन शादियों और त्योहारों को देखते हुए बड़ा हुआ हूं। यह पहली बार था जब मुझे इसे पर्दे पर दिखाने का अवसर मिला।  शुरू-शुरू में, मैं चिंतित था कि हम इन सभी का निर्माण या व्यवस्था कैसे करेंगे। ऐसा होने के बाद मैंने सबसे पुराने और सबसे प्रामाणिक ज्वैलरी हाउस . पी.एन. गडगिल ज्वैलर्स के बारे में सोचा। मुझे सबसे अधिक सुकून तब मिला जब उन्होंने बोर्ड में आने के लिए सहमति दी। उन्हें आभूषणों के बारे में अच्छी परख थी और काफी ज्ञान भी था इसके बावजूद, उन्होंने अतिरिक्त रिसर्च की और पूरे पानीपत की टीम के सभी किरदारों के लिए सही आभूषण का निर्माण किया। उन्होने आभूषणों के माध्यम से उस युग की महिलाओं और पुरुषों की सुंदरता को जीवंत किया। मुगल और पेशवा दोनों युग को आभूषणों के माध्यम से विशाल रूप से दिखाया गया है, आभूषण के माध्यम से उस युग की महिलाओं और पुरुषों की सुंदरता को जीवित किया गया है।