समझदारी


बच्चों एक बार एक स्कूल के कुछ लड़कों ने इकट्ठे होकर पिकनिक पर जाने का प्रोग्राम बना लिया। जब उन्होंने मुख्य अध्यापक से बात की  वह विद्यार्थियों की राय के साथ सहमत हो गए। मुख्य अध्यापक ने विद्यार्थियों को घर से कुछ खाने-पीने का सामान और कुछ जेब खर्च लाने को कहा। सभी विद्यार्थियों ने अगले दिन के लिए खाने-पीने के सामान के साथ कुछ पैसों का इंतजाम कर लिया। उनमें एक विद्यार्थी ऐसा था जिसके पास न कोई खाने-पीने का सामान था और न ही कोई पैसा था। उसने इस बात का अपने पिता के पास जिक्र भी कर दिया। कुछ देर सोचने के बाद पिता ने अपने बेटे से कहा कि आप चिंता मत करो मैं किसी पड़ोसी से कुछ पैसे उधार ले आता हूं और बाद में लौटा देंगे। जब पिता जाने लगे तो उस विद्यार्थी ने अपने पिता का हाथ पकड़ लिया और घर पर ही बैठने को कहा। पिता ने कहा, ‘बेटा आप पिकनिक पर जाओ मैं खुद पड़ोसी से मांगा हुआ उधार लौटा दूंगा, आप फिक्र मत करो।’ कुछ देर बाद उस विद्यार्थी ने अपने पिता से कहा, ‘पिता जी, मैं उधार लेकर पिकनिक पर नहीं जाऊंगा। क्योंकि पिकनिक पर जाना इतना ज़रूरी नहीं है कि हम उधार लेकर इस पिकनिक का मजा लें। मेरे दिमाग में उधार पैसों की बात फंसी रहेगी इसलिए अगर मैं पिकनिक पर नहीं जाऊं, तो मैं चिंता मुक्त तो रह सकूंगा।’उस विद्यार्थी की बात सुनकर पिता ने उसको गले लगा लिया और अपने बेटे की समझदारी की तारीफ करते हुए कहने लगा बेटा आप की समझदारी पर एक दिन पूरा देश गर्व करेगा। बच्चों यह समझदार लड़का और कोई नहीं था बल्कि लाला लाजपत राय जी थे जो भारत को आज़ादी दिलाने वाले शहीदों में से एक थे।

— 511, खैहरा इन्कलेव, जालन्धर।