गेहूं की फसल में नदीनों पर काबू कैसे पाएं ?


पंजाब के कुल रकबे का 83 प्रतिशत रकबा काश्त अधीन है। इसमें से रबी के मौसम में 34-35 लाख हैक्टेयर रकबे पर गेहूं बीजी जाती है और खरीफ के मौसम में लगभग 30 लाख हैक्टेयर रकबे पर धान की काश्त होती है। गेहूं, रबी और धान खरीफ में राज्य की मुख्य फसलें हैं। लगभग 93 प्रतिशत रकबे पर अब गेहूं की बिजाई हो चुकी है। गेहूं की फसल में गुल्ली-डंडे की समस्या गम्भीर रूप धारण कर गई है। कई स्थानों पर जहां इस पर काबू नहीं पाया गया हो, यह 50 प्रतिशत तक उत्पादकता प्रभावित करता है। इसके अलावा भी कई नदीन हैं, जो फसल को प्रभावित करते हैं जैसे कई तरह के घास, चौड़े पत्तों वाले नदीन, जंगली जवी, बुंई, जंगली पालक, बाथू, मैणा, मैणी, कंटीली पालक आदि। फसल से पूरा झाड़ प्राप्त करने के लिए इन नदीनों खासतौर पर जिन ज़मीनों में धान की काश्त की गई हो, गुल्ली-डंडा को काबू करना ज़रूरी है। यह नदीन खाद्य तत्वों, पानी, धूप और रौशनी के लिए फसल का मुकाबला करते हैं। यह नदीन फसल के पुंगरने के समय पहले पानी से भी पहले, पहले पानी के बाद या दूसरे पानी के बाद या फिर यदि बारिश हो जाए उस समय पैदा होते हैं। गैर-रासायनिक तरीकों से भी इन नदीनों पर काबू पाया जा सकता है। जैसे कि भूमि की ऊपर की सतह को सुखाना, फसली विभिन्नता, शुद्ध और साफ बीज का उपयोग तथा सही ढंग से बिजाई द्वारा। परन्तु यह तरीके आम किसानों के प्रयोग में नहीं। मध्यम और भारी ज़मीनों में बैड प्लांटर्स से गेहूं को बैडों पर बीजने से गुल्ली-डंडा तथा अन्य नदीनों की रोकथाम की जा सकती है। इस ढंग से बिजाई करके फसल का नाड़ भी मज़बूत होता है, क्योंकि पंक्तियों के दोनों तरफ से फसल को रौशनी और धूप मिलते हैं। इस ढंग से बिजाई करके ट्रैक्टर से गुडाई द्वारा खालों में उगे नदीनों की रोकथाम की जा सकती है। बिजाई के लिए खेत तैयार करने से पहले और खेत तैयार करने के बाद ऊपर की सतह सुखाकर यदि गेहूं की बिजाई की जाए तो नदीनों के पहले लौ की रोकथाम हो जाती है, जो नदीन भूमि की ऊपर की सतह से उगते हैं। फसली विभिन्नता से भी नदीनों और गुल्ली-डंडे पर काबू पाया जा सकता है। इस विधि द्वारा धान की बजाय कोई अन्य फसल जैसे कि नरमा, मक्की, गन्ना आदि की फसल ले ली जाए। लेज़र कराहे का प्रयोग करके भी नदीनों पर काबू पाया जा सकता है। पूरे खेत में बराबर पानी लगाने और फसलों की समान वृद्धि के लिए खेत को लेज़र कराहे से संतुलित करना चाहिए। लेज़र कराहे से संतुलित किए खेत में नदीननाशक भी अधिक प्रभावशाली होते हैं। पंक्तियों में आगामी अक्तूबर के अंतिम सप्ताह में या नवम्बर के पहले सप्ताह में बिजाई कर ली जाए तो भी गुल्ली-डंडे या अन्य नदीनों के पहले लौ को कम किया जा सकता है। गेहूं की बिजाई, धान की खड़ी पराली में यदि हैपीसीडर से कर ली जाए तो भी गुल्ली-डंडे तथा अन्य नदीनों की समस्या की रोकथाम हो जाती है। खड़े नाड़ को चौपर से काट कर धान की पराली को एकत्रित करके फिर ज़ीरो ड्रिल से भी बिजाई की जा सकती है, जिसके बाद नदीनों की समस्या कम होगी। आम किसान गुल्ली-डंडा तथा अन्य नदीनों की रोकथाम के लिए नदीन-नाशक ही इस्तेमाल करते हैं। गुल्ली-डंडे को खत्म करने के लिए नदीन-नाशकों का प्रयोग आमतौर पर बिजाई के दो दिन के भीतर या पहले पानी से पहले या बाद में की जा सकती है। नदीन नाशक कई समूहों में उपलब्ध है। बिजाई के समय नदीन उगने से पहले प्रयोग करने के लिए, पहले बिजाई से पहले नदीन उगने के बाद इस्तेमाल करने के लिए, पहली सिंचाई के बाद नदीन उगने के बाद इस्तेमाल करने के लिए आदि। क्रमवार पैंडीमैथालिन ग्रुप, आइसोप्रोटयूरान ग्रुप, सल्फोसलफुरान ग्रुप तथा कलोडिनाफोप, पिनोकसाडिन ग्रुप के ब्रांड उपलब्ध हैं। यदि गुल्ली-डंडे के साथ कंटीली पार्क हो तो मैटसलफुरान ग्रुप के नदीन-नाशक इस्तेमाल किए जाने चाहिए। यदि गुल्ली-डंडे से चौड़े पत्तों वाले नदीनों में मकौह, कंटीली पार्क तथा हिरणखुरी हो तो मैटसलफुरान+कारफेटनराजॉन ग्रुप के नदीन-नाशक इस्तेमाल किए जाने चाहिए। गुल्ली-डंडे से घास और चौड़े पत्ते वाले नदीनों की एक साथ रोकथाम के लिए सल्फोसफुरान+मैटसलफुरान-टोटल नदीन-नाशक इस्तेमाल करना चाहिए। गत वर्ष किसानों द्वारा किए गए अनुभवों के आधार पर देखा गया है कि यदि गुल्ली-डंडा प्रचलित नदीन-नाशकों से न मरता हो तो शगन 21-11 (कलोडिनाफोप +मैट्रीब्यूजिन) का इस्तेमाल करना चाहिए परन्तु शगन 21-11 को उन्नत पी.बी.डब्ल्यू.550 किस्म की गेहूं पर नहीं छिड़कना चाहिए। क्योंकि उस फसल पर इसका बुरा असर होगा।  नदीन-नाशकों का छिड़काव साफ मौसम में करना चाहिए। छिड़काव के बाद पानी अधिक नहीं लगाना चाहिए। हल्का लगाना चाहिए। छिड़काव के बाद स्प्रे पम्प को पानी से धोकर और फिर कपड़े धोने वाले सोडे के 0.5 प्रतिशत घोल से अच्छी तरह से धो लेना चाहिए। नदीन उगने से पहले इस्तेमाल करने वाले नदीन-नाशकों के छिड़काव के लिए फ्लैटफैन या फ्लड जैट नॉजल इस्तेमाल करनी चाहिए और नदीन उगने के बाद इस्तेमाल करने वाले नदीन-नाशकों के लिए फैल्ट-फैन नोज़ल इस्तेमाल की जानी चाहिए। मशीनी स्प्रे जो गत 2-3 वर्षों से कृषि विभाग की सिफारिश पर की जा रही है, बहुत प्रभावशाली साबित हुई है। जहां यह स्प्रे मशीनें उपलब्ध हों, किसानों को इनके द्वारा स्प्रे करवानी चाहिए। यह अधिक प्रभावशाली पाई गई है। जो पौधे छिड़काव के बावजूद भी बच जाएं, किसानों को चाहिए कि वह उन पौधों को बीज बनने से पहले उखाड़ दें, ताकि गेहूं की अगली फसल में नदीनों की समस्या न आए। नदीन-नाशकों का इस्तेमाल अदल-बदल कर करना चाहिए। एक ही किस्म के नदीन बार-बार इस्तेमाल करने से नदीनों में उस ज़हर के प्रति सहनशीलता बढ़ जाती है। संशोधन : गत 3 दिसम्बर के अंक में ‘रबी के मौसम में फसली विभिन्नता लाने की ज़रूरत’ को ‘खरीफ के मौसम में फसली विभिन्नता लाने की ज़रूरत’ पढ़ा जाए।

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