सांपों को ज़हर कहां से मिलता है?

 

वैज्ञानिकों का कहना है कि इस समय धरती पर अलग-अलग सांपों की लगभग 2400 प्रजातियां रह रही हैं। इनमें से लगभग 8 प्रतिशत ही ज़हरीली हैं जो अपने शिकार को अपने ज़हर के साथ बेहोश करती हैं या मार देती हैं। ज्यादातर सांपों का ज़हर इतना ज़हरीला या ज्यादा मात्रा में नहीं होता कि मनुष्य के लिए खतरा बन सके लेकिन हैरानी की बात यह है कि सांपों को अपना ज़हर कहां से मिलता है।
हर सांप के पास बड़ी मात्रा में सलाईवा या थूक होता है जो उसको शिकार को पचाने में मदद करता है। ज़हरीले सांपों में स्लाइवा गलैंड्स में से एक इस प्रकार का पदार्थ पैदा करता है जो कि सांप के शिकार के लिए जहरीला होता है। यह पदार्थ ही सांप का ज़हर होता है। 
‘क्या सभी ज़हरीले सांपों का ज़हर एक समान ज़हरीला होता है?’
‘नहीं! कुछ सांपों का ज़हर हाथी को मार सकता है जबकि कुछेक का मात्र एक छोटी सी छिपकली को ही मार सकता है। शायद सांपों की 200 प्रजातियां ही मनुष्य के लिए खतरनाक हैं।’
‘एक तो कोबरा परिवार है और दूसरा वाईपर। कुछ अन्य ज़हरीले सांप हैं जिनको ‘कोलूबडरस’ कहते हैं। यह सांपों का सबसे बड़ा परिवार है।’
‘कोबरा और उसके रिश्तेदारों में मुंह के आगे ज़हरीले दांत होते हैं, ऊपर के दांतों के दोनों तरफ एक-एक। जब सांप काटता है तो मासपेशी ग्लैंड पर दबाव डालती है, इससे ज़हर सांचे में आ जाता है और सांचे के सिरे से सीधा शिकार में पहुंच जाता है।’
‘लेकिन कोबरा ज़हर को धार की तरह मुंह से फैंकता भी है।’
‘यह थूकने वाला कोबरा होता है जो अपने सांचों से ज़हर का स्प्रे करता है। इससे खतरा होता है। वह शिकार की आंखों को निशाना बनाता है, जैसे हिरण या भैंस। ज़हर की धार 2 मीटर तक असर करती है और तुरंत अंधा कर देती है।’
‘काटने पर ज़हर नाड़ी-तंत्र को प्रभावित करता है, जिसके साथ शिकार हिल नहीं सकता। जब यह ज़हर दिल या फेफड़ों में पहुंचता है तो शिकार मर जाता है। वाईपर के लम्बे ज़हरीले दांत होते हैं, उसका ज़हर खून की कोशिकाओं और नाड़ियों को प्रभावित करता है। इसके साथ सोजिश और खून बहता है।’