फूट गया अमरीका का टैरिफ बम!
अमरीका के हिसाब से 2 अप्रैल 2025 को दिन में, जबकि भारतीय समयानुसार 3 अप्रैल के तड़के 2 बजे, अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने आखिरकार दुनिया पर वह टैरिफ बम फोड़ दिया, महीनों से वह अपने जिस टैरिफ बम से दुनिया को डरा रहे थे। व्हाइट हाउस ने इस दिन को मुक्ति दिवस यानी लिबरेशन डे कहा है। इस मौके पर व्हाइट हाउस में आयोजित प्रैस कांफ्रैंस में ट्रम्प ने भारत का दो बार जिक्र करते हुए कहा कि भारत के मामले में निर्णय मुश्किल रहा। प्रधानमंत्री मोदी हाल ही में यहां आए थे। वो मेरे अच्छे दोस्त हैं। गौरतलब है कि अमरीका ने भारत पर 26 प्रतिशत टैरिफ लगाया है जबकि हम अमूमन अमरीकी सामान पर औसतन 52 प्रतिशत का टैरिफ लगाते हैं। इस तरह देखा जाये तो अमरीकी राष्ट्रपति भले चुने जाने के पहले से ही रेसीप्रोकल टैक्स यानी जैसे को तैसा अंदाज में टैक्स लगाए जाने की बात करते रहे हों, लेकिन भारत पर उन्होंने हमारे मुकाबले आधा टैक्स ही लगाया है और इसे सही ही ‘डिसकाउंटेड टैक्स’ कहा है। भारत के इतर अमरीका ने यही टैक्स चीन पर 34 प्रतिशत, यूरोपीय यूनियन पर 20 प्रतिशत, साउथ कोरिया पर 25 प्रतिशत, जापान पर 24 प्रतिशत, वियतनाम पर 46 प्रतिशत और ताइवान पर 32 प्रतिशत लगाया है। फिलहाल अमरीका ने करीब 60 देशों पर उनके द्वारा अमरीका पर लगाए जाने वाले टैरिफ की तुलना में आधा टैरिफ लगाने का फैसला किया है।
इसके साथ ही दूसरे देशों से अमरीकी में आने वाले सभी सामान पर 10 प्रतिशत बेसलाइन (न्यूनतम) टैरिफ लगेगा। बेसलाइन टैरिफ 5 अप्रैल को और रेसिप्रोकल टैरिफ 9 अप्रैल की रात 12 बजे के से लागू होंगे। बेसलाइन टैरिफ व्यापार के सामान्य नियमों के तहत आयात पर लगाया जाता है, जबकि रेसिप्रोकल टैरिफ किसी अन्य देश के टैरिफ के जवाब में लगाया जाता है। 8 अप्रैल के बाद से अमरीका विदेशों में बनने वाले वाहनों पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाएगा। अब तक अमरीका अन्य देशों से मोटरसाइकिलों पर केवल 2.4 प्रतिशत टैरिफ वसूलता था। जबकि भारत 60प्रतिशत, वियतनाम 70 प्रतिशत और अन्य देश इससे भी अधिक कीमत वसूलते हैं। ट्रम्प का मानना है कि दुनिया के ज्यादतर देशों ने अमरीका को 50 वर्षों तक लूटा है, जिसे आज यानी 2 अप्रैल, 2025 से वह खत्म करने की शुरुआत कर चुके हैं। हालांकि अमरीका आज भी दुनिया की सबसे बड़ी इकोनामी है, लेकिन ट्रम्प के मुताबिक अतीत में अमरीकी हुक्मरानों की गलत नीतियों के कारण अमरीका दुनिया का सबसे बड़ा कर्जदार देश बन गया है, लेकिन अब अमरीका अमीर बनेगा, दुनिया में सबसे अमीर देश। ट्रम्प कहते हैं, ‘आज हम अमरीकी वर्कर के लिए खड़े हो रहे हैं। आखिरकार हम अमरीका फर्स्ट को लागू कर रहे हैं। हम वास्तव में बहुत धनवान हो सकते हैं। हम इतने अधिक धनवान हो सकते हैं कि हो सकता है यह कई लोगों को अविश्वसनीय लगे, लेकिन अब हम समझदार हो रहे हैं।’
हालांकि विशेषज्ञों का ऐसा मानना नहीं है। अमरीका की प्रतिष्ठित येल यूनिवर्सिटी का मानना है कि इस टैरिफ बम के चलते अमरीका पर मंदी के 35 प्रतिशत आसार गहरा गए हैं क्योंकि इस टैरिफ बम के कारण हर अमरीकी परिवार पर करीब 35 हजार रूपये वार्षिक महंगाई का बोझ बढ़ जाएगा लेकिन इस टैरिफ बम के फोड़े जाने के बाद से अमरीका के सरकारी खजाने में 46 लाख करोड़ रूपये का इजाफा होगा। मतलब साफ है कि अमरीकी सरकार सम्पन्न होगी लेकिन इस बम के नतीजे से अमरीकी नागरिकों की क्रयशक्ति में कमी आयेगी। जहां तक भारत को अमरीका के इस टैरिफ शिकंजे से होने वाले नुकसान की बात है तो हम पर इससे करीबी 35 अरब रूपये का बोझ बढेगा। हालांकि इससे भारत को फायदा भी हो सकता है। भारत का जिन 10 देशों के साथ सबसे ज्यादा व्यापार है, उनमें से अकेले अमरीका ही वह देश है, जिसके साथ हमारा व्यापार फायदे में हैं बाकी सब देशों के साथ हम व्यापार घाटे हैं लेकिन अमरीका ने जिस तरह से टैरिफ बढ़ाया है उसे देखते हुए कई देश मसलन चीन ही भारत से ज्यादा आयात की सोच रहा है क्योंकि इससे दोनों देशों को फायदा होगा। मतलब यह कि यह टैरिफ बम हमारे लिए फायदे का सौदा साबित हो सकता है।
वैसे अमरीका सिर्फ अपने व्यापार घाटे को कम करने के लिए ही टैरिफ बम का सहारा नहीं ले रहा बल्कि इसे एक औद्योगिक रणनीति के तौर पर भी आजमाना चाहता है। यही वजह है कि अमरीका ने कहा है कि अगर कोई कंपनी टैरिफ से छूट चाहती है, तो उसे अमरीका में अपना प्रोडेक्ट बनाना होगा। इससे न केवल अमरीकियों को रोज़गार मिलेगा बल्कि इस टैरिफ बम से अमरीका का नए सिरे से औद्योगिक विकास भी होगा। नौकरियां और कारखाने अमरीका लौटेंगे। यह मन के भीतर का निष्कर्ष नहीं टैरिफ बम के फायदों का खुला नारा भी यही है। ट्रम्प का मानना है कि कई देशों ने अमरीकी बाज़ार का फायदा लेकर खुद को समृद्ध बनाया लेकिन अमरीकी सामान के लिए अपने बाजार में सख्ती लगा दी है। अब ऐसा नहीं चलेगा अब अमरीका भी अपने फायदे के बारे में सोचेगा।
अब नौकरियां और कारखाने अमरीका में वापस आएंगे। ट्रम्प ने इसी टार्गेट के मद्देनज़र 2 अप्रैल 2025 को अमरीका की आर्थिक आज़ादी का दिन बताया है, उनके मुताबिक, ‘आज का दिन अमरीका के लिए आर्थिक आज़ादी का दिन है। हमें अमरीका को फिर से महान बनाना है। हम रेसिप्रोकल टैरिफ का ऐलान कर रहे हैं।’ वैसे इसका सबसे बड़ा शिकार कंबोडिया हुआ है। अमरीका अब कंबोडिया से आयातित वस्तुओं पर 49 प्रतिशत और चीन से आयात होने वाले सामान पर 34 प्रतिशत शुल्क वसूलेगा। अन्य देशों में यूरोपीय संघ से 20 प्रतिशत, दक्षिण कोरिया से 25 प्रतिशत, वियतनाम से 46 प्रतिशत, ताइवान से 32 प्रतिशत, जापान से 24 प्रतिशत, थाईलैंड से 36 प्रतिशत, स्विट्जरलैंड 31 प्रतिशत, इंडोनेशिया से भी 32 प्रतिशत, मलेशिया से 24 प्रतिशत, यूनाइटेड किंगडम से 10 प्रतिशत से, दक्षिण अफ्रीका से 30 प्रतिशत, ब्राजील से 10 प्रतिशत, बांग्लादेश से 37 प्रतिशत, सिंगापुर से 10 प्रतिशत, इज़रायल से 17 प्रतिशत और फिलीपींस से 17 प्रतिशत तथा चिली 10 प्रतिशत टैरिफ वसूलेगा।
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