गेहूं खरीद हेतु व्यापक प्रबन्ध

देश की सर-सब्ज़ धरती पंजाब में वर्ष 2025 के रबी मौसम के मुख्य उत्पाद गेहूं की खरीद की विधिवत शुरुआत प्रथम अप्रैल से हो गई है हालांकि खेतों में गेहूं की फसल अभी तक पूरी तरह से सूखी नहीं है। यह भी कि मंडियों में गेहूं की नई फसल की आमद अभी तक शुरू भी नहीं हुई है। पुराने समय में गेहूं की बाकायदा खरीद बैसाखी के अवसर पर मानी जाती थी, किन्तु धीरे-धीरे विदेशी खादों एवं कृषि उपकरणों के अधिकाधिक उपयोग और भूमि की तपिश बढ़ने के कारण सरकारी दस्तावेज़ों में गेहूं की खरीद घोषणा खिसकते हुए प्रथम अप्रैल तक पहुंच गई है। तथापि प्रदेश के कृषि विशेषज्ञों और किसान नेताओं का दावा है कि प्रदेश के अधिकतर भागों में खेतों में खड़ी गेहूं की डालियों में पड़ा दाना अभी पूरी तरह सूखा नहीं है। इसके सूखने में अभी कम से कम एक सप्ताह और लग सकता है। हरित डालियों को काटे जाने से जहां झाड़ में कमी आती है, वहीं गेहूं के दाने की गुणवत्ता भी कसौटी की परख में कमज़ोर हो जाती है। पंजाब में कृषि विशेषज्ञों की पूर्व घोषणाओं के अनुसार बेशक इस बार भी प्रदेश में गेहूं का रिकार्ड उत्पादन होने की प्रबल सम्भावना है हालांकि प्रदेश की सरकार ने गेहूं की खरीद का लक्ष्य पिछले वर्ष की तुलना में कम घोषित किया है। ऐसा इसलिए किया गया है कि पिछले वर्ष प्रदेश में गेहूं की बुआई हेतु कम रकबे का निर्धारण किया गया था। पिछले वर्ष बुआई का यह रकबा 35.08 लाख हैक्टेयर था जो इस बार 35 लाख हैक्टेयर रह गया। इसके बावजूद कृषि विशेषज्ञों ने पंजाब में गेहूं के भरपूर उत्पादन के संकेत दिये हैं। इसके विपरीत गेहूं बोने वाले किसानों के लिए खुशी की बात यह है कि इस बार गेहूं की सरकारी खरीद हेतु न्यूनतम खरीद मूल्य में 150 रुपये प्रति क्ंिवटल की वृद्धि की गई है। प्रदेश सरकार ने गेहूं की खरीद हेतु 28 हज़ार करोड़ रुपये कैश क्रेडिट लिमिट राशि जारी कर दी है ताकि किसानों को उनकी खरीदी गई फसल की 24 घंटों के भीतर अदायगी हो सके। 
प्रदेश की सरकार ने बेशक गेहूं खरीद की घोषणा के साथ ही यह भी दावा किया है कि उसने इस हेतु व्यापक और पुख्ता प्रबन्ध किये हैं, किन्तु विगत वर्ष इसी मौसम में गेहूं की खरीद के दौरान उपजी बाधाओं और परेशानियों के दृष्टिगत सरकार को इन प्रबन्धों को सुनिश्चित किए जाने की अग्रिम व्यवस्था अवश्य  करनी चाहिए। गेहूं की सरकारी खरीद के दौरान अक्सर सबसे बड़ी अड़चन गोदामों अथवा फसल के रख-रखाव वाले स्थलों की कमी को लेकर हुआ करती है। विशेषज्ञों के अनुसार प्रदेश सरकार और केन्द्रीय एजेंसियों के गोदामों में अभी भी पिछले वर्षों का भण्डार पड़ा है। यह भी कि विगत वर्ष खरीद किये गये धान की एक बड़ा भाग भी गोदामों में पड़ा है। दूसरी बड़ी अड़चन जो प्राय: प्रत्येक वर्ष मंडियों में देखने को मिलती है, वह होती है बारदाने की कमी। सरकार के दावों और प्रबंधों के बावजूद प्रत्येक वर्ष बारदाने की कमी की समस्या पैदा होती रहती है। बेशक यह कमी कई बार जानबूझ कर पैदा की गई अप्राकृतिक भी होती है, किन्तु इसके कारण खरीद-प्रक्रिया तो अवश्य प्रभावित होती है। इससे किसानों को कई तरह की परेशानियों का समाना भी करना पड़ता है। किसानों की फसल मंडियों में खुले आकाश के तले मैदानों में वर्षा और धूप से खराब होने लगती है जिससे उन्हें मानसिक परेशानी के अलावा आर्थिक नुकसान भी सहन करना पड़ता है। ऐसी स्थिति में हम समझते हैं कि सरकार को गेहूं की खरीद प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही बारदाने की व्यापक व्यवस्था कर लेनी चाहिए। खरीद किये गये स्टाक को मंडियों से उठाने और गोदामों अथवा भण्डारण केन्द्रों तक पहुंचाने के लिए परिवहन अथवा वाहनों की अनुपलब्धता भी इस दौरान कई बार समस्या बनती है। सरकार को इस ओर भी पूरा ध्यान देकर इसकी समुचित व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि किसानों को किसी प्रकार की बेवजह परेशानी न हो।
इस दौरान यह भी पता चला है कि प्रदेश की सरकार ने गेहूं की खरीद करने वाली एजेंसियों पनग्रेन, मार्कफैड, वेयर हाऊस व पनसप को गेहूं की खरीद हेतु प्रबंध व्यवस्था को मुकम्मल करने का निर्देश जारी किया है। सरकार ने अधिकारियों को बाकायदा तौर पर मंडियों का आबंटन भी किया है, और उन पर जिम्मेदारी भी आयद की गई है। सरकारी निरीक्षकों और इंस्पैक्टरों को भी गेहूं की खरीद के दौरान किसानों और आढ़तियों को किसी प्रकार की समस्या अथवा परेशानी न होने देने को सुनिश्चित करने हेतु कहा गया है। नि:संदेह हम समझते हैं कि इस सबके दृष्टिगत चालू रबी मौसम की फसलों खास तौर पर गेहूं की खरीद का कार्य निर्विघ्न रूप से सम्पन्न हो जाने की बड़ी सम्भावना है। पंजाब में कुल 1865 दाना मंडियां हैं जिनमें सरकार ने खरीद और साफ-सफाई हेतु व्यापक प्रबंधों के निर्देश जारी किये हैं। गेहूं की खरीद हेतु अतिरिक्त गांवों में 700 अस्थायी मंडियां भी बनाई गई हैं। दाना मंडियों में किसानों की सुविधा हेतु बिजली-पानी की निर्विघ्न सप्लाई हेतु भी निर्देश जारी किये गये हैं। अत: हम समझते हैं कि इन सम्पूर्ण व्यवस्थाओं के दृष्टिगत गेहूं की खरीद का कार्य बिना किसी अड़चन और बाधा के सम्पन्न हो जाएगा।

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