चीन को खुश करने के लिए भारत से पंगा लेता बांग्लादेश!
हाल में अपनी चीन यात्रा के दौरान बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस ने जिस तरह से भारत के सात पूर्वोत्तर राज्यों को लैंड लॉक्ड (भूमि से घिरे हुए) और खुद को उनका एकमात्र समुद्री संरक्षक (गार्डियन) बताते हुए, चीन को आमंत्रित किया कि वह इस पूरे इलाके के आर्थिक दोहन के लिए आगे आये, वह आधुनिक कूटनीति का सबसे दयनीय चुटकुला है। जातक कथाओं के दौर में भले ऐसे चुटकुले किसी किस्म का रणनीतिक चातुरी समझे जाते रहे हों, आज के दौर में तो ऐसी हरकतों के लिये एक ही शब्द है ‘आत्मघात’। मोहम्मद यूनुस सचमुच बांग्लादेश के लिए दुहस्वप्न बनते जा रहे हैं। सच कहा जाता है कि राजनीति में गैर राजनीतिक व्यक्ति अकसर बिग सिफर साबित होते हैं, कम से कम मोहम्मद यूनुस की हरकतों को देखकर तो ऐसा ही लगता है। वरना आज के दौर में भला कौन सा ऐसा देश है, जिसका मुखिया किसी देश को प्रस्ताव देगा कि वह उसकी अर्थव्यवस्था को अपना विस्तार बनाकर उसके समुद्री भूगोल का इस्तेमाल कर ले।
गौरतलब है कि मोहम्मद यूनुस हाल ही में चीन की चार दिन की आधिकारिक यात्रा पर पहुंचे थे। यहां उन्होंने चीन को बांग्लादेश में ज्यादा से ज्यादा निवेश हेतु राजी करने और कई तरह की ब्याज संबंधी छूट पाने के लिए, उसके सामने लगभग बिछ जाते हुए उसे सुझाव दिया कि भारत के नॉर्थ-ईस्ट राज्य जिन्हें सेवन सिस्टर्स कहा जाता है, ‘लैंड लॉक्ड’ हैं, साथ ही नेपाल और भूटान में कई तरह के संसाधनों, विशेषकर हाइड्रो पावर की भरमार है, अत: वह यानी चीन बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था को अपना विस्तार बनाकर इस स्थिति का भरपूर दोहन करे। मोहम्मद यूनुस ने जिस तरह चीन को यह सुझाव दिया वह कोई जुबान फिसलने का नतीजा नहीं था बल्कि इसके लिए बांग्लादेश ने खुद को भी चीन के समक्ष किसी बलि के बकरे की तरह पेश करते हुए खुद को चीनी अर्थव्यवस्था का विस्तार मानने की बात कही और स्पष्ट शब्दों में ढाका को भारत के पूर्वोत्तर राज्यों, नेपाल और भूटान तक समुद्री मार्ग के रूप में चीन के चौकीदार के रूप में पेश किया। इसके पीछे बांग्लादेश की कोई बहुत महत्वाकांक्षी रणनीति भी नहीं है बल्कि कर्ज के बोझ से महज तात्कालिक राहत पाने के लिए की गयी चापलूसी ही है।
मालूम हो कि बांग्लादेश पर वर्तमान में लगभग 104 अरब अमरीकी डॉलर का विदेशी कर्ज है। जनवरी 2025 तक सरकारी व सार्वजनिक क्षेत्र का कर्ज 84.45 अरब डॉलर और निजी क्षेत्र का कर्ज 19.91 अरब डॉलर था। बांग्लादेश की विदेशी मुद्रा भंडार की स्थिति इतनी कमजोर हो गयी है कि पाकिस्तान भी उसे देखकर खुद के मजबूत होने का एहसास कर सकता है। जो बांग्लादेश अभी कुछ सालों पहले भारतीय उपमहाद्वीप की सबसे तेज़ रफ्तार आगे बढ़ रही अर्थव्यवस्था बनकर उभरा था, आज उसी बांग्लादेश के पास अपने कर्ज दायित्वों को पूरा करने के लिए ब्याज की किश्त भी समय पर चुका पाने की क्षमता नहीं है। सितंबर 2024 में, बांग्लादेश की सरकार के पास भारतीय बिजली कंपनियों को 1 अरब डॉलर से अधिक का भुगतान करने में क्षमता नहीं थी। उसके पास पूरे विदेशी मुद्रा भंडार में 6 अरब डॉलर भी नहीं बचे थे जबकि इन आर्थिक चुनौतियों के समाधान के लिए, बांग्लादेश ने अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) सहित विभिन्न विकास भागीदारों से 8 अरब डॉलर की बजट सहायता की मांग की है। यह सहायता विदेशी कर्ज चुकाने और विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ाने के लिए आवश्यक है। लेकिन अभी तक उसे इन ब्रेटनवुड संस्थाओं से इतने बड़े कर्ज की प्राप्ति नहीं हुई इसलिए यूनुस किसी भी स्तर पर जाकर शी जिनपिंग के सामने गिडगिडा रहे हैं। हालांकि इस हद तक की चापलूसी के बावजूद चीन ने अभी तक कर्ज देने का कोई स्पष्ट आश्वासन नहीं दिया। कर्ज की विकट परिस्थितियों को देखते हुए, बांग्लादेश की सरकार विभिन्न देशों और वित्तीय संस्थानों से कर्ज की शर्तों में राहत और पुनर्गठन के प्रयास कर रही है, ताकि देश की आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित की जा सके।
हां, इस दुस्साहस का बांग्लादेश को यह तात्कालिक फायदा ज़रूर हुआ है कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से यूनुस की मुलाकात हो गयी है। मुलाकात के दौरान जिनपिंग ने यह भी है कि आपसी भरोसे के आधार पर चीन बांग्लादेश का अच्छा पड़ोसी,अच्छा दोस्त और अच्छा पार्टनर बना रहेगा। दोनों नेताओं ने नौ समझौते पर साइन भी किए हैं। इनमें आर्थिक और तकनीकी सहयोग पर एक समझौता और 8 समझौता ज्ञापन पर हुए हैं। लेकिन ये समझौते आर्थिक या कारोबारी समझौते न होकर प्राचीन ग्रंथों के अनुवाद, प्रकाशन, सांस्कृतिक विरासत, समाचार आदान-प्रदान, मीडिया, खेल और स्वास्थ्य क्षेत्रों में सहयोग से जुड़े हैं। जाहिर है ये भरतू के समझौते हैं।
चीनी राष्ट्रपति ने जुबानी जमाखर्च में भले कहा है कि हम अच्छे पड़ोसी, दोस्त और पार्टनर बने रहेंगे, साथ ही जिनपिंग ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार को अपना समर्थन देने का भरोसा भी दिलाया है लेकिन हुए 9 समझौतों में एक भी वह नहीं है जिसके लिए बांग्लादेश चीन से गिड़गिड़ाया है। यूनुस ने चीन से अपील की थी कि चीन लोन पर इंटरेस्ट रेट 3 प्रतिशत से कम करके 1.2 प्रतिशत कर दे साथ ही चीन की तरफ से फंड किए जा रहे प्रोजेक्ट्स से कमिटमेंट फीस को हटाए लेकिन चीन ने इन दोनों मांगों को लेकर अभी तक साफ-साफ कुछ नहीं कहा। वास्तव में चीन बांग्लादेश का चौथा सबसे बड़ा कर्जदाता है। जापान, वर्ल्ड बैंक और तीसरे नंबर पर एशियन डेवलपमेंट बैंक के बाद बांग्लादेश 1975 से अब तक चीन से 7.5 अरब डॉलर के कर्ज लिया है।
लेकिन मोहम्मद यूनुस और शी जिनपिंग के बीच बीजिंग के ग्रेट हॉल में बैठक के दौरान एक बार भी चीन की तरफ से नहीं कहा गया कि कर्ज देंगे बस जिनपिंग बांग्लादेश को बिना टैक्स दिए चीनी मार्किट में अगले कुछ सालों तक (2028 तक) सामान में बेचने छूट दी है। यह अलग बात है कि बांग्लादेश ने इसे भी अपनी एक बहुत बड़ी उपलब्धि के बतौर पेश किया है। संभव है बांग्लादेश के आम और कटहल भी इस साल चीन खरीदे।
भारत को रणनीतिक ‘चिकन नेक’ गलियारे की किलेबंदी कई गुना करना होगा। क्योंकि यूनुस का सुझाव कुछ और नहीं बल्कि देश को इस महत्वपूर्ण मार्ग से काटने का खतरनाक इशारा है। इसलिए चिकन नेक गलियारे के नीचे और उसके आसपास और अधिक मजबूत रेलवे और सड़क नेटवर्क विकसित करना ज़रूरी है।
-इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर