सूरज किस चीज़ से बना है ?

‘दीदी, अभी तक कोई वैज्ञानिक या अंतरिक्षयान सूरज तक नहीं जा सका है, तो फिर यह कैसे मालूम हुआ कि सूरज किन चीज़ों से बना है?’
‘हम यह जानते हैं कि सूरज गर्म गैसों की विशाल गेंद है, जोकि गर्म गैसों की अनेक परतों से बनी हुई है।’ 
‘लेकिन यह कैसे मालूम हुआ है कि सूरज इन या अन्य चीज़ों से बना हुआ है?’
‘वही बता रही हूं, थोड़ा सब्र रखो।’
‘ओके।’
‘खगोल शास्त्रियों को सूरज के संदर्भ में अपने अधिकतर तथ्य विशेष उपकरण प्रयोग करके हासिल हुए हैं। इनमें से कुछ उपकरण हैं स्पेक्ट्रोस्कोप, स्पेक्ट्रोग्राफ, स्पेक्ट्रोहेलियोग्राफ, कोरोनाग्राफ, रेडियो टेलिस्कोप और स्पेस प्रोब।’ 
‘इनका किसलिए इस्तेमाल किया जाता है?’
‘स्पेक्ट्रोस्कोप का प्रयोग सूरज की चमकती हुई गैसों का अध्ययन करने के लिए किया जाता है। इससे वैज्ञानिक यह बता सकते हैं कि सूरज की रोशनी में रंग किन रसायनों से उत्पन्न होते हैं। फिर स्पेक्ट्रोग्राफ से वैज्ञानिक इन रंगों का स्थायी रिकॉर्ड रखते हैं।’ 
‘तो स्पेक्ट्रोहेलियोग्राफ किस काम आता है?’
‘स्पेक्ट्रोहेलियोस्कोप से खगोलशास्त्री मालूम करते हैं कि सूरज में विभिन्न पदार्थ किस प्रकार वितरित हैं और जब इस यंत्र में फोटोग्राफिक उपकरण जोड़ दिया जाता है, तो उसे स्पेक्ट्रोहेलियोग्राफ कहते हैं।’ 
‘और यह कोरोनाग्राफ क्या है?’
‘कोरोनाग्राफ एक विशेष प्रकार का टेलिस्कोप है। इससे खगोलशास्त्री सूरज के कोरोना की तस्वीर उतार सकते हैं और ऐसा करने के लिए उन्हें सूर्य ग्रहण का इंतजार नहीं करना पड़ता है।’ 
‘अच्छा।’ 
‘और रेडियो टेलिस्कोप से वैज्ञानिक सूरज से निकलने वाली रेडियो तरंगों का अध्ययन करते हैं।’
‘लेकिन पृथ्वी का वातावरण तो सूरज के अनेक रेडिएशंस को ज़मीन पर नहीं पहुंचने देता।’
‘हां। इसलिए वैज्ञानिक उपकरणों को वातावरण में बहुत ऊपर तक भेज देते हैं। इस प्रकार की स्पेस जांच उन्हें सूरज के बारे में अधिक जानकारी हासिल करने में मदद करती है।’
-इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर 

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