भारत के प्रति ट्रम्प का रवैया नकारात्मक क्यों ?
दादागीरी की अपनी हरकतों से दुनिया में हड़कंप मचाने वाले अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प आखिर रह-रहकर हमारे देश भारत और प्रधानमंत्री मोदी का बार-बार अपमान क्यों कर रहे हैं? कभी वह पत्रकारों से खुलासा करने के अंदाज़ में यह कहते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी ने मुझे खुश करने के लिए रूस से तेल लेना लगभग बंद कर दिया है और इस तंज़ को कूटनीतिक गलियारे में अभी भुलाया भी नहीं गया था कि ट्रम्प फिर प्रधानमंत्री मोदी का लगभग अपमान करने वाले अंदाज़ में खुलासा करते हैं कि बीते दिनों उन्होंने उन्हें फोन करके कहा, ‘सर प्लीज़ क्या मैं आपसे मिल सकता हूं?’ गौरतलब है कि अभी दो दिन पहले ही अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने भारत को लगभग चेतावनी देते हुए यह भी कहा था कि अगर वह रूस के साथ व्यापार जारी रखता है, तो उस पर जल्द टैरिफ और बढ़ाया जा सकता है। हैरानी की बात यह है कि ट्रम्प बार-बार अंतर्राष्ट्रीय मीडिया और कूटनीतिक गलियारे में ये व्यंग्यभरी टिप्पणियां करते हुए हर बार प्रधानमंत्री मोदी को अपना खास दोस्त बताना भी नहीं भूलते, जैसे वो जान-बूझकर व्यंग्य कर रहे हों।
सवाल है आखिरकार उनके इस सनक भरे व्यवहार का मतलब क्या है? दरअसल डोनाल्ड ट्रम्प अपने इस अंदाज़ के ज़रिये दुनिया को दिखाना चाहते हैं कि वह किस तरह भारत से बहुत ऊपर पोजीशन में है और सामने वाले को याचक या इच्छुक के रूप में पेश कर रहे हैं। राजनीति में लोग दुश्मनों के लिए भी इस तरह की भाषा बोलने से परहेज रखते हैं। फिर ट्रम्प तो प्रधानमंत्री मोदी को बार-बार अपना दोस्त बताते हैं, फिर आखिर अच्छा दोस्त बताकर इस तरह अपमान करने की कोशिश क्यों करते हैं? दरअसल ट्रम्प दिखाना चाहते हैं कि उनके पास ताकत है और मिलने की ज़रूरत उन्हें नहीं बल्कि सामने वाले को है। यह एक कूटनीतिक हमला और सूक्ष्म तरीके से देखा जाए तो हमारा अपमान है।
ऐसा नहीं है कि वह अपने इन शब्दों और घृणात्मक शब्दावली से सिर्फ हमें छोटा कर रहे हों, वे षड्यंत्रकारी तरीके से हमें निशाना बनाकर पूरी दुनिया को संदेश देना चाहते हैं कि अगर वो भारत जैसी दुनिया में सबसे तेज रफ्तार से आगे बढ़ रही अर्थव्यवस्था और कुशल मानव संसाधन के सबसे बड़े वैश्विक हब को कुछ नहीं समझते, तो दुनिया में बाकी देशों की क्या विसात है? इसके अलावा वह इस तरह की शब्दावली अपनी आंतरिक राजनीति के समीकरण को दुरुस्त करने के लिए भी इस्तेमाल कर रहे हैं। ट्रम्प जिस तरह से हर मौके का इस्तेमाल भारत को अपमानित करने के लिए कर रहे हैं, उसके ज़रिये वह हमसे ज्यादा दुनिया को टारगेट कर रहे हैं कि वह एक वैश्विक शक्ति हैं। हकीकत यह है कि वेनेजुएला प्रकरण के बाद जिस तरह से अमरीकी संसद दो खेमों में बंट गई है और ब्रिटेन को छोड़कर लगभग पूरे यूरोप ने ट्रम्प के खिलाफ बयानबाजी की है।
उन्होंने वेनेजुएला में जो कुछ चीन को दहशत में लाने और रूस की अनदेखी करने के लिए किया, उससे रूस और चीन तो ज्यादा घबराए नहीं उल्टे यूरोप उनका साथ छोड़ने की स्थिति में आ गया है। इससे भी बड़ी बात यह है कि जिस तरह से वेनेजुएला के बाद उनकी नज़र ग्रीनलैंड पर है और जैसा कि अपने अब तक के दूसरी बार के कार्यकाल में उन्होंने रह-रहकर अपनी हठधर्मिता दिखायी है, उस कारण नाटो का अस्तित्व भी खतरे में पड़ गया है। अपनी इन्हीं नाकामियों से खिसियाकर वह मौका मिलते ही भारत का अपमान करने का मौका नहीं गंवाते जबकि हकीकत यह है कि जब दुनिया के दो राजनेता मुलाकात करते हैं, तो यह मुलाकात कभी व्यक्तिगत इच्छा के या किसी एक के हित के चलते नहीं होती।
आज अगर भारत को अमरीका से टैरिफ न बढ़ाये जाने की चाहत है तो हमें नहीं भूलना चाहिए कि अमरीका को भी भारत से बहुत सारी चीज़ें चाहिएं। सबसे बड़ी बात तो यह है कि उसे भारत का विशाल बाज़ार चाहिए, जहां वह अपनी पूंजी लगा सके और उससे बेहतर रिटर्न हासिल कर सके। दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि जिस तरह से ट्रम्प जाने-अनजाने रूस और चीन को अपना खुलेआम दुश्मन बना रहे हैं, उसमें अगर भारत भी उनके साथ न हुआ तो अमरीका न केवल वैश्विक मोर्चे में अलग-थलग पड़ जायेगा, बल्कि ग्लोबल साउथ से उसकी सारी उम्मीदें धरी की धरी रह जाएंगी। भारत इस समय अमरीका के लिए एकमात्र ऐसा सहयोगी हो सकता है, जो अमरीका को रूस और चीन की साझी नाराजगी की भरपायी कर सके। क्योंकि भारत की अर्थव्यवस्था इस समय दुनिया में सबसे ज्यादा तेज रफ्तार से बढ़ रही है और भारत में कुशल मानव संसाधनों का जो जखीरा है, इस एआई युगा में वही है जो भविष्य की अर्थव्यवस्था को एक स्थिरता और निरंतरता की दिशा दे सकता है। लेकिन जिस तरह से ट्रम्प भारत का अपमान कर रहे हैं, उससे लगता है कि वह या तो कूटनीति के वैश्विक भविष्य में भारत की ताकत का अंदाज़ा नहीं लगा पा रहे या वह ज़रा भी दूरदर्शी सोच नहीं रखते।
-इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर



