पंजाब का राजनीतिक पारा चढ़ा
नव-वर्ष के आगमन के साथ ही राज्य का राजनीतिक पारा काफी चढ़ गया है। इसका बड़ा कारण यह है कि 2027 के आरम्भ में होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव में लगभग एक वर्ष का समय ही शेष रह गया है। इस संदर्भ में 2026 का यह वर्ष राज्य की सभी राजनीतिक पार्टियों के लिए विशेष महत्व रखता है। इस वर्ष में उनकी ओर से स्वाभाविक रूप में लोगों के साथ अपना सम्पर्क बढ़ाने के अधिक से अधिक यत्न किए जाएंगे।
कुछ दिन पहले जालन्धर से ही सत्तारूढ़ पार्टी आम आदमी पार्टी ने ‘युद्ध नशे विरुद्ध’ नाम पर नशे के खिलाफ पहले ही चलाये जा रहे अभियान के दूसरे चरण की घोषणा की है। इस संबंध में सत्तारूढ़ पार्टी के वरिष्ठ नेताओं श्री अरविंद केजरीवाल तथा राज्य के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने घोषणा की है कि अभियान के दूसरे चरण में गांव स्तर पर नशे के खिलाफ प्रचार करने तथा नशा बेचने वाले तत्वों पर नज़र रखने के लिए समितियां बनाई जाएंगी और लोगों को उत्साहित किया जाएगा कि वे सरकार को अपने क्षेत्र में नशा बेचने वाले लोगों के बारे में जानकारी दें और पुलिस द्वारा ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और सूचना देने वालों के नाम गुप्त रखे जाएंगे। आम आदमी पार्टी की सरकार ने मंत्रिमंडल में एक छोटा-सा बदलाव करके संजीव अरोड़ा को स्थानीय निकाय मंत्रालय भी दे दिया है। पहले यह मंत्रालय डा. रवजोत सिंह के पास था। उन्हें अब प्रवासियों संबंधी मंत्रालय दे दिया गया है। श्री संजीव अरोड़ा के पास पहले ही बिजली, उद्योग, व्यापार और पूंजी निवेश जैसे मंत्रालय हैं। वह अब और भी शक्तिशाली हो गए हैं। कहा जाता है कि उन्हें स्थानीय निकाय मंत्रालय पार्टी की शहरों में पकड़ और बढ़ाने के उद्देश्य से दिया गया है। इस वर्ष में ही नगर निगमों और नगर पालिकाओं के चुनाव होने की भी सम्भावना है। दूसरी तरफ कांग्रेस पार्टी ने केन्द्र सरकार द्वारा मगनरेगा कानून के स्थान पर वी.बी. जी राम जी के नाम तहत नई रोज़गार योजना बनाने का विरोध करने के लिए राज्य में 10 रैलियां करने की घोषणा की है। इन रैलियों की शुरुआत गुरदासपुर और टांडा से कर भी दी गई है। कांग्रेस के नेता इन रैलियों में जहां मगनरेगा योजना से महात्मा गांधी का नाम हटाने को मुद्दा बना रहे हैं, वहीं केन्द्र सरकार द्वारा नई योजना द्वारा पहले ही ऋणी राज्यों पर और वित्तीय बोझ बढ़ाने के आरोप भी लगा रहे हैं, क्योंकि पहली योजना में 90 प्रतिशत फंड केन्द्र सरकार द्वारा उपलब्ध करवाये जाते थे जबकि नई योजना के अनुसार केन्द्र सिर्फ 60 प्रतिशत ही हिस्सा डालेगा, शेष 40 प्रतिशत खर्च राज्यों को करना होगा। कांग्रेस की दलील है कि पहले ही ऋणी राज्य इस योजना के लिए 40 प्रतिशत राशि जुटाने में विफल रहेंगे। जिसका परिणाम यह होगा कि ग्रामीण क्षेत्रों में गरीब लोगों को 125 दिन तो क्या 100 दिन का भी रोज़गार नहीं मिल सकेगा।
राज्य में अपना जन सम्पर्क और आधार बढ़ाने के लिए भाजपा भी सक्रिय हो गई है। कांग्रेस जहां वी.बी. जी राम जी योजना के विरुद्ध रैलियां कर रही है वहीं भाजपा ने नई योजना के पक्ष में लामबंदी करने के लिए बैठकों और प्रैस कांफ्रैंसों का सिलसिला आरम्भ कर दिया है। यह भी सम्भावना है कि आगामी दिनों में भाजपा यह और अन्य मुद्दों को लेकर कोई बड़ी कान्फ्रैंस भी करे। मुक्तसर में माघी के अवसर पर भी भाजपा ने पहली बार प्रभावशाली कांफ्रैंस करने के लिए तैयारियां आरम्भ कर दी हैं। शिरोमणि अकाली दल बादल ने भी माघी पर मुक्तसर में बड़ी रैली करने के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं, उनका उद्देश्य भी विधानसभा के आने वाले चुनावों के लिए पार्टी को अभी से तैयार करने का है। कई अन्य राजनीतिक पार्टियों द्वारा भी माघी के अवसर पर रैलियां करने की योजना बनाई जा रही है। नए बने अकाली दल (पुनर सुरजीत) की गतिविधियां विगत वर्ष में चाहे कम रही हैं, परन्तु इस वर्ष के आरम्भ में ही उसने अपने संगठन को और अधिक मज़बूत बनाने के लिए कुछ अहम नियुक्तियां की हैं। पार्टी के सूत्रों का कहना है कि आगामी समय में लोगों के साथ अपना सम्पर्क बढ़ाने और पंजाब और पंथ के मुद्दे उठाने के लिए उनकी पार्टी द्वारा विशेष रूप से रणनीति बनाई जाएगी। अकाली दल (वारिस पंजाब दे) द्वारा भी अलग-अलग स्तर पर नई नियुक्तियां करके अपने संगठनात्मक ढांचे को मज़बूत किया जा रहा है।
उपरोक्त राजनीतिक पार्टियों द्वारा आरम्भ की गईं राजनीतिक गतिविधियों के दृष्टिगत सहज ही यह अनुमान लगाया जा सकता है कि यह वर्ष राजनीतिक रूप से बेहद हलचल भरपूर रहेगा। यह देखना दिलचस्प होगा कि राजनीतिक पार्टियां लोगों को लामबंद करने के लिए इस वर्ष कौन-कौन से मुद्दे उठाती हैं और अपने विचार लोगों तक पहुंचाने के लिए किस प्रकार की रणनीति बनाती हैं। अभी तो सिर्फ इतना ही कहा जा सकता है कि यह वर्ष बेहद दिलचस्प सिद्ध होगा और राज्य के लोगों को राजनीतिक मंच पर बहुत कुछ देखने और सुनने को मिलेगा।

