कभी दुनिया के अमीर देशों में शामिल था वेनेजुएला
पिछले दिनों अमरीका ने वेनेजुएला पर हमला करके राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार कर लिया। वेनेजुएला कभी दुनिया के सबसे अमीर देशों में शामिल था, जो आज कंगाल हो चुका है। यह कहानी एक ऐसे देश की है जिसके पास सऊदी अरब से भी ज्यादा तेल है, लेकिन पिछले एक दशक में उसने अपनी 80 प्रतिशत जीडीपी गंवा दी। कभी अमीर रहे इस देश ने अपनी सम्पत्ति और प्राकृतिक स्रोतों का ऐसा कुप्रबंधन किया कि आज वह कंगाल हो गया है और वहां के लोग देश छोड़ रहे हैं। गत 3 जनवरी को अमरीका ने हमला कर राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार कर लिया। हज़ारों किलोमीटर दूर दक्षिण अमरीका में हो रही इस हलचल का असर भारत में आम आदमी पर भी पड़ सकता है।
बताया जाता है कि कमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने देश के नवीकरणीय तेल भंडार और प्रचुर दुर्लभ पृथ्वी पर नज़र रखकर वेनेजुएला की समृद्ध संपत्ति को नियंत्रित करने के अपने इरादों को कभी नहीं छिपाया है, लेकिन जिस तीव्र गति से अमरीकी सेना ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो को उनके राष्ट्रपति भवन से उठाया और उन्हें अमरीका लाया गया, वह चौंकाने वाली घटना है। मादुरो को अमरीका लाने के लिए ट्रम्प के आरोपों में मादक पदार्थों की तस्करी और आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होना बताया गया हैं। मादुरो एक तानाशाह थे, यह बता कर उन्हें हटा दिया गया और वेनेजुएला के नागरिकों को मुक्त कर दिया गया।
उल्लेखनीय है कि वेनेजुएला में तेल और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के समृद्ध भंडार हैं। पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (ओपेक) के संस्थापक सदस्य वेनेजुएला के पास दुनिया के तेल भंडार का लगभग 20 प्रतिशत होने का अनुमान है, जो सऊदी अरब या इराक से कहीं अधिक है, लेकिन वैश्विक तेल उत्पादन का 1 प्रतिशत से भी कम है। पिछले कई वर्षों से पर्याप्त तेल उत्पादन नहीं हुआ है। तेल उत्पादन व्यवसाय के राष्ट्रीयकरण के कारण, एक्सॉन मोबिल जैसी बड़ी अमरीकी कंपनियों ने कुछ साल पहले वेनेजुएला से अंतराल को बंद कर दिया था। इसके बाद से अमरीका उस देश से नाराज़ है। गौरतलब है कि इराक में सद्दाम हुसैन के शासन को उखाड़ फेंकने के पीछे अमरीकी तेल कंपनियों का राष्ट्रीयकरण ही कारण था। इराक की तरह वेनेजुएला के तेल भंडार को ज़ब्त करना अमरीका के लिए एक दीर्घकालिक निवेश है। यदि पांच से सात साल तक स्थिरता रहती है, तो ट्रम्प की पसंद की कंपनियां वहां एक आधार स्थापित करने और तेल उत्पादन बढ़ाने में सक्षम होंगी।
वेनेजुएला तेल के अतिरिक्त अन्य प्राकृतिक संसाधनों में भी समृद्ध है, जिसमें दुनिया का छठा सबसे बड़ा प्राकृतिक गैस भंडार शामिल है। सोना, लोहा, बॉक्साइट एवं हीरे और थोरियम, कोल्टन तथा कुछ दुर्लभ तत्व और यौगिक जो आधुनिक युग में महत्वपूर्ण बन गए हैं। चुंबकीय गुणों वाले रासायनिक यौगिक इस देश में बड़ी मात्रा में पाए गए हैं। जैव विविधता और जल संसाधनों की प्रचुरता है। यदि दिवंगत पूर्व राष्ट्रपति ह्यूगो चावेज़ और अब उनके शिष्य मादुरो ने वहां पुरानी समाजवादी आर्थिक नीतियों के के तहत व्यक्तिवाद की भ्रष्ट व्यवस्था लागू नहीं की होती, तो वेनेजुएला को अमरीका या कुछ यूरोपीय देशों के समान समृद्धि प्राप्त होती। यही कारण है कि ट्रम्प वेनेजुएला को नियंत्रित करना चाहते हैं, लेकिन वह ऐसा करने वाले पहले अमरीकी राष्ट्रपति नहीं हैं।
वेनेजुएला हमेशा से अमरीका पर निर्भर देश रहा है, इसलिए अमरीका इस देश और आसपास के दक्षिण अमरीका को ‘पश्चिम एशिया’ में बदलने की कोशिश कर रहा है। इस नीति परिवर्तन की जड़ में ट्रम्प का एक और धोखा है—मोनरो सिद्धांत या मोनरो घोषणा। यह वर्तमान में डोनाल्ड ट्रम्प के नाम के अनुरूप है। इसे ‘डोनरो सिद्धांत’ कहा जाता है। उद्देश्य एक ही है। वेनेजुएला के खिलाफ मौजूदा कार्रवाई के पीछे यह दूसरा कारण है। 1823 में तत्कालीन अमरीकी राष्ट्रपति जेम्स मुनरो ने पश्चिमी गोलार्ध से यूरोपीय औपनिवेशिक शक्तियों के बाहर निकलने का सुझाव दिया था। बदले में अमरीका ने गारंटी दी कि वह पूर्वी गोलार्ध में यूरोपीय हितों में हस्तक्षेप नहीं करेगा। पश्चिमी गोलार्ध मुख्य रूप से उत्तर और दक्षिण अमरीका और कैरेबियाई द्वीप समूह को संदर्भित करता है।
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