ज़रूरी है जल स्रोतों की संभाल

हमारी केन्द्रीय और राज्य सरकारें समय-समय पर देश के विकास के बारे में अकसर बड़े-बड़े दावे करती रहती हैं। यह भी कहा जाता है कि भारत दुनिया का तेज़ी से विकास करने वाला देश है और यह अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चौथी आर्थिकता बन चुका है, और यह भी दावा किया जाता है कि जल्दी ही यह तीसरी आर्थिकता बन जाएगा। परन्तु दूसरी तरफ यदि प्रति व्यक्ति आय के पक्ष से देखें तो देश विकसित देशों से बेहद पिछड़ा हुआ है। भाव लोगों की हालत बेहद दयनीय है। 80 करोड़ से अधिक लोगों को केन्द्र सरकार द्वारा मुफ्त अनाज दिया जा रहा है। देश में बड़े स्तर पर बेरोज़गारी भी पाई जा रही है। इसी कारण बहुत-से नौजवान हर जायज़-नाजायज़ ढंग से रोज़ी-रोटी की तलाश में विदेश जाने के लिए मजबूर होते हैं। परन्तु आज इन कालमों में हम देश की और देश के लोगों की आर्थिकता की अधिक बात नहीं कर रहे बल्कि एक अन्य अहम मामले पर चर्चा कर रहे हैं, जो लोगों के लिए विशेष महत्व रखता है। यह है लोगों के जीने योग्य हालात का। मानव के जीने के लिए साफ पानी, साफ हवा और शुद्ध खुराक बुनियादी ज़रूरत है परन्तु हमारे देश में ये तीनों सुविधाएं विकास के दावे के साथ-साथ तेज़ी से लोगों की पहुंच से बाहर होती जा रही हैं।
देश की नदियों में शहरी और ग्रामीण जनसंख्या का गंदा पानी निरंतर जा रहा है। जैसे-जैसे देश में उद्योगीकरण का प्रसार बढ़ रहा है, उद्योगों का गंदा और तेज़ाबी पानी भी नदियों-नालों में बिना साफ किए निरंतर डाला जा रहा है। नि:संदेह राष्ट्रीय स्तर पर और अलग-अलग प्रदेशों के स्तर पर पानी के प्रदूषण को रोकने के लिए अनेक कानून हैं। हमारे हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट और यहां तक कि नैशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल शिकायतें मिलने पर इस समस्या पर सुनवाई करके सरकारों को निर्देश भी देते रहते हैं परन्तु दरियाओं और नदियों-नालों में जा रहे गंदे पानी की समस्या निरंतर बनी हुई है। गंगा और यमुना को साफ करने के लिए भी अनेक प्रोजैक्ट बनते हैं। बड़े स्तर पर पैसे भी खर्च किए जाते हैं परन्तु स्थिति इस पक्ष से पहले जैसी ही बनी रहती है क्योंकि नदियों-नालों में जा रहे गंदे पानी को रोकने के लिए न तो सरकारों में दृढ़ इच्छा शक्ति नज़र आती है और न ही जागरूक और लामबंद होकर लोग सरकारों की जवाबदेही करने में सफल होते हैं।
यदि अपने प्रांत पंजाब की बात करें तो यहां भी नदियों के प्रदूषित होने का मामला बेहद गम्भीर रूप धारण कर चुका है। हमारी सतलुज तथा ब्यास दोनों नदियों में शहरी तथा ग्रामीण आबादी का दूषित पानी तथा उद्योगों का बिना साफ किया पानी निरन्तर पड़ रहा हैं। अनेक बार इन कारणों से मछलियों के मरने के भी समाचार भी आते हैं। पंजाब से सटे हिमाचल के क्षेत्रों में अधिक उद्योग स्थापित होने के कारण अब पंजाब में आती नदियां पानी के पक्ष से हिमाचल में ही प्रदूषित हो जाती हैं। आगे नदियों के पंजाब में दाखिल होने के बाद भी उनके पानी के प्रदूषण का स्तर निरन्तर बढ़ता रहता है। लुधियाना के बुड्ढा नाला को साफ करने की मांग को लेकर अलग-अलग सामाजिक संगठन तथा पर्यावरण प्रेमी अनेक बार आन्दोलन कर चुके हैं। पंजाब की सरकारों द्वारा समय-समय पर कुछ कदम भी उठाए जाते रहे हैं। आजकल पर्यावरण प्रेमी संत बलवीर सिंह सीचेवाल इस उद्देश्य के लिए दृढ़ता से काम करते दिखाई दे रहे हैं। राज्यसभा सांसद होने के कारण वह सरकारी संस्थानों से भी सहयोग प्राप्त करने के लिए प्रभावी ढंग से यत्न कर रहे हैं।   इस कारण कुछ उम्मीद तो बंधी है, परन्तु समूचे रूप में सरकारों में इस उद्देश्य के लिए इच्छा-शक्ति की निरन्तर कमी पाई जाती है। नदियों के पानी को प्रदूषित होने से रोकने के लिए पंजाब का पहला कानून बहुत कड़ा था, जिसके आधार पर किसी भी रूप में पानी को दूषित करने वाले उद्योगपति को 5 से 6 वर्ष की कैद हो सकती थी, परन्तु पंजाब सरकार ने 2025 में इस कानून को नर्म कर दिया। अब पानी दूषित करने वाले उद्योगपति को सिर्फ 10,000 से लेकर 5,00,000 रुपये तक जुर्माना ही किया जा सकता है। इसका अभिप्राय यह है कि पंजाब सरकार ने पानी को दूषित करने की प्रक्रिया को गम्भीर अपराध की श्रेणी में से बाहर निकाल दिया है। इससे ही पता चलता है कि सरकारें इस मामले को कितनी गम्भीरता से लेती हैं। पंजाब सरकार को पानी के प्रदूषण के संबंध में कानून को पुन: कड़ा करने की ज़रूरत है। यदि सरकारों का पानी के प्रदूषण के संबंध में इसी तरह ढीला-ढाला रवैया जारी रहा हो इस समस्या को नियंत्रित करना कठिन हो जाएगा, जिससे इस देश में रहने वाले मनुष्य स्वस्थ नहीं रह सकेंगे। यदि लोग स्वस्थ नहीं रहेंगे तो देश के विकास के दावे भी धरे-धराये ही रह जाएंगे। देश के आर्थिक विकास से पहले बेहद ज़रूरी है कि लोगों को पीने के लिए शुद्ध पानी मिले, सांस लेने के लिए शुद्ध हवा मिले और खाने के लिए शुद्ध भोजन मिले। उम्मीद है कि सरकारें इस संबंध में अपने ज़रूरी फज़र् निभाने के लिए आगे आएंगी।

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