हर चुनाव से पहले राज्यों में ईडी के छापे

पश्चिम बंगाल में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के छापे को लेकर खूब राजनीति हो रही है। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी दूसरे विपक्षी नेताओं या मुख्यमंत्रियों से अलग हैं। वह जो होता है, उसे होते रहने देने वाली नेता नहीं हैं। इसलिए उन्होंने प्रतिकार किया और सड़क पर उतर कर भी आंदोलन किया। उनकी पुलिस ने उनका साथ दिया और ईडी अधिकारियों के खिलाफ ही कई मुकद्दमे दर्ज हो गए। हालांकि ऐसा पहली बार नहीं हुआ कि किसी राज्य में चुनाव होने वाला हो और ईडी ने वहां छापे मारे। यह पिछले कई सालों से एक परम्परा बन गई है। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में छापा पांच साल पुराने कोयला तस्करी के मामले में मारा गया है। उसकी एफआईआर 2020 में दर्ज की गई थी और छापा मारा गया 2026 के चुनाव से पहले। इसी तरह झारखंड और दिल्ली में भी ईडी ने पुराने मामलों में कार्रवाई के लिए चुनाव के बिल्कुल पहले का वक्त चुना और वहां के मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को गिरफ्तार किया। महाराष्ट्र में भी ऐसा ही हुआ था। अंतर यह है कि बाकी राज्यों में नेता ममता बनर्जी जितने लड़ाकू नहीं हैं। इसलिए बंगाल का मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में है और ममता ने इसे अपने पक्ष में इस्तेमाल कर लिया है।
भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को  झटका 
पीएसएलवी रॉकेट की 62वीं उड़ान की नाकामी से भारत की उपग्रह संबंधी महत्वाकांक्षा को गहरा झटका लगा है। यह झटका इसलिए अधिक गंभीर है, क्योंकि पिछले साल मई में पीएसएलवी की 61वीं उड़ान भी नाकाम रही थी। पीएसएलवी-सी62 ने एक साथ 16 उपग्रहों को लेकर 12 जनवरी को उड़ान भरी, लेकिन उड़ान के तीसरे चरण में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का इससे सम्पर्क टूट गया। वे उपग्रह कहां गए, यह भी पता नहीं चल सका। पीएसएलवी-सी61-ईओएस-09 के साथ भी यही हुआ था यानी इसरो के वैज्ञानिक सात महीनों के दौरान उस खामी से निजात नहीं पा सके, जिस कारण मई में उनका मिशन नाकाम हुआ था। उस नाकामी की जांच के लिए समिति बनी थी, जिसकी रिपोर्ट प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजी गई, जहां उसे गोपनीय श्रेणी में रखा गया है यानी जिन करदाताओं के पैसे से इसरो चलता है, उन्हें इस सूचना से वंचित रखा गया है कि उनका पैसा क्यों बर्बाद हुआ। अब फिर वैसा ही हादसा व्यापक स्तर पर हुआ है। इस पर जो अविश्वास बना है, वह अलग है। इस विकट स्थिति से निकलने का उचित तरीका यही होगा कि भारत सरकार और इसरो पूरी पारदर्शिता बरतें। नाकामियों के लिए जवाबदेही तय करना भी ज़रूरी है। आखिर बिना पुरानी खामी को दूर किए अगले लॉन्च को कैसे हरी झंडी दी गई, यह देश को मालूम होना चाहिए। पीएसएलवी-सी62 डीआरडीओ का अन्वेष उपग्रह भी ले जा रहा था। यानी इस नाकामी का असर भारत की रक्षा तैयारियों पर भी पड़ेगा। 
पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगेगा?
पश्चिम बंगाल में कमाल हो रहा है। तृणमूल कांग्रेस के साथ-साथ भाजपा भी चुनाव आयोग से नाराज़ है। भाजपा के नेता भी ताल ठोक रहे हैं कि चुनाव नहीं होने देंगे। माना जा रहा है कि यह कोई ‘डिज़ाइन’ है, जिसका मकसद ऐसे हालात पैदा करना है, जिसमे चुनाव टल जाए। अगर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की गड़बड़ियों के बहाने अगर चुनाव टल जाता है तो राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाना पड़ेगा और भाजपा के कई नेता मानते हैं कि बिना राष्ट्रपति शासन लगाए बंगाल में ममता बनर्जी को हराना मुश्किल होगा। बहरहाल, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष शामिक भट्टाचार्य ने कहा है कि उनकी पार्टी के लोग फॉर्म-7 जमा कर रहे हैं लेकिन आयोग सबके नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं कर रहा है। भट्टाचार्य का कहना है कि अगर फॉम-7 के आधार पर मतदाता सूची में सुधार नहीं होता है तो भाजपा चुनाव नहीं होने देगी। दूसरी ओर ममता बनर्जी चार पत्र चुनाव आयोग को लिख चुकी हैं और कहा है कि मनमाने आधार पर लोगों के नाम काटे जा रहे हैं। हालांकि मोटे तौर पर पश्चिम बंगाल में एसआईआर का पहला चरण कामयाब रहा है। कुल 58 लाख लोगों के नाम कटे हैं। किसी की ओर से कोई शिकायत नहीं आई। फिर भी दोनों मुख्य पार्टियां चुनाव आयोग से नाराज़ हैं।
राज ठाकरे ने मुम्बई को अडानीस्तान कहा
मुम्बई में बीएमसी चुनाव से पहले उद्धव और राज ठाकरे की साझा रैली हुई थी और उस रैली में राज ठाकरे ने तमिलनाडु या बिहार, उत्तर प्रदेश के लोगों को लेकर जो कहा उसकी बड़ी चर्चा हुई कि राज ठाकरे ने ‘बजाओ पुंगी, हटाओ लुंगी’ का नारा दोहराया, उन्होंने हिंदी भाषी लोगों को पीटने की बात कही। लेकिन राज ठाकरे ने देश के दूसरे सबसे बड़े कारोबारी गौतम अडानी बारे जो कहा, वह मीडिया में नहीं आया। यह बहुत बड़ी बात है कि राज ठाकरे ने अडानी का नाम लेकर कहा कि मुंबई को अडानीस्तान बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मुम्बई और नवी मुम्बई हवाई अड्डे पर अडानी का कब्ज़ा हो गया। उन्होंने कहा कि धारावी विकास परियोजना और मुम्बई हवाई अड्डे की सारी ज़मीन अडानी को देने की तैयारी हो रही है। राज ठाकरे ने एक नक्शे के जरिए दिखाया कि 2014 के बाद से अडानी को कौन-कौन सी परियोजनाएं मिली हैं। 
दूषित यमुना में क्रूज़ चलाने की तैयारी
एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले एक साल से दिल्ली में यमुना और ज्यादा दूषित हो गई है। उसमें पहले से ज्यादा झाग बनने लगी है और नालों से आने वाली गंदगी के कारण पानी पहले से ज्यादा दूषित हो गया है। अब दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता कह रही हैं कि उन्हें तो एक ही साल मिला है जबकि ‘आप’ सरकार 11 साल सत्ता में रही थी। वह भी अब यमुना की सफाई के लिए 11 साल का समय मांग रही हैं। हैरानी की बात यह है कि उनके पर्यटन मंत्री उसी यमुना में क्रूज़ चलाने की तैयारी में जुटे हैं। यह सबको पता है कि यमुना की सफाई सिर्फ  एक दिखावा है। आखिर साढे ग्यारह साल के नरेंद्र मोदी के शासन में हजारों करोड़ खर्च करके भी गंगा साफ नहीं हुई है। इसलिए 11 साल भी मिल जाएं तब भी यमुना साफ नहीं होगी। यमुना की सफाई संबंधी एक धारणा बनाने के लिए पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा मुम्बई पहुंचे और वहां क्रूज़ कंपनी के साथ मीटिंग की है। यमुना रिवरफ्रंट परियोजना के तहत लग्ज़री क्रूज़ चलाने की योजना बनी है, लेकिन अभी एक प्रतिशत भी सफाई नहीं हुई है और न रिवरफ्रंट का काम शुरू हुआ, परन्तु पर्यटन मंत्री एक क्रूज़ के सामने फोटो खिंचवा आए हैं।

#हर चुनाव से पहले राज्यों में ईडी के छापे