ज़मीन में जीवन व्यतीत करने वाला नीला केकड़ा

विश्व के सागरों और महासागरों में अनेक प्रकार के केकड़े पाए जाते हैं। कुछ केकड़े ताजे पानी की नदियों में भी मिलते हैं। कुछ केकड़े ऐसे भी पाए जाते हैं, जिन्होंने पानी का जीवन छोड़ दिया है और पानी से काफी दूर जाकर बस गए हैं। इस प्रकार केकड़े केवल अंडे देने के लिए ही पानी में आते हैं तथा शेष समय जमीन पर व्यतीत करते हैं। इनमें से कुछ केकड़े तो ऐसे होते हैं, जो वृक्षों पर बड़ी सरलता से चढ़ जाते हैं। केकड़ों की शारीरिक संरचना अर्थात शरीर का आकार, टांगों की लंबाई, शरीर के रंग तथा इनकी भोजन और प्रजनन संबंधी आदतों और व्यवहारों में भी पर्याप्त विविधता होती है।
इसी प्रकार के रंगों और डिजाइनों की विविधता वाला एक केकड़ा है नीला केकड़ा। नीला केकड़ा चमकदार, रंग-बिरंगा केकड़ा है। अंग्रेजी में इसे ब्लू क्रैब कहते हैं। इसका वैज्ञानिक नाम कैलीनेक्टस सैपीडस है। नीले केकड़े की अनेक जातियां हैं, जिन्हें उत्तर अमरीका और दक्षिण अमरीका के अटलांटिक महासागर के तटीय भागों में देखा जा सकता है। इसकी कुछ जातियां कैरेबियन सागर में भी पायी जाती हैं। नीले केकड़े की एक प्रमुख विशेषता यह है कि यह जहां कहीं भी पाया जाता है, बहुत बड़ी संख्या में पाया जाता है।
नीले केकड़े की विभिन्न जातियों की शारीरिक संरचना तथा भोजन, प्रजनन आदि से संबंधित आदतों और व्यवहारों आदि में बहुत अंतर होता है। इन सभी में बस एक समानता पाई जाती है। इन सभी केकड़ों के शरीर का अधिकांश भाग नीला होता है। अटलांटिक महासागर के तटीय भागों के रेतीले तल पर पाए जाने वाले कैलीनेक्टस सैपिडस नामक नीले केकड़े की शारीरिक संरचना खाद्य केकड़े से बहुत मिलती-जुलती है। इसके शरीर की चौड़ाई इसकी लंबाई से अधिक होती है। इसके सभी पैर भी लगभग इसके शरीर के बराबर लंबे होते हैं। नीले केकड़े के बीच वाले पैरों के तीन जोड़े पैर पतले होते हैं एवं इनके सिरे नुकीले होते हैं तथा चलने वाले पैरों का अंतिम जोड़ा कुछ छोटा एवं अन्य चलने वाले पैरों की तुलना में मोटा होता है। इसके आगे वाले पैर सबसे लंबे-मोटे और भारी होते हैं तथा इनके चिमटे छोटे किंतु नुकीले, मजबूत और शक्तिशाली होते हैं। नीले केकड़े के शरीर का रंग गहरा नीला होता है तथा पैरों का रंग हल्का नीला होता है। इसीलिए इसे नीला केकड़ा कहते हैं। 
नीला केकड़ा एक मध्यम आकार का भारी शरीर वाला केकड़ा है। इसकी एक सिरे से दूसरे सिरे तक की लंबाई 8 सेंटीमीटर से 23 सेंटीमीटर तक होती है। किन्तु कभी-कभी इससे बड़े आकार के केकड़े भी देखने को मिल जाते हैं। ये सागर के मृत जीवों का सड़ा-गला मांस खाते हैं। नीले केकड़े का प्रमुख भोजन छोटे-छोटे समुद्री कृमि हैं। यह सागर के तल पर छोटे-छोटे कृमियों की खोज करता है और जैसे ही इसे कोई शिकार दिखाई देता है, यह उसे झपट कर अपने चिमटों से पकड़ लेता है और खा जाता है। यह तैर कर शिकार नहीं करता बल्कि सागर तल पर चल कर शिकार करता है। जबकि यह बहुत अच्छा तैराक है। यह आवश्यकता पड़ने पर अपनी तरह के अन्य केकड़ों के समान अपने पीछे के पैरों की सहायता से बड़ी तेज गति से तैरता है।
समागम के समय नर और मादा दोनों एकत्रित हो जाते हैं। मादा अंडे देती है और नर उन पर शुक्राणु छिड़ककर उन्हें निषेचित करता है। कुछ समय बाद निषेचित अंडे फूटते हैं और इनसे छोटे-छोटे लारवे निकल आते हैं। इसके लारवे वयस्क केकड़ों से पूरी तरह भिन्न होते हैं। ये अनेक बार कायान्तरण करते हैं और फिर कई अवस्थाएं पार करने के बाद वयस्क नीले केकड़े के लघु रूप में आ जाते हैं। नीले केकड़े और इसके बच्चे के अनेक शत्रु हैं। सागर के भीतर अनेक समुद्री जीव इसे अपना आहार बनाते हैं और उथले पानी अथवा रेत पर बहुत से पक्षी इसका शिकार करते हैं। नीला केकड़ा बड़ा स्वादिष्ट होता है। अत: मानव द्वारा यह प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में पकड़ा जाता है।
मिसिसिपी नदी के मुहाने के आसपास, सागर तट के किनारे के बहुत बड़े क्षेत्र में सैकड़ों वर्षों से नीले केकड़े की खेती की जा रही है। यहां प्रति वर्ष हजारों टन नीले केकड़े व्यावसायिक स्तर पर और घरेलू उपयोग के लिए पकड़े जाते हैं। इसे आसपास के क्षेत्रों में एक स्वादिष्ट समुद्री भोजन माना जाता है।
-इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर 

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