चम्पारण में है दुनिया का सबसे ऊंचा शिवलिंग
भारत के पहले राष्ट्रपति डा. राजेंद्र प्रसाद का एक चर्चित लेख है ‘चम्पारण में बापू के साथ’, जिसे मैंने अपने बचपन में पढ़ा था और तभी से चम्पारण का नाम आते ही महात्मा गांधी की भी याद आ जाती है। बिहार में नेपाल की सीमा से सटा चम्पारण ज़िला अब तो दो ज़िलों में विभाजित कर दिया गया है, लेकिन इसका ऐतिहासिक महत्व बरकरार है क्योंकि गांधी जी ने अपने सत्याग्रह का पहला सफल प्रयोग यहीं किया था, 1917 में। ब्रिटिश शासक व उनके चाटुकार चम्पारण में किसानों का आर्थिक शोषण करते हुए बहुत ही मामूली पैसों पर उनसे जबरन नील की खेती कराया करते थे। गांधी जी ने इसी शोषण के खिलाफ आवाज़ उठायी, अंग्रेज़ सरकार को अपने नियम बदलने के लिए मजबूर होना पड़ा और किसानों को उनका हक मिला।
अब चम्पारण में आकर्षण का एक अन्य केंद्र भी शामिल हो गया है, जिससे पर्यटकों, विशेषकर धार्मिक पर्यटकों की संख्या में निरंतर इज़ाफा होता जा रहा है। चम्पारण में विश्व के सबसे ऊंचे एक चट्टानी शिवलिंग की स्थापना की गई है। इस विशाल काले ग्रेनाइट के शिवलिंग की स्थापना 17 जनवरी, 2026 को पूर्वी चम्पारण ज़िले के केसरिया-चकिया हाईवे पर स्थित कैथवालिया गांव में की गई। इसके दर्शन करने के लिए बड़ी संख्या में लोग आ रहे हैं। शिवलिंग ऊंचाई व परिधि में 33 फीट है और इसका वज़न 210 टन है। भक्तों व पर्यटकों की संख्या में अतिरिक्त वृद्धि का अनुमान है क्योंकि शिवलिंग विराट रामायण मंदिर काम्प्लेक्स का हिस्सा है, जिसे अभी बनाया जा रहा है। मंदिर का निर्माण कराने वाली महावीर मंदिर ट्रस्ट के एक अधिकारी का कहना है कि यह मंदिर संसार का सबसे ऊंचा मंदिर होगा।
महावीर मंदिर ट्रस्ट का दावा है कि प्रस्तावित विराट रामायण मंदिर 2030 तक मुकम्मल हो जायेगा और यह विश्व का सबसे ऊंचा हिन्दू मंदिर होगा। योजना यह है कि मंदिर की लम्बाई 1,080 फीट और चौड़ाई 540 फीट होगी। इसमें 12 शिखर होंगे, जिनमें से सबसे ऊंचा शिखर 270 फीट का होगा। महावीर मंदिर ट्रस्ट के सचिव सायन कुणाल ने बताया, ‘पूर्ण होने पर यह मंदिर दुनिया का सबसे ऊंचा मंदिर होगा।’ गौरतलब है कि अन्य मंदिर भी संसार के सबसे ऊंचे हिन्दू मंदिर होने का दावा करते हैं, जिससे यह बहस हमेशा जारी रहती है।
बहरहाल, शिवलिंग को काले ग्रेनाइट की एक चट्टान से तराशा गया है, जिसका चयन 2014 में तमिलनाडु के महाबलिपुरम में किया गया था। मूल ग्रेनाइट, जिसमें से यह शिवलिंग तराशा गया है, का वज़न 354 टन था। ऐसा विनायक वेंकटरमण का कहना है, जिनकी कंपनी ने इस शिवलिंग को तैयार किया है। उनका कहना है, ‘हमने चट्टान को तमिलनाडु के तिरुनेलवेली से मंगाया क्योंकि यह सबसे अच्छे ग्रेनाइट की एकल चट्टान थी। इसे तराशने में लगभग तीन वर्ष का समय लगा और 25 से 30 कारीगर रोज़ाना 9 से 10 घंटे की शिफ्ट्स में काम करते थे।’
इस साल जनवरी के पहले सप्ताह में शिवलिंग को पट्टिकाडु से चम्पारण लाया गया, विशेषरूप से डिज़ाइन किये गये ट्रक पर। 2,565 की यात्रा को पूरा करने में 45 दिन का समय लगा। मंदिर का निर्माण राम-जानकी पथ पर कराया जा रहा है। मंदिर निर्माण समिति के एक सदस्य मयंकेश्वर सिंह के अनुसार मान्यता यह है कि जनकपुर में माता सीता से विवाह करने के बाद भगवान राम की बारात जब अयोध्या लौट रही थी, तो वह एक रात के लिए उसी स्थान पर ठहरी थी, जहां आज मंदिर का निर्माण कराया जा रहा है। इस मंदिर से चम्पारण को निश्चितरूप से आर्थिक लाभ होगा, जिसके संकेत अभी से मिलने लगे हैं। मंदिर की ओर जाने वाले मार्ग पर फूल, मिठाई व पूजा सामग्री बेचने के लिए अस्थायी दुकानें लग गई हैं। रीति-रिवाज का मार्गदर्शन करने वाले पुजारियों की आय में ज़बरदस्त वृद्धि हुई है। चुन्नू दूबे के अनुसार, ‘अब मैं रोज़ाना 2,000 से 2,500 रूपये कमा लेता हूं, जबकि इससे पहले अपने गांव के मंदिर में मैं बड़ी मुश्किल से महीने में 5,000 रूपये ही कमा पाता था।’
मंदिर पर्यटन की गति केवल चम्पारण तक सीमित नहीं है। पास के सीतामढ़ी ज़िले, जिसे माता सीता का जन्मस्थल माना जाता है, के पुनाउरा धाम में एक विशाल मंदिर निर्माण करने की योजना है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने निर्धारित स्थल पर पिछले साल अगस्त में भूमि पूजन किया था। यह प्रोजेक्ट 68 एकड़ से अधिक में तैयार किया जायेगा। चम्पारण ऐतिहासिक व पर्यटक स्थल है। पूर्वी चम्पारण में केसरिया स्तूप है, जोकि संसार का सबसे बड़ा बौद्ध स्तूप है और यह प्राचीन स्मारक मुख्य आर्कियोलॉजिकल साइट है। मोतिहारी में गांधी संग्रहालय है जो 1917 में गांधी जी के पहले सत्याग्रह को समर्पित म्यूजियम व स्मारक है और इसका भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में ज़बरदस्त महत्व है। पूर्वी चम्पारण में चंद्रहिया इस लिहाज़ से महत्वपूर्ण साइट है कि गांधी जी ने नील प्लांटर्स के विरुद्ध अपना आंदोलन यहीं से आरंभ किया था। इनके अतिरिक्त भी चम्पारण में अनेक ऐतिहासिक स्थल हैं जो पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।
-इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर




