एपस्टीन फाइज्स-एक दानवी नेटवर्क के काले कारनामे

एपस्टीन फाइल्स मानव सभ्यता का एक ऐसा पिंजर (कंकाल) है, जिसमें सत्ता, पैसा और वासना ने मिलकर सरेआम इंसानियत को शर्मसार किया है। आज पूरी दुनिया में यह सवाल पूछा जा रहा है कि मानवता को शर्मसार करने वाले इस कांड को क्या मानव सभ्यता का सबसे घिनौना कांड कहा जा सकता है? और उत्तर है हां, कहा जा सकता है। इतिहास में कुछ ऐसे कांड होते हैं, जो केवल कानून व्यवस्था की विफलता नहीं होती बल्कि पूरी मानव सभ्यता की नैतिक रीढ़ तोड़ देते हैं। एपस्टीन फाइल्स ऐसे ही कांड में से एक है। यह महज यौन अपराधों की कहानी नहीं है, यह उस खौफनाक की झकझोर देने वाली झलक है, जहां दौलत, सत्ता और रसूख मिलकर मासूमों का शिकार बनाते हैं। 
एपस्टीन फाइल्स के कारनामें एक दानवी नेटवर्क के कारनामें थे। अमरीकी के जेफ्री एपस्टीन पर नाबालिक लड़कियों की सेक्स-तस्करी, यौन शोषण और प्रभावशाली लोगों तक उन्हें पहुंचाने का आरोप साबित हुआ था। जांच में यह सामने आया कि यह कोई एकाकी अपराध नहीं बल्कि एक संगठित नेटवर्क था। जहां लड़कियों की भर्ती होती थी, उन्हें ट्रेनिंग दी जाती थी और फिर दुनियाभर के रसूखदार सत्ता के शहंशाहों के पास उनकी सप्लाई होती थी। इस कारनामें में एपस्टीन की सहयोगी थी- घिसलेन मैक्सवेल। घिसलेन मैक्सवेल की कहानी किसी झुग्गी या अपराधग्रस्त पृष्ठभूमि से नहीं बल्कि अत्याधिक सम्पन्न, प्रभावशाली और अभिजात्य परिवार से शुरु होती है। वास्तव में यही विरोधाभास इस कांड दो सरगनाओं एपस्टीन और गिसलेन को बेहद खतरनाक बनाते हैं। यह कांड इतना घिनौना है कि इसकी तुलना इन दिनों नाजी जर्मनी द्वारा यहूदियों के संगठित नरसंहार ‘होलोकास्ट’, जापानी सेना के नानजिंग सामूहिक हत्याकांड और अमरीका में अश्वेत लोगों पर दशकों तक किए गए सिप्लिस के अमानवीय प्रयोगों से की जाती है। एपस्टीन कांड को इन सबके साथ इसलिए गिना जाता है, क्योंकि यह शोषण किसी एक व्यक्ति का नहीं बल्कि एक व्यवस्था का था और इस अपराध को छिपाने में भी पूरा सिस्टम भागीदार रहा है। जहां पीड़ितों की चीख पुकार सुनने वाला कोई नहीं था। यह आधुनिक युग का आईना है, जहां तकनीक उन्नत है, लेकिन नैतिकता पूरी तरह से बीमार है। 
दरअसल सरल शब्दों में एपस्टीन फाइल कांड यह है कि अमरीकी फाइनेंसर, जेफ्री एपस्टीन दशकों तक दुनिया के बड़े-बड़े राजनेताओं, बिजनेस टाइकून, राजा-महाराजाओं और ग्लोबल एलीट को कमसिन लड़कियों की सप्लायी कर रहा था। इसके लिए एपस्टीन ने अपना एक ऐसा गुप्त नेटवर्क बना रखा था। जहां तक किसी ऐसे व्यक्ति की पहुंच नहीं थी, जो इस कांड में हिस्सेदार न हो। जब हम एपस्टीन फाइल्स कहते हैं तो इसका मतलब होता है इस घिनौने कांड से जुड़े लाखों दस्तावेज, जिसमें अदालतों के रिकॉर्ड, गवाहियां, ई-मेल्स, फ्लाइट लॉग्स और डिपोजिशन से है। जिनमें ये दर्ज है कि दुनिया के किन-किन रसूखदार लोगों ने एपस्टीन से संपर्क किया और कौन-कौन से उनके निजी जेट ‘लॉलिता एक्सप्रेस’ में सवार हुआ और किन नामों का जिक्र पीड़ितों की गवाहियों में आया। वास्तव में इस कांड को उजागर करने में बहुत बड़ा योगदान दीवानी मामलों और खोजी पत्रकारों की अथक मेहनत का है। पहली बार यह कांड 2005 से 2008 के बीच तब उजागर हुआ, जब अमरीका के फ्लोरिडा में कुछ नाबालिग लड़कियों के बयान सामने आए कि एपस्टीन ने उन्हें पैसे देकर मसाज के लिए बुलाया था, लेकिन उनका महीनों तक दैहिक शोषण किया गया। लेकिन इतने बड़े कांड की सज़ा जेफ्री एपस्टीन को बहुत मामूली सी हुई। कहा जाता है इसके पीछे अमरीकी न्याय व्यवस्था द्वारा की गई एक सीक्रेट डील थी। इसलिए सन् 2019 में इस दुर्दांत अपराधी को न्यूयार्क में एक फेडरल सेक्स ट्रैफिकिंग के चलते गिरफ्तार किया गया और फिर धीरे-धीरे अंधेरी गुफा के रहस्य खुलने लगे। 
लेकिन इसके पीछे बेनकाब होने से बचने वाले दुनिया के बेहद ताकतवर लोग थे। इसलिए जेफ्री एपस्टीन 2019 में ही अपनी जेल की कोठरी में मृत पाया गया। आधिकारिक रूप से इसे आत्महत्या कहा गया, लेकिन पूरी दुनिया जानती है कि ऐसे मामलों में आत्महत्या का मतलब क्या होता है? अभी तक कुछ हजार ही इस कांड से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक हुए है और इतनेभर से दुनिया के कई दर्जन ऐसे लोग बेनकाब हुए हैं, जिनके बारे में कभी कोई सोच ही नहीं सकता था। इनमें बिजनेस टाइकून, प्रोफेसर, वकील, बड़े-बड़े राजनेता, राजकुमार, राजा-महाराजा और वैज्ञानिक भी शामिल थे। बिल क्लिंटन, ब्रितानी प्रिंस एंड्रयू, मौजूदा अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और महान वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग तक का नाम एपस्टीन मामलों से जुड़ा है और भी सैकड़ों नामों हैं जो धीरे-धीरे बेनकाब हो रहे हैं। हालांकि अब हर मामले को लीप-पोतकर बराबर किया जा रहा है। ज्यादातर इस कांड में जीवित लोगों का मानना है कि उनका सिर्फ एपस्टीन से संपर्क तक करने का रिश्ता रहा है, लेकिन तीन-तीन अमरीकी राष्ट्रपति जिनमें बिल क्लिंटन और डोनाल्ड ट्रम्प के अलावा जो बाइडेन का भी नाम इससे जुड़ता है। 1990 से 2000 के बीच ट्रम्प कई बार एपस्टीन की मेहमाननवाजी हासिल कर चुके हैं। हालांकि वह इसे सामाजिक मुलाकातें कहते हैं। उजागर हुए दस्तावेजों में ट्रम्प के पहले के जो बाइडेन का भी नाम दस्तावेजों से निकला है और बिल क्लिंटन तो लॉलिता एक्सप्रेस के नियमित मेहमान हुआ करते थे। ऐसा कई संदर्भों से पता चलता है, लेकिन इन सबका कहना है इनकी सिर्फ जान पहचान ही थी, इसके आगे ये इस कांड के बारे में कुछ नहीं जानते। बहरहाल यह भयावह अपराध कथा एक बार फिर मानव समाज को चेतानवी देती है कि अपराध केवल गरीब इलाकों में नहीं पनपते क्योंकि सबसे खतरनाक अपराध सबसे आलीशान कमरों में होते हैं, जब सत्ता और पैसा मिल जाएं तो नैतिकता सबसे पहले मरती है।
20वीं सदी के सबसे भयावह अपराध कथाओं में अगर एपस्टीन के दानवी नेटवर्क को आज जाना जा रहा है, तो इसकी वजह यह है कि इस भयावह कांड के जो दस्तावेज उजागर हुए हैं, उससे पता चलता है कि यहां कम उम्र की लड़कियों को भोग की वस्तु समझा गया और शोषण का बकायदा संगठित व्यापार किया गया। इस पूरे रहस्य कांड से बार-बार ध्वनित होता है कि रसूखदार लोग कैसे अपराध को मुनाफे में बदल देते हैं। अगर जेप्री एपस्टीन की रहस्यमय मौत न हुई होती, तो शायद यह अपराध इतना संगठित न साबित होता, लेकिन जिस तरह अमरीका जैसे उन्नत देश में एपस्टीन के मौत के बाद पता चला, जेल का कोई भी कैमरा काम नहीं कर रहा था। एपस्टीन के निगरानी में लगे कोई भी सुरक्षा प्रहरी अपनी जगह पर मौजूद नहीं था, जिससे पता चलता है कि यह कितना खौफनाक संगठित अपराध था, जिसमें एपस्टीन की मौत के साथ सारे राज दफन कर दिए गए। 
इसलिए जैसे कि अब तक की पहले भी कई झकझोर देने वाली अपराध कथाएं साबित करती रही हैं कि यह सिर्फ कहानीभर नहीं होतीं, ताकतवर लोगों के जीने का तरीका होती हैं। यह कांड इसलिए भी दहशत पैदा करता है, क्योंकि इससे पता चलता है कि जिस सभ्यता को प्रगतिशील कहा गया, वह अंदर से कितनी राक्षसी है और जब तक इन राक्षसों को बेनकाब करने की किसी सत्ता में हिम्मत नहीं होगी, तब तक दुनिया के हर चमकदार शहर के नीचे ऐसे अंधेरे तहखाने मौजूद रहेंगे।
-इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर 

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