गर्मी में सब्ज़ियों की काश्त
सब्ज़ियों की काश्त से फसली विभिन्नता और रोज़गार मिलता है, जो किसानों की आर्थिक हालत सुधारने में सहायक होता है। भारत की तरह पंजाब में भी सब्ज़ियों की काश्त का रकबा और उत्पादन बढ़ा है, लेकिन इसे और बढ़ाने की ज़रूरत और गुंजाइश है। अकेले आलू की काश्त के अधीन सब्ज़ियों की कुल काश्त का 46-47 प्रतिशत रकबा है। इसके अलावा प्याज की काश्त का रकबा भी काफी बढ़ रहा है। अब गर्मियों की सब्ज़ियां समय पर लगाने के लिए जगह और किस्म का चयन करना ज़रूरी है ताकि काश्त सफलता से हो सके। पंजाब में कृषि विश्वविद्यालय और बागवानी विभाग प्रत्येक व्यक्ति को अपने खेत या बागीचों में सब्ज़ियां लगाने (किचन गार्डन स्थापित करने) पर ज़ोर दे रहे हैं। खुली मंडी में बिकने वाली सब्ज़ियों में कीट नाशकों का प्रभाव होता है, जो हानिकारक है। उपभोक्ता स्वयं भी जैविक (ऑर्गेनिक) सब्ज़ियां उगा सकते हैं। किसानों को तो घरेलू खपत के अलावा व्यापारिक स्तर पर भी सब्ज़ियां लगानी चाहिएं, जिससे उन्हें दूसरी फसलों से ज़्यादा मुनाफा मिलेगा। विशेषज्ञों के अनुसार यदि घरेलू स्तर पर सब्ज़ियां लगानी हैं तो घर के दक्षिण की तरफ क्यारियां बना कर लगाएं ताकि सब्ज़ियों को पर्याप्त धूप मिल सके। व्यापारिक स्तर पर सब्ज़ियां लगाने के लिए रेतीली मैरा और अच्छे पानी के निकास वाली मिट्टी की ज़रूरत होती है।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् (आईसीएआर) नई दिल्ली और पंजाब कृषि विश्वविद्यालय लुधियाना द्वारा भी घरेलू बागीचे में अपनी खपत के लिए सब्ज़ियां उगाने पर बहुत ज़ोर दिया जा रहा है। गर्मियों की सब्ज़ियां लगाने हेतु योजनाबंदी करने का अब उचित समय है। घीया कद्दू, हलवा कद्दू, चप्पन कद्दू, खरबूजा, तरबूज, करेला, काली तोरी, खीरा, टिंडा, लोभिया आदि की बिजाई के लिए फरवरी-मार्च अनुकूल समय है। मिर्च (सीएच-52, सीएच-27, पंजाब संधूरी), भिंडी, पंजाब सुनहरी और हरा मद्धू खरबूजा फरवरी में लगाए जा सकते हैं। इन सब्ज़ियों के बीज की किटें पीएयू, बागवानी विभाग और आईएआरआई से घरेलू स्तर पर लगाने के लिए उपलब्ध हैं। आईएआरआई ने एक ही मौसम में सब्ज़ियों के उत्पादन और आवक को रोकने के लिए सब्ज़ियों की कुछ विशेष किस्में विकसित की हैं। पूसा हरा बैंगन, पूसा सफेद बैंगन खरीफ मौसम में लगाने के लिए अनुकूल हैं। एक हेक्टेयर में सब्ज़ियां लगाने के लिए 400 से 500 ग्राम पौध की ज़रूरत होती है। पूसा हरा बैंगन और पूसा सफेद बैंगन दोनों 50-55 दिनों में पक जाते हैं। पूसा खीरा-6 का रंग हरा होने और अच्छे स्वाद की वजह से उपभोक्ताओं को बेहद पसंद है। यह पंजाब में काश्त के लिए भी अनुकूल है और उत्पादकों को इसका अच्छा दाम मिल जाता है। अच्छी गुणवत्ता वाली सब्ज़ियां उगाने के लिए 400 किलोग्राम गली-सड़ी रूड़ी की खाद या 100 किलोग्राम केंचुआ खाद प्रति 25 वर्ग मीटर डालनी चाहिए। नदीनों की रोकथाम के लिए पराली की मल्चिंग की जा सकती है। इससे सब्ज़ियों के लिए पानी की ज़रूरत कम होगी। जिनके पास कृषि के लिए ज़मीन नहीं है, वे घरेलु खपत के लिए गमलों में या छत पर कुछ सब्ज़ियां उगा सकते हैं।
बीमारियों और कीड़े-मकौड़ों से बचाव के लिए सब्ज़ियों को नेट हाउस में उगाना चाहिए। सब्ज़ियों पर ज़हर के असर को कम करने के लिए बागवानी विभाग के पूर्व उप-निदेशक (सेवानिवृत) डॉ. स्वर्ण सिंह मान ने सफेद मक्खी, थ्रिप और अन्य रस चूसने वाले कीड़ों से बचाने के लिए पीले रंग के 6×11 आकार के स्टिकी बैड प्लाट में लगाने की सिफारिश करते हैं। वायरल बीमारियों से बचाने के लिए एक लीटर गो-मूत्र, एक लीटर दूध तथा 15 लीटर पानी मिलाकर स्प्रे करना चाहिए। फंफूद की बीमारियों से बचाने के लिए 4 दिन पुरानी 3 लीटर खट्टी लस्सी को 15 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करने की सिफारिश है। कीड़ो-मकौड़ों से बचाव के लिए 2 किलो लहसुन, 1 किलो अदरक और 1 किलो हरी मिर्च को पीस कर कपड़े से छान कर 15 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव किया जा सकता है। कद्दू प्रजाति के लाल कद्दू बीटल से सब्ज़ियों को बचाने के लिए एक किलो राख 20 मि.लि. मिट्टी का तेल मिलाकर छिड़काव करना चाहिए। दीमक से बचाव के लिए 20 ग्राम हींग को कपड़े में लपेट कर पानी की खाल में रख देना चाहिए। आम कीड़ों से बचाने के लिए एक किलो नीम के पत्तों को 20 लीटर पानी में उबाल कर पानी ठंडा होने पर 200 ग्राम शक्कर मिलाकर सब्ज़ियों पर छिड़काव करना चाहिए। दिल्ली के पास कुछ उत्पादकों ने लौकी की पूसा नवीन किस्म की काश्त करके प्रति हेक्टेयर 2.5 लाख रुपये तक कमाए हैं। लौकी की पूसा द्वारा विकसित किस्मों 350 क्ंिवटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन देती हैं। गेहूं की कटाई के बाद और धान की बुआई से पहले सब्ज़ियों की काश्त करके किसान अपनी आय बढ़ा सकते हैं। कपास उत्पादक भी इस समय में पकने वाली किस्मों से मुनाफा कमा सकते हैं।
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