पंजाब के गोदामों में पड़े अतिरिक्त अनाज को शीघ्र उठाने की ज़रूरत

केन्द्र सरकार द्वारा पंजाब के गोदामों में पड़े चावल और गेहूं के भण्डारों को तत्काल उठवाने पर सहमति जताये जाने की खबर सम्पूर्ण कृषि जगत के लिए एक सुखद अनुभूति प्रदान करने जैसी है। यह सहमति पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को  केन्द्रीय खुराक एवं सार्वजनिक वितरण प्रणाली मंत्री प्रह्लाद जोशी ने उस समय दी जब मुख्यमंत्री ने पंजाब के गोदामों में पड़े अन्न भण्डारों को तत्काल उठवाए जाने हेतु उनसे मुलाकात की। उल्लेखनीय है कि पंजाब के गोदामों एवं अन्य संरक्षण भण्डारों में इस समय 155 लाख मीट्रिक टन से भी अधिक गेहूं और चावल का ज़खीरा पड़ा है। मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय मंत्री के साथ पिछले दिनों असामयिक वर्षा, आंधी और ओलावृष्टि से हुए फसलों के नुक्सान और प्रभावित किसानों को मुआविज़ा दिये जाने हेतु भी बात की। केन्द्रीय मंत्री ने मुख्यमंत्री की मांग से सहमति जताते हुए प्रदेश के गोदामों में पड़े अन्न भण्डारों को उठवाने हेतु विशेष रेलगाड़ियां चलाने का भी संकेत दिया। मुख्यमंत्री ने इस दौरान आढ़तियों की कमिशन बढ़ाये जाने के लिए भी केन्द्रीय मंत्री से बात की। 
प्रदेश के गोदामों से पिछले वर्ष का अन्न भण्डारण उठवाये जाने हेतु केन्द्र सरकार की सहमति मिलने से नि:संदेह पंजाब के किसानों और सरकार ने सुख का सांस लिया होगा। पंजाब के गोदामों में कुल 183 लाख मीट्रिक टन चावल और गेहूं रखने की क्षमता है जबकि हाल में प्रदेश में किसी भी तरह से संरक्षित पड़ा अनाज 180.88 लाख मीट्रिक टन से भी अधिक है। तिस पर प्रदेश में चालू मौसम में प्राकृतिक आपदा के बावजूद गेहूं के हुए रिकार्ड उत्पादन को सम्भालने की समस्या भी सिर पर खड़ी है। यह समस्या प्रदेश में हर वर्ष उपजती है हालांकि चालू वर्ष में मुख्यमंत्री द्वारा केन्द्र सरकार के साथ की गई इस पहल के बाद प्रदेश के गोदामों में नये भण्डारण हेतु समस्या के हल होने की प्रबल सम्भावना उपजते दिखाई देती है। 
मुख्यमंत्री की केन्द्रीय मंत्री से भेंट के दौरान हुआ यह फैसला अन्य कई पहलुओं से भी लाभकारी और कृषि-हितकर सिद्ध होने की सम्भावना है। इस निर्णय से नि:संदेह देश की उस योजना को भी बल मिलेगा जिसके तहत गरीब वर्ग के 80 करोड़ से अधिक लोगों को मुफ्त अनाज प्रदान किया जाता है। पंजाब के गोदामों में भरसक मात्रा में पड़े इस अनाज खासकर चावल और गेहूं के भण्डार को केन्द्रीय कृषि एजेंसियों ने उठाना होता है, किन्तु विगत कुछ वर्षों से गोदामों में पड़े अन्न भण्डारण को लेकर प्रदेश सरकार को अनेक कठिनाइयों एवं बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। प्रदेश में अन्न-भण्डारण हेतु गोदामों  की संख्या वास्तविक अपेक्षा से बहुत कम है। इस कारण प्रत्येक वर्ष बड़ी मात्रा में गेहूं और चावल मंडियों अथवा रेलवे स्टेशनों के आस-पास खुले में पड़ा रहता है। इसमें से बड़ी मात्रा में गेहूं और चावल धूप-वर्षा में नष्ट हो जाता है, अथवा उसे कीड़े-मकौड़े और चूहे-पंछी खा जाते हैं। धूप-वर्षा में खराब हुआ अन्न अक्सर पशुओं के खाने के योग्य भी नहीं रहता। 
पंजाब देश का मुख्य अन्न प्रदाता राज्य है। इसी प्रदेश ने अनाज के मामले में देश को न केवल आत्म-निर्भर बनाया, अपितु देश आज चावल का एक बड़ा निर्यातक बन कर भी उभरा है, किन्तु पंजाब की एक बड़ी समस्या अन्न-भण्डारों की सम्भाल और संरक्षण की है। इस कारण अन्न की पौष्टिकता भी प्रभावित होने लगती है। समुचित संख्या में गोदामों का निर्माण करके संरक्षित होने वाले इस अन्न को देश के कमी वाले राज्यों में भेजा जा सकता है, अथवा देश की अन्य अन्न वितरण योजनाओं हेतु प्रयुक्त किया जा सकता है। हम समझते हैं कि बेशक मुख्यमंत्री के प्रयासों और केन्द्र की सहमति से प्रदेश के गोदामों अथवा खुले में पड़े अन्न भण्डारों की निकासी की पहल सिरे चढ़ते प्रतीत होती है, किन्तु पंजाब की सरकार को निजी तौर पर भी अपने किसानों के खून-पसीने वाली मेहनत से उपलब्ध गेहूं और चावल की फसल की समुचित सार-सम्भाल हेतु कोई ठोस एवं स्थायी योजना अवश्य बनानी चाहिए। इस हेतु जिस भी पक्ष से, और जहां से भी मदद ली जा सके, वो अवश्य लेनी चाहिए।

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