पंजाब के मामले हल करे भाजपा की केन्द्र सरकार

कुझ किहा तां हनेरा जरेगा किवें,
चुप रिहा तां शमादान की कहिणगे।
गीत दी मौत इस रात जे हो गई,
मेरा जीना मेरे यार किंझ सहिणगे।
—सुरजीत पातर

एक ओर तो भाजपा पंजाब में विधानसभा की आमागी चुनाव में अकेले लड़ कर सरकार बनाने के दावे कर रही है। इस संबंधी भाजपा के वरिष्ठ नेता तथा देश के गृहमंत्री अमित शाह मोगा रैली में बाकायदा घोषणा भी कर गए हैं, परन्तु दूसरी ओर गाहे-बगाहे भाजपा द्वारा कांग्रेस की भांति पंजाब तथा सिख समुदाय के साथ अन्याय करने के समाचार भी आते रहते हैं। अब ताज़ा मामला भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड में से पंजाब का स्थायी प्रतिनिधित्व (मैंबर पावर) के रूप में खत्म करने तथा राजस्थान तथा हिमाचल को बीबीएमबी के स्थायी सदस्य बनाने का मामला हमारे सामने आ चुका है। यदि भाजपा पंबाब पर शासन करने की सोच रही है तो उसे पंजाबियों तथा सिख समुदाय के मामले हल करने पडें़गे।
पंजाबियों तथा सिखों की शिकायतें तथा मामले
वैसे तो समय की सभी केन्द्र सरकारों ने पंजाब तथा सिखों के साथ अन्याय किए हैं और उनके मामले या लटकाए हैं या अनसुने किए हैं, परन्तु मैं भाजपा के चाणक्य अमित शाह को यह अवश्य कहूंगा कि यदि सचमुच पंजाब पर शासन करने की चाहत है तो पंजाबियों तथा सिखों के मामलों पर अवश्य विचार करें तथा उन्हें हल करें। भाजपा सिखों के लिए अछूत नहीं है। इन मामलों में प्रमुख हैं : 
एमएसपी लागू न होना : हालांकि लम्बे संघर्ष के बाद ही केन्द्र सरकार तीन कृषि कानून वापस लेने पर मजबूर हुई। उस समय एमएसपी की कानूनी गारंटी देना संकेत रूप में मान लिया गया था, परन्तु यह अभी तक लागू नहीं हुई।
एसवाईएल नहर तथा पानी विवाद : चाहे यह मामला कांग्रेस शासन के समय उलझा, परन्तु इस बीच अटल बिहारी बाजपेयी सहित भाजपा ने अब तक 17 वर्ष शासन किया है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला आश्चर्यजनक है कि पानी है कि नहीं, बाद में देखेंगे, पहले नहर बनाएं, परन्तु भाजपा सरकार ने यह मामला हल करने के लिए कोई भी ठोस कदम नहीं उठाया।
चंडीगढ़ पंजाब का है : बार-बार फैसले हुए कि चंडीगढ़ पंजाब का है, परन्तु कांग्रेस सरकारों के समय इसे पंजाब को सौंपने के समय धोखा तथा अन्याय किया जाता रहा, परन्तु भाजपा भी उसी राह पर चल रही है, अपितु एक कदम आगे होकर बार-बार चंडीगढ़ को स्थायी केन्द्र शासित प्रदेश बनाने का यत्न किया जा रहा है। पंजाब यूनिवर्सिटी स्थायी रूप में छीनने के यत्न भी तेज़ हैं। चंडीगढ़ की डेमोग्राफी तो बदली ही जा चुकी है। 
बार्डर व्यापार हेतु बंद रखने : यह ठीक है कि इस समय भारत-पाकिस्तान संबंध ठीक नहीं। आप्रेशन सिंदूर कागज़ों में जारी है, परन्तु कभी भी बैक डोर बातचीत बंद नहीं होती। चीन के साथ डोकलाम तथा गलवान झड़पों के बावजूद व्यापार बंद नहीं हुआ। पाकिस्तान को भी दवाइयां आदि तीसरे देशों के ज़रिये जा ही रही हैं, परन्तु लैंड लाक्ड पंजाब का ज़मीनी सीमा के ज़रिये व्यापार रोकना पंजाब का गला घोंटने के समान है। यहां तक कि पंजाब का सामान जो मध्य-पूर्व तथा यूरोपियन देशों को जाता है, वह पहले मुम्बई या गुजरात की बंदरगाहों पर भेजना पड़ता है, जो स्वाभाविक रूप से निर्यात के लिए महंगा हो जाता। प्रतिस्पर्धा के दौर में पंजाब के उद्योगपितयों को बंदरगाहों के निकट या अधिक सुविधाओं वाले क्षेत्रों में अपने उद्योग या तो शिफ्ट करने पड़ रहे हैं या नये उद्योग पंजाब की बजाय बाहर लगाने पड़ रहे हैं। किसानों को पाकिस्तान के साथ व्यापार खुलने पर दोगुणा लाभ हो सकता है। कहा जाता है कि व्यापार से पाकिस्तान से नशा तथा हथियार आते हैं। क्या अब नहीं आ रहे?
हमारे ऐतिहासिक गुरुद्वारे : मैं ऐसे सभी गुरुद्वारों की बात नहीं करता, परन्तु कुछ प्रमुख स्थान जिनमें हरिद्वार में हर की पैड़ी पर गुरु नानक साहिब का ऐतिहासिक गुरुद्वारा ‘ज्ञान गोदड़ी’ जो 1984 में गिरा दिया गया था, भाजपा की सरकार ने भी 12 वर्षों में उसे दोबारा बनाने की अनुमति नहीं दी। 2017-18 में भाजपा के शासन में सिक्किम स्थित गुरु नानक साहिब के गुरुद्वारा ‘डांग मार’ साहिब पर बौद्द लामाओं ने कब्ज़ा करके वहां बौद्ध मंदिर बना लिया था। मामला चाहे अदालत में है, परन्तु केन्द्र सरकार ने इसमें समझौते या न्याय के लिए कोई पहल-कदमी नहीं की। उड़ीसा में जगन्नाथ पुरी में गुरुद्वारा ‘मंगू मठ’ जहां गुरु नानक देव जी कई दिन ठहरे, सौंदर्यकरण के नाम पर गिरा दिया गया। मामला अदालत में है। अब तो राज्य सरकार भी भाजपा की है, परन्तु उसके लिए उचित वैकल्पिक स्थान देने के लिए भाजपा सरकार ने कोई समाधान नहीं किया। गुरुद्वारा सचखंड श्री हुज़ूर साहिब की निजाम हैदराबाद द्वारा दी गई हज़ारों एकड़ ज़मीन पर अवैध कब्ज़े छुड़वाने के लिए सरकार कुछ नहीं कर रही, हालांकि अदालत ने सख्त टिप्पणियां भी की हैं।
सिख संस्थाओं का अवसान : सिख संस्थाएं शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी, सिख बोर्ड पटना साहिब, जम्मू-कश्मीर सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी तथा अन्य सिख संस्थाओं के चुनाव न करवा कर उन्हें अवसान की ओर धकेला जा रहा है। यदि ये चुनाव लगातार समयानुसार हों तो सिख नेतृत्व सर्वप्रवाणित एवं समर्थ हो सकता है।
दशकों से लटक रही मांगें : संघीय ढांचे की मज़बूती, पानी संबंधी रिपेरियन कानून लागू करने, पंजाबी को पड़ोसी राज्यों में उसका हक देने तथा पंजाबी भाषी क्षेत्र देने की ओर भी किसी ने कोई ध्यान नहीं दिया।
शिरोमणि कमेटी का प्रभाव कम करना : शिरोमणि कमेटी जो सिखों की पार्लियामैंट मानी जाती है, का प्रभाव इतना कम कर दिया गया है कि प्रधानमंत्री जिन्हें कई आम व्यक्ति भी मिल लेते हैं, वर्षों के इन्तज़ार के बाद भी शिरोमणि कमेटी के प्रतिनिधिमंडल या कमेटी के मिलने के लिए समय देने को तैयार नहीं हैं। दूसरी ओर बंदी सिंहों की रिहाई उनकी ओर से सज़ा पूरी कर लिए जाने के बाद भी नहीं की गई और अधिकतर को पैरोल भी नहीं मिलता, जबकि हत्या तथा दुष्कर्म के मामलों में दोषियों को भी चुनाव के दृष्टिगत आए दिन पैरोल दे दिया जाता है। केन्द्र ने 9 सिखों की रिहाई की घोषणा भी की थी परन्तु......।
कोई आर्थिक पैकेज नहीं : पंजाब एक सीमांत राज्य है। पड़ोसी हिमाचल को बड़ा आर्थिक पैकेज तथा सुविथाएं दी गई हैं, परन्तु पंजाब को कोई आर्थिक पैकेज नहीं। और तो और, बाढ़ के नुकसान में सहायता के लिए घोषित 1600 करोड़ रुपये भी खातों में ही एडजस्ट कर दिए गए हैं। 
बीएसएफ का क्षेत्र : 2021 में पंजाब की सीमा से 50 किलोमीटर तक का क्षेत्र बीएसएफ को सौंप दिया गया। इससे नशे तथा तस्करी की आमद तो नहीं रुकी, परन्तु पंजाब के संघीय अधिकार पर चोट अवश्य लगी है।
सिख इतिहास पर चोट : हालांकि केन्द्र सरकार का स्कूलों, कालेजों में सिख इतिहास पढ़ाने का फैसला प्रशंसनीय है, परन्तु इस पाठ्यक्रम के बारे में आए दिन सवाल उठते रहते हैं। क्यों नहीं इस पाठ्यक्रम बारे सिख विद्वानों या शिरोमणि कमेटी द्वारा नियुक्त विद्वानों से सलाह कर ली जाती।
हम अमित शाह जी को कहना चाहते हैं कि सिखों के लिए भाजपा अछूत नहीं। यदि पंजाब पर शासन करना है तो पहले पंजाबियों तथा सिखों के मामले हल करें। यह न कहें कि हमारी सरकार आएगी तो हल करेंगे। अधिकतर मामले केन्द्र सरकार के हल करने हैं, पंजाब सरकार ने नहीं। यदि आप ऐसा नहीं करते तो पंजाबी तथा विशेषकर सिख आप पर विश्वास करने में कठिनाई महसूस करेंगे, चाहे आप कितना भी बड़ा सिख चेहरा भाजपा में शांिमल कर लें। 
वो तेरा तज़र्-ए-त़गाफुल, ये तेरा बेगानापन
वो अलग देखा हुआ है, ये जुदा देखा हुआ।
(ज़़फर इकबाल)
(तज़र्-ए-त़गाफुल = बेखबरी  का अंदाज़)

-1044, गुरु नानक स्ट्रीट, समराला रोड, खन्ना
-मो. 92168-60000      

 

#पंजाब के मामले हल करे भाजपा की केन्द्र सरकार