किसानों के लिए बड़ी राहत
गेहूं पंजाब और हरियाणा की मुख्य फसल है। कृषि का ज्यादातर दारोमदार इस पर केन्द्रित रहता है। इसलिए फसल की बुआई से लेकर इसके मंडीकरण तक किसानों के अतिरिक्त प्रदेश सरकार के साथ-साथ केन्द्र सरकार की बड़ी हद तक सक्रियता रहती है, क्योंकि इस समय में कदम-कदम पर कई तरह की मुश्किलें पेश आती हैं। इस बार फसल के मंडियों में आने से पहले ही आढ़तियों और संबंधित अन्य कर्मचारियों ने अपनी मांगों के लिए हड़ताल कर दी थी, जोकि बाद में प्रदेश सरकार के यत्नों से वापस ले ली गई थी।
उसके बाद मंडियों में गेहूं के मंडीकरण के लिए प्रदेश सरकार ने हर तरह के प्रबन्ध करने के यत्न किए, चाहे फसल का बड़ा हिस्सा केन्द्र की एजेंसी एफ.सी.आई. द्वारा ही खरीदा जाता है और बाद में उसकी प्रत्येक तरह के गेहूं और चावल के वितरण की भी ज़िम्मेदारी होती है परन्तु पंजाब की कुछ खरीद एजेंसियों द्वारा भी गेहूं व धान की खरीद में अपना-अपना योगदान डाला जाता है। मार्कफैड, पनग्रेन, पनसप और पंजाब वेयर हाऊस जैसी प्रदेश की सरकारी एजेंसियों द्वारा भी एफ.सी.आई. के लिए यह खरीद की जाती है। फसल की आवक पर अक्सर दो बातों के लिए बड़ी कठिनाई आती है, जिनमें बारदाना की कमी और अनाज के भंडारण की अभी तक बनी सीमाओं के कारण ज्यादातर फसल खुले आसमान के नीचे रखने के लिए ही जोड़-तोड़ किया जाता है। इस बार बेमौसमी वर्षा और मौसम में आए बड़े बदलाव के कारण किसानों की सांस फूली रही थीं, क्योंकि इस कारण फसल का उत्पादन बड़ी सीमा तक प्रभावित होने की आशंका थी। सरकार द्वारा 1 अप्रैल से गेहूं के मंडीकरण की घोषणा की गई थी, परन्तु पहले दो सप्ताह खराब मौसम और वर्षा के कारण इसने गति नहीं पकड़ी, जो फसल मंडियों में पहुंची भी उसकी खरीद में बड़ी रुकावटें पेश आईं। ज्यादातर फसल खरीद मापदंडों पर पूरी न उतरने के कारण मंडीकरण के इंतज़ार में ही पड़ी रही। संबंधित एजेंसियों ने इसे खरीदने पर आना-कानी की, इस स्थिति को देखते हुए पिछले दिनों मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने संबंधित केन्द्रीय मंत्री श्री प्रह्लाद जोशी के साथ दिल्ली जाकर भेंट भी की थी। पंजाब सरकार द्वारा इस संबंध में केन्द्रीय मंत्रालय को पत्र भी लिखा गया था।
समस्या के दृष्टिगत पिछले दिनों केन्द्रीय टीमों ने पंजाब भर में कई मंडियों का दौरा किया और स्थिति का जायज़ा लिया। इससे पहले राजस्थान और हरियाणा में भी फसल की खरीद संबंधी केन्द्र ने अपनी शर्तों को नरम कर दिया था। पंजाब में सरकार द्वारा इस बार 122 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य रखा गया है। इस संबंध में अब एक बड़ी राहत भरा समाचार केन्द्रीय खाद्य मंत्रालय द्वारा यह आया है कि केन्द्र सरकार ने अपनी टीमों द्वारा लिए गए जायज़े के आधार पर 80 प्रतिशत तक चमक खो चुके, 20 प्रतिशत सिकुड़ चुके और 6 प्रतिशत तक टूटे दानों वाली गेहूं की कीमत में कोई भी कटौती किए बिना खरीदने की छूट दे दी गई है। एक अनुमान के अनुसार पंजाब में मौसम की खराबी से 1.30 लाख एकड़ फसल का नुकसान हुआ है, परन्तु अब यह राहत मिलने के बाद मंडियों में भारी मात्रा में लगातार गेहूं आने की संभावना बन गई है। नि:संदेह इस समाचार ने किसानों को एक बड़ी राहत दी है, जिससे खरीद गतिविधयां एकाएक बढ़ जाएंगी। यदि इस फसल का सन्तोषजनक ढंग से मंडीकरण हो जाता है तो यह सभी के लिए एक बड़ी राहत देने वाली बात होगी।
—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

