केजरीवाल को कोर्ट से झटका: जस्टिस शर्मा ही करेंगी सुनवाई, आवेदन खारिज
नई दिल्ली, 20 अप्रैल - आबकारी नीति मामले में आज हाईकोर्ट अरविंद केजरीवाल की रिक्यूजल याचिका पर अपना फैसला सुनाया। केजरीवाल दिल्ली हाईकोर्ट में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए। इस दौरान केजरीवाल ने अपना जवाबी हलफनामा रिकॉर्ड पर लेने की मांग की। सुनवाई को दौरान केजरीवाल ने कहा, मैडम अगर मेरा जवाब रिकॉर्ड पर नहीं लिया गया तो यह न्याय के प्रति लापरवाही होगी।
अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा यदि किसी न्यायाधीश का फैसला ऊपरी अदालत द्वारा बदला जाता है तो किसी भी प्रतिवादी को यह कहने का हक नहीं है कि आमुख जज फैसला करने योग्य नहीं हैं। जज की क्षमताओं पर फैसला इसकी उच्च अदालत करती है ना की प्रतिवादी।
अदालत में अखिल भारतीय देवता परिषद के कार्यक्रमों में न्यायमूर्ति के शामिल होने पर कहा कि वह महिला दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुई थीं, जिसमें उन्होंने जूनियर वकीलों और अन्य बार के सदस्यों को संबोधित किया था। केवल अरविंद केजरीवाल की आईडियोलॉजी से सहमति न रखने के चलते यह आरोप गलत है।
न्यायमूर्ति शर्मा ने कहा मेरा न्यायिक करियर 34 वर्षों का रहा है। क्या अब यह हो सकता है कि जजों को वादकारी द्वारा तय अतिरिक्त परीक्षा पास करनी पड़े कि वे मामले की सुनवाई के योग्य हैं? क्या उन्हें वादकारी द्वारा बनाए गए मानकों के आधार पर पहले खुद को साबित करना होगा? ऐसे में जजों को यह भी साबित करना पड़ेगा कि उन्होंने किसी संगठन के कार्यक्रम में भाग नहीं लिया या उनके परिवार के सदस्य विधि पेशे में नहीं हैं।

