गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत दिल्ली से ट्रेन के जरिए कुरुक्षेत्र रेलवे स्टेशन पहुंचे
कुरुक्षेत्र , 14 मई धर्मनगरी कुरुक्षेत्र में आज अलग ही तस्वीर देखने को मिली। गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत दिल्ली से ट्रेन के जरिए कुरुक्षेत्र रेलवे स्टेशन पहुंचे। यहां से उन्होंने साइकिल पर गुरुकुल कुरुक्षेत्र के लिए रवाना होकर लोगों को ईंधन बचाने और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
राज्यपाल के साथ उनकी सिक्योरिटी टीम भी साइकिल पर नजर आई। आगे गुरुकुल कुरुक्षेत्र की 2 इलेक्ट्रिक गाड़ियां चल रही थीं। आचार्य देवव्रत ने साफ कहा कि जब तक देश में तेल की स्थिति सामान्य नहीं होती, तब तक वे हवाई जहाज और हेलिकॉप्टर का इस्तेमाल नहीं करेंगे। उनकी अधिकतर यात्राएं ट्रेन, बस और साइकिल से ही होंगी।
उन्होंने कहा कि एशिया और दुनिया के कई हिस्सों में लंबे समय से तनाव और युद्ध जैसे हालात बने हुए हैं। अमेरिका और ईरान समेत कई देशों के बीच चल रहे संघर्ष का असर तेल आपूर्ति पर पड़ा है। इससे भारत में तेल आयात प्रभावित हुआ है। ऐसे समय में हर देशवासी का कर्तव्य बनता है कि वह प्रधानमंत्री के आह्वान को स्वीकार करे और तेल की बचत करे।
राज्यपाल ने कहा कि विदेशी वस्तुओं पर निर्भरता कम करनी होगी और स्वदेशी को अपनाना होगा, ताकि देश आर्थिक रूप से और मजबूत बन सके। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश को विकसित भारत की दिशा में तेजी से आगे बढ़ा रहे हैं और पिछले वर्षों में हुआ विकास इसका प्रमाण है।
आचार्य देवव्रत ने कहा,
“मैंने फैसला लिया है कि जब तक तेल की स्थिति सामान्य नहीं होती, तब तक मैं हवाई जहाज और हेलिकॉप्टर का प्रयोग नहीं करूंगा। मेरी यात्राएं ट्रेन, बस और साइकिल से होंगी। मेरे काफिले में 3 से ज्यादा गाड़ियां नहीं रहेंगी। इससे जनमानस को प्रेरणा मिलेगी और हम सब मिलकर इस संकट से बाहर निकलेंगे।”उन्होंने बताया कि वे आज भी गुरुकुल के संस्कारों को जीवन में उतारते हैं। दिल्ली से कुरुक्षेत्र ट्रेन से आए हैं और वापस भी ट्रेन से ही जाएंगे। गांवों में रात्रि प्रवास के दौरान सरकारी स्कूलों और अनुसूचित जाति-जनजाति परिवारों में रुकते हैं। वहां जनसभाएं कर लोगों को पशुपालन, गौ आधारित खेती, बच्चों में संस्कार, नशामुक्ति और स्वच्छता के लिए जागरूक करते हैं।राज्यपाल ने कहा कि वे केवल फोटो खिंचवाने के लिए कार्यक्रम नहीं करते, बल्कि हर सप्ताह गांव-गांव जाकर लोगों से सीधे संवाद करते हैं। गुजरात में सैकड़ों गांवों में वे लगातार प्राकृतिक खेती का संदेश दे रहे हैं।
उन्होंने किसानों से प्राकृतिक खेती अपनाने की अपील करते हुए कहा कि देश हर साल यूरिया पर ढाई लाख करोड़ रुपए खर्च करता है। अगर किसान रासायनिक खेती छोड़कर प्राकृतिक खेती अपनाएं तो धरती, पानी और पर्यावरण को बचाया जा सकता है। साथ ही कैंसर, हार्ट अटैक, डायबिटीज और दूसरी गंभीर बीमारियों से भी राहत मिलेगी।
आचार्य देवव्रत ने दावा किया कि प्राकृतिक खेती में उत्पादन कम नहीं होता, बल्कि किसान की लागत घटती है और जमीन की उर्वरता बढ़ती है

