सहयोग का बढ़ता दायरा

विगत दिवस प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कुछ देशों की विदेश यात्रा की व्यापक स्तर पर चर्चा होती रही है। उनकी कुछ समय की संयुक्त अरब अमीरात की यात्रा इसलिए भावपूर्ण मानी जा सकती है, क्योंकि यह देश भारत का बड़ा सहयोगी बना रहा है। ज्यादातर अरब देशों से ही देश तेल का आयात करता है। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के दृष्टिगत इस देश के साथ किए गए तेल समझौते समय की नज़ाकत को देखते हुए बेहद महत्त्वपूर्ण माने जा सकते हैं। उनकी स्केंडिनेवियन देशों, जिन्हें नार्डिक देश भी कहा जाता है, की यात्रा इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि यह भारत की ओर से दोस्ती के दायरे को और भी बड़ा करने का संकेत है। आज लगभग 700 नार्डिक कम्पनियां भारत के विकास में अपना योगदान डाल रही हैं और लगभग 150 भारतीय कम्पनियां नार्डिक क्षेत्र में सक्रिय हैं।
नार्वे, डैनमार्क, फिनलैंड और स्वीडन ऐसे देश हैं, जिन्हें धरती पर स्वर्ग कहा जा सकता है। यहां के नागरिक जिस तरह का जीवन-स्तर जी रहे हैं, उसकी हमारे देश में कल्पना भी नहीं की जा सकती। भारत और नार्डिक देश वर्षों से आपसी समझौतों के साथ जुड़े रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा तीसरे भारत-नार्डिक शिखर सम्मेलन का एक अहम हिस्सा थी। इन देशों के साथ किए समझौते भी अहम माने जा सकते हैं। नार्डिक देश लोकतांत्रिक मूल्यों और मानवीय विकास पर केन्द्रित रहे हैं। उनके साथ किए गए समझौतों में ग्रीन ऊर्जा के साथ-साथ नवीनतम टैक्नोलॉजी का आदान-प्रदान निश्चय ही भारत के लिए लाभदायक सिद्ध होगा। इसी दौरे में प्रधानमंत्री की इटली यात्रा की भी व्यापक चर्चा होती रही है। यूरोपियन यूनियन देशों में इटली भारत का बड़ा व्यापारिक भागीदार बना रहा है। यहां लगभग 2 लाख भारतीय मूल के लोग बसे हुए हैं और बड़ी संख्या में भारतीय विद्यार्थी भी यहां के विश्वविद्यालयों में पढ़ाई कर रहे हैं। वर्ष 2025 में दोनों देशों का आपसी व्यापार 14.25 अरब डॉलर (लगभग 1,36,800 करोड़ रुपये) रहा था। अभी हुए समझौतों में वर्ष 2029 तक वार्षिक व्यापार 20 अरब डॉलर (1,92,000 करोड़ रुपये) करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
एक बड़ी बात यह भी है कि विगत लम्बी अवधि से भारत मध्य पूर्व और यूरोपीय कॉरिडोर संबंधी की जा रही योजनाबंदी का हिस्सा रहा है, जिसमें इटली भी एक बड़ा सहयोगी है। आगामी समय में भी भारत की यूरोपियन यूनियन के देशों के साथ बन रही भागीदारी में इटली एक मज़बूत कड़ी बनने की सम्भावना रखता है। निश्चय ही भारत का बढ़ता दोस्ती और सहयोग का दायरा इसके अच्छे भविष्य का साक्षी बन सकेगा।

—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

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