भावी पीढ़ियों को बचाने के लिए पेड़ लगाएं
दुनिया ने 21वीं सदी का पहला चौथा हिस्सा पूरा कर लिया है। यानी 21वीं सदी के पहले 25 साल बीत चुके हैं। इन 25 सालों में पर्यावरण में हुए बदलावों ने इंसानी जीवन और धरती के भविष्य पर बहुत बुरा असर डाला है। आज इस बात पर सोचने की ज़रूरत है कि बदलते पर्यावरण का हमारे आस-पास और आने वाली पीढ़ियों पर क्या असर पड़ रहा है और भविष्य में हमारे सामने क्या चुनौतियां आ सकती हैं।
21वीं सदी के पहले क्वार्टर में वैश्विक तापमान में लगातार बढ़ोतरी, हीट वेव की तेज़ी, ग्लेशियर का पिघलना, समुद्र का स्तर बढ़ना, पेड़ों की अंधाधुंध कटाई, जंगल में आग लगना, भूजल स्तर का नीचे जाना और नदियों का प्रदूषण जैसी समस्याओं ने इंसानियत के लिए चिंता पैदा कर दी है। ये सभी चुनौतियां सीधे हमारे भविष्य से जुड़ी हैं।
धरती का तापमान लगातार बढ़ रहा है। वैश्विक तपिश के असर से धरती तपती भट्टी बनती जा रही है। हाल के सर्वे के मुताबिक दुनिया के सबसे गर्म शहरों में से ज़्यादातर भारत में हैं। यह स्थिति हमारे लिए गंभीर चिंता की बात है और पर्यावरण के प्रति हमारी ज़िम्मेदारी और बढ़ जाती है।
बढ़ते तापमान की वजह से दुनिया भर में जंगलों में आग लगने की घटनाएं बढ़ रही हैं। इन आग की वजह से अनगिनत जंगली जानवर अपनी जान गंवा रहे हैं। लगातार जंगलों की कटाई से पर्यावरण संतुलन बिगड़ रहा है और प्राकृतिक ढांचे पर विपरीत असर पड़ रहा है।
हीट वेव और पर्यावरण बदलाव की वजह से धरती का एक बड़ा हिस्सा सूखे का सामना कर रहा है। इसका सीधा असर खाद्य पदार्थों के उत्पादन पर पड़ रहा है। गर्म हवाओं की वजह से वेटलैंड्स सूख रहे हैं और बायोडायवर्सिटी को भी खतरा हो रहा है।
अमेजन के जंगलों को धरती के फेफड़े कहा जाता है। ये जंगल दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत ऑक्सीजन पैदा करते हैं। भारत में आबादी के मुकाबले जंगलों का एरिया बहुत कम है। एक इंसान को स्वास्थ जीवन के लिए कम से कम 35 पेड़ों की ज़रूरत होती है। कोरोना महामारी के दौरान ऑक्सीजन की कमी ने दुनिया के सामने पेड़ों की अहमियत को साफ तौर पर दिखाया। धरती पर जीवन को बचाने में पेड़ों का सबसे अहम रोल है। वैश्विक तपिश को नियंत्रित करने, सूखे से राहत दिलाने और बारिश लाने में पेड़ों की भूमिका बेमिसाल है। पर्यावरण बदलाव ने दुनिया की सांसें सुखा दी हैं, लेकिन पेड़ों की कोमल पत्तियां ही उसे ताज़गी दे सकती हैं।
पेड़ों और इंसानों का रिश्ता सदियों से चला आ रहा है। यही रिश्ता इंसानी ज़िंदगी को बचाने में मदद करता है। आज सबसे बड़ी ज़रूरत धरती को बचाने की है और इसका रास्ता जंगलों से होकर जाता है।
-लेखक राज्यसभा सांसद व पर्यावरण प्रेमी हैं।

