गम्भीर होता बिजली संकट
सूचनाओं के अनुसार इस बार देश में मानसून की कम बारिश होने की सम्भावना है। अब तक उत्तर भारतीय राज्यों में गर्मी का प्रकोप जारी है। पंजाब सरकार के थर्मल प्लांट और प्रदेश के निजी थर्मल प्लांट भी थके हुए नज़र आते हैं, क्योंकि साल प्रति साल और दिन प्रतिदिन बिजली की मांग लगातार बढ़ती जा रही है और मांग के अनुपात अनुसार इसका उत्पादन बहुत कम है। पंजाब में जो निजी कम्पनियों ने थर्मल प्लांट लगाने का साहस किया था, उनके भी पसीने छूट गये हैं। इसी कारण कुछ वर्ष पहले से निजी स्वामित्व वाले गोइंदवाल साहिब थर्मल पावर प्लांट को अनेक कारणों के कारण नुकसान का सामना करना पड़ रहा था और आखिरकार मालिकों द्वारा उसे पंजाब सरकार को ही बेच दिया गया था।
अब राजपुरा का नाभा थर्मल पावर प्लांट जिसकी सामर्थ्य 1400 मैगावाट बिजली पैदा करने की है, को भी एक निजी कम्पनी लारसन एंड टुबरो लिमिटेड द्वारा एक अन्य निजी कम्पनी टोरैंट पावर को इसलिए बेच दिया गया, क्योंकि यह लगातार घाटे में चल रहा था। इस पावर प्लांट को इस कम्पनी ने पिछले 6 वर्षों में बेचने के लिए लगाया हुआ था। अंतत: लम्बे इंतजार के बाद उसको बड़ी कम्पनी टोरैंट पावर को 3632.35 करोड़ रुपये में बेच दिया गया, जबकि पहले यह कम्पनी लगातार इससे कहीं बड़ी कीमत की मांग कर रही थी। चाहे इस सौदे से प्रदेश में बिजली की कमी नहीं आएगी, क्योंकि पंजाब सरकार द्वारा बिजली बोर्ड के इस प्लांट के साथ 25 वर्ष का बिजली खरीद संबंधी समझौता किया हुआ है, जो इसके स्वामित्व को बदलने के बाद भी उसी तरह चलता रहेगा।
चाहे पंजाब सरकार ने इस बार धान की रोपाई के इस समय में किसानों को एक सीमित समय के लिए लगातार बिजली सप्लाई देने का वायदा तो किया है, परन्तु प्रदेश भर से मिल रहे समाचारों के अनुसार अनेक स्थानों से तथा प्रत्येक क्षेत्र में बिजली के अघोषित कट लगने के कारण लोग बेहद परेशानी में से गुज़र रहे हैं। बहुत-से स्थानों से बिजली की लाइनें तथा जैनरेटरों में खराबी आने के समाचारों ने भी बड़ी परेशानी पैदा की है। एक तरफ प्रदेश बिजली की कमी से जूझ रहा है, दूसरी तरफ तीन सरकारी ताप बिजली घरों के ठेका कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर दो सप्ताह से हड़ताल की हुई है।
चाहे सरकार ने धान के लिए दिन के समय 8 घंटे निर्विघ्न बिजली देने की घोषणा की हुई है, परन्तु अघोषित कटों से दुखी किसानों द्वारा प्रदेश भर में अलग-अलग स्थानों पर रोष प्रदर्शन किए जाने के समाचार मिल रहे हैं। पावरकॉम इस समय बड़ी परेशानी में से गुज़रते दिखाई दे रहा है और वह हर तरफ बिजली प्राप्ति के लिए प्रयास भी कर रहा है। उसे केन्द्रीय पूल से बिजली लेनी पड़ रही है। महंगे दाम पर लगातार ली जा रही इस बिजली ने प्रदेश की आर्थिकता का भी क्षरण करना शुरू कर दिया है। समाचारों के अनुसार पावरकॉम ने 4155 करोड़ की बकाया राशि अलग-अलग क्षेत्रों से लेनी है, जिसके लिए उसने पंजाब पावरकॉम रैगुलेटरी कमिशन तक भी पहुंच की है, क्योंकि उसने प्रदेश में 19 लाख से भी अधिक प्रत्येक क्षेत्र की इकाइयों तथा परिवारों से बकाया राशि लेनी है। इसलिए उसने यकमुश्त समझौता करने की योजना की भी अनुमति ले ली है। इसमें घरेलू उपभोक्ताओं एवं औद्योगिक इकाइयों से उसे लाभ मिलने की उम्मीद है, परन्तु बड़ी चिन्ता की बात यह बनी हुई है कि जिस प्रकार प्रदेश में बढ़ी हुई ज़रूरत से बिजली का उत्पादन बेहद कम हो रहा है और सभी वर्गों द्वारा अधिक से अधिक बिजली प्राप्त करने के लिए दबाव बढ़ रहा है, पावरकॉम पर बिजली संबंधी जारी दशकों से चली आ रही मुफ्त की योजनाओं ने समूचे रूप में पंजाब की आर्थिकता पर बोझ डाल दिया है, उससे सीधी लोगों से जुड़ी यह समस्या और भी गम्भीर होती जा रही है। अब सवाल यह पैदा होता है कि क्या आगामी समय में इस बेहद गम्भीर एवं घातक समस्या का कोई न कोई समाधान निकल सकना सम्भव हो सकेगा?
—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

