सरकार और पंथक घटनाक्रम
पंजाब में समय-समय पर श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी की घटित घटनाओं की बड़ी चर्चा होती रही है और इसने कई संकटों को जन्म दिया है। शिरोमणि अकाली दल (ब) के नेतृत्व वाली सरकार के समय 2015 में भी इस मामले को लेकर गम्भीर संकट पैदा हुआ था, उस समय घटित घटनाक्रम का कोई सन्तोषजनक ढंग से हल नहीं हो सका था। स. प्रकाश सिंह बादल के नेतृत्व में अकाली-भाजपा की 2007 में बनी गठबंधन की सरकार के समय 2008 में ‘जागृत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार एक्ट-2008’ कानून बनाया गया था परन्तु इस कानून का उद्देश्य श्री गुरु गुरु ग्रंथ साहिब की प्रकाशना का काम शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबन्धक कमेटी को देना था। निजी प्रकाशकों को श्री गुरु ग्रंथ साहिब की प्रकाशना का काम करने पर रोक लगा दी गई थी। इस कानून में श्री गुरु ग्रंथ साहिब के प्रकाशन, स्टोर में सम्भाल कर रखने और प्रकाशित बीड़ को एक से दूसरे स्थान पर लेकर जाने की व्यवस्था निर्धारित की गई थी।
यह कानून 2015 में बुर्ज जवाहर सिंह वाला (फरीदकोट) और बरगाड़ी में श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी की हुई बेहद चर्चित घटनाओं से कई वर्ष पहले बना हुआ होने के कारण इसमें बेअदबी करने वालों को सज़ा देने की इसमें कोई व्यवस्था नहीं थी। जहां तक सिख धार्मिक मर्यादाओं और ऐतिहासिक सिख गुरुधामों के प्रबन्ध का संबंध है चाहे इस संबंध में बड़ी ज़िम्मेदारी शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबन्धक कमेटी की ही बनती है परन्तु विगत लम्बी अवधि से यह प्रतिनिधि संस्था अनेक विवादों में फंसी रही है। चाहे इसने अपने क्षेत्र में बड़ी उपलब्धियां और उत्तम कार्य भी पूर्ण किए हैं परन्तु इस संस्था की आंतरिक लड़ाई और इस पर कब्ज़ा जमाये रखने के यत्नों ने इसकी आन और शान को ज्यादा सीमा तक धूमिल भी किया है। विवादों में घिरे रहने के कारण यह अपने कार्य सन्तोषजनक ढंग से निभाने में अनेक बार असमर्थ रही है। इसी क्रम में श्री अकाल तख्त साहिब के समय-समय पर थोपे गए सिंह साहिबान संबंधी उठे विवादों को देखा जा सकता है, जिन्होंने इस उच्च पद को भी अक्सर विवादाग्रस्त बनाए रखा है। पिछले दशकों में जिस तरह और जिस हालात में सिंह साहिबान विचरण करते रहे हैं, उसके संबंध में गम्भीरता से सोचने और विचार करने की ज़रूरत प्रतीत होती है। नि:संदेह शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबन्धक कमेटी और उस पर काबिज़ व्यक्तियों ने भी इस उच्च पद की गरिमा कम की है, और इसे विवादाग्रस्त बनाए रखा है। जिस तरह समय-समय पर सिंह साहिबान के साथ व्यवहार किया जाता रहा है और जिस तरह उन्हें हटाया और थोपा जाता रहा है, उस पर भी अक्सर बड़े विवाद पैदा होते रहे हैं। ऐसी आलोचनात्मक चर्चा आज तक भी जारी है।
2008 के एक्ट अनुसार श्री गुरु ग्रंथ साहिब की प्रकाशना की ज़िम्मेदारी शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबन्धक कमेटी की निर्धारित की गई थी परन्तु वर्ष 2013 से 2015 तक 328 सरूपों के वितरण के विवरण उपलब्ध न होने के कारण इस संबंध में बड़ा विवाद उपजा रहा है, उसका भी अभी तक कोई सन्तोषजनक हल नहीं निकाला जा सका। इससे भी शिरोमणि कमेटी की छवि को भारी आघात पहुंचा है। इसी क्रम में ही मौजूदा ‘आप’ सरकार द्वारा श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी की घटनाएं रोकने के उद्देश्य से पहले 2008 में बनाए गए कानून में किए गए संशोधन के उपरांत पैदा हुए विवाद को देखा जा सकता है। इसी वर्ष 13 अप्रैल को पंजाब विधानसभा में बेअदबी की घटनाओं को रोकने के लिए ‘जागृत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार संशोधन एक्ट-2026’ पारित किया गया था। उस समय भी सरकार द्वारा जल्दबाज़ी में उठाए गए इस कदम संबंधी आपत्ति दर्ज की गई थी और व्यापक स्तर पर इसकी आलोचना भी हुई थी। यह भी कहा गया था कि इस बेहद गम्भीर मामले पर कानून पारित करने से पहले व्यापक स्तर पर सिख संस्थाओं के प्रतिनिधियों के साथ विस्तारपूर्वक विचार-विमर्श नहीं किया गया, ऐसा करना इसलिए ज़रूरी था क्योंकि इसका संबंध श्री गुरु ग्रंथ साहिब से संबंधित बेअदबी की घटनाओं को रोकने के साथ था। चाहे उस समय मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने इस संबंध में उठे एतराज़ के स्वर को दृष्टिविगत करते हुए यह कहा था कि इस नए पारित किए गए कानून में अब किसी तरह का कोई बदलाव नहीं किया जाएगा, परन्तु व्यापक स्तर पर इन किए गए संशोधनों संबंधी एतराज़ होने पर अब पंजाब सरकार को इस पर पुन: विचार करने के लिए विवश होना पड़ रहा है। यदि इस संबंध में पहले ही प्रतिनिधि सिख संस्थाओं के प्रतिनिधियों और सिख विद्वानों के साथ विचार-विमर्श कर लिया जाता तो शायद मौजूदा स्थिति उत्पन्न न होती। सिंह साहिब ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज द्वारा इस संबंध में सरकार में शामिल सिख मंत्रियों और विधायकों के अतिरिक्त अन्य राजनीतिक पार्टियों के सिख विधायकों की 29 जून को श्री अकाल तख्त साहिब सचिवालय में बुलाई गई बैठक में भी 2008 के कानून में किए गए संशोधन संबंधी उठे एतराज़ की ही बात की गई है। सरकार के लिए यह नमोशीजनक बात है कि इस बैठक में ज्यादातर मंत्रियों और विधायकों ने यह माना कि उन्होंने संशोधन एक्ट संबंधी प्रारूप को पढ़ने के बिना पारित करने के लिए अपनी सहमति दे दी थी। इस नए कानून में सिंह साहिब द्वारा जो एतराज़ उठाए गए, उनके संबंध में भी सरकार की ओर से पेश हुए इन प्रतिनिधियों ने कोई सन्तोषजनक उत्तर नहीं दिया।
बाद में विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवा ने यह ज़रूर कहा कि सिंह साहिब द्वारा बुलाई गई बैठक में जो बातचीत हुई है, उस संबंध में श्री अकाल तख्त साहिब की मर्यादा को बनाए रखते हुए प्राप्त होने वाले सुझावों पर विचार किया जाएगा। कैबिनेट मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने भी कहा है कि ‘जागृत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार संशोधन एक्ट-2026’ कानून संबंधी संशोधनों के बारे में श्री अकाल तख्त साहिब सचिवालय में सभी विधायकों की सिंह साहिब द्वारा राय ली गई है। श्री अकाल तख्त साहिब से जो राय पंजाब विधानसभा के स्पीकर के पास आएगी, उस पर विचार किया जाएगा और एक महीने में उस संबंधी फैसला लिया जाएगा। हम सिंह साहिब ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज और उनके साथी सिंह साहिबान की प्रशंसा करते हैं कि उन्होंने बड़े सूझवान ढंग से इस बेहद संवेदनशील और गम्भीर मामले को सुलझाने संबंधी अपना अच्छा योगदान डाला है, जिसकी प्रशंसा की जानी बनती है।
—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

