भारत में पंखों के तीन ब्लेड क्यों होते हैं ?

‘दीदी, हम जो अपने घरों में छत के पंखे इस्तेमाल करते हैं तो उसमें तीन ही ब्लेड होते हैं, जबकि मैंने सुना है कि अमरीका के सीलिंग फैन में चार-पांच ब्लेड होते हैं।’
‘तो तुम भारतीय व अमरीकी पंखों में ब्लेडों की संख्या में अंतर को जानना चाहते हो।’
‘जी।’ 
‘दरअसल, पहले तो यह जान लो कि सीलिंग फैन में लगे ब्लेडों की संख्या उसकी परफॉर्मेंस को तय करने में बड़ी भूमिका निभाती है।’
‘अच्छा।’ 
‘अब भारत और अमरीका के पंखों में ब्लेडों की संख्या में अंतर इसलिए है; क्योंकि दोनों देशों में पंखे का इस्तेमाल अलग-अलग मकसद से किया जाता है।’ 
‘और वह अलग-अलग मकसद क्या हैं?’
‘भारत में साल के ज्यादातर समय मौसम गर्म व उमस भरा रहता है। इस कारण से लोगों को तेज़ हवा के बहाव की ज़रूरत होती है ताकि तुरंत ठंडक महसूस होने लगे। इस उद्देश्य के लिए तीन ब्लेड वाले पंखे सबसे अच्छे होते हैं।’
‘मगर क्यों?’
‘कम ब्लेड होने से मोटर फैन को तेज़ी से घुमाती है। इससे हवा का बहाव नीचे की तरफ ज्यादा तेज़ हो जाता है। हवा का यह केंद्रीय बहाव लोगों को बिना एयर कंडीशनिंग के भी ठंडक महसूस करने में मदद करता है। अत: तीन ब्लेड वाला डिज़ाइन तेज़ रफ्तार से ठंडक देने के लिए सबसे सही माना जाता है।’
‘लेकिन यह ज़रूरत तो अमरीका में भी होती होगी।’
‘अमरीका में अधिकतर घरों में पहले से ही एचवीएसी सिस्टम लगे होते हैं, जो हीटिंग व एयर कंडीशनिंग की सुविधा प्रदान करते हैं। इसलिए सीलिंग फैन का इस्तेमाल आमतौर से कमरे में कंडीशन वाली हवा को फैलाने के लिए किया जाता है न कि तेज़ हवा का बहाव बनाने के लिए। यही कारण है कि अमरीकी पंखों में अक्सर 4 से 5 ब्लेड होते हैं, ज्यादा ब्लेड हवा को धीरे और समान रूप से घुमाते हैं।’
‘इसका मतलब यह हुआ कि ब्लेड की संख्या रफ्तार और हवा के प्रतिरोध पर असर डालती है।’
‘हां, ज्यादा ब्लेड होने से पंखे का वजन और हवा का प्रतिरोध बढ़ जाता है, जिससे घूमने की रफ्तार कम हो जाती है। शोर में फर्क रहता है। तेज़ रफ्तार से चलने वाले पंखे अधिक शोर करते हैं।’
-इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर 

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