पोट्टी श्रीरामुलु कौन थे ?
‘दीदी, आज जब दिल्ली के जंतर मन्तर पर पर्यावरण एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक शिक्षा में सुधारों व जवाबदेही के लिए अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल कर रहे हैं, तो एक नाम बार-बार सुनने को मिल रहा है।’
‘किसका पोट्टी श्रीरामुलु का।’
‘हां, और मैं यह जानना चाहता हूं कि पोट्टी श्रीरामुलु कौन थे?’
‘पोट्टी श्रीरामुलु गांधीवादी, स्वतंत्रता सेनानी और राजनीतिक व सामाजिक सुधारों के लिए संघर्ष करने वाले व्यक्ति थे। इनके बारे में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने कहा था कि ‘अगर मेरे पास पोट्टी श्रीरामुलु जैसे 11 अन्य कार्यकर्ता हो जाएं तो मैं (देश की) आज़ादी एक साल के भीतर हासिल कर लूंगा।’
‘अच्छा! वह इतने कर्मठ कार्यकर्ता थे, कांग्रेस के।’
‘हां। पोट्टी श्रीरामुलु का जन्म 1901 में हुआ था। उन्होंने सेनेटरी इंजीनियरिंग की शिक्षा प्राप्त करने के बाद रेलवे में नौकरी हासिल की। लेकिन 1928 में एक व्यक्तिगत त्रासदी के बाद उनका जीवन बदल गया।’
‘क्यों, क्या हुआ था?’
‘उनकी पत्नी व नवजात शिशु का निधन हो गया था। उन्होंने 1930 में अपने जॉब से इस्तीफा दिया और गांधी जी के नमक सत्यग्रह का हिस्सा बन गये। वह बाद में साबरमती आश्रम में रहने लगे। भारत छोडो आंदोलन में व्यक्तिगत सत्यग्रह के दौरान वह 1940-41 में 18 माह तक जेल में रहे।’
‘तो इसमें सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल के संदर्भ में पोट्टी श्रीरामुलु की चर्चा कैसे हो रही है?’
‘इसकी दो प्रमुख वजह हैं।’
‘क्या क्या?’
‘एक, नवम्बर 1946 में पोट्टी श्रीरामुलु ने यह मांग करते हुए आमरण अनशन आरंभ किया कि मद्रास प्रोविंस, जिसमें आज के तमिलनाडु आंध्रप्रदेश व तेलंगाना शामिल थे, में मंदिरों के द्वार दलितों के लिए खोले जायें। कांग्रेस के नेताओं ने उनसे अपना अनशन खत्म करने का आग्रह किया, लेकिन उन्होंने गांधी जी के हस्तक्षेप के बाद ही अपना अनशन समाप्त किया।’
‘और दूसरा।’
‘अक्तूबर 1952 में पोट्टी श्रीरामुलु ने तेलगु-भाषी लोगों के लिए एक अलग राज्य की मांग करते हुए आमरण अनशन आरंभ किया। तब भारत में भाषा के आधार पर राज्य नहीं थे। सरकार ने उनकी बात नहीं सुनी। हड़ताल के 58वें दिन पोट्टी श्रीरामुलु का निधन हो गया, हंगामा हुआ और सरकार ने आंध्रप्रदेश का गठन किया।’
-इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर



