1950-60 के दशक की मशहूर अभिनेत्री शकीला
शकीला अपने फिल्मों के दिनों में भी बहुत शर्मीली थीं और अपने इस स्वभाव के कारण बहुत कम बात किया करती थीं। इसलिए लोग उन्हें नकचढ़ी समझते थे। फिल्म ‘आगरा रोड’ में नंदा भी उनके साथ काम कर रही थीं। नंदा भी कम बोलने की आदी थीं। फलस्वरूप दोनों शकीला व नंदा एक-दूसरे को नकचढ़ा समझ रहीं थीं। सेट पर दोनों एक-दूसरे से बात तक नहीं करती थीं। फिर एक दिन ऐसा हुआ कि शकीला अपनी कार ड्राइव कर रही थीं, उन्होंने धूप से बचने के लिए स्कार्फ बांधा हुआ था और गोगल्स लगाये हुए थे। पीछे नंदा की कार आ रही थी। नंदा ने अपने ड्राईवर को गाड़ी आगे निकालने के लिए कहा और जैसे ही उनकी गाड़ी आगे निकली तो नंदा ने हाथ के इशारे से शकीला की गाड़ी को रोका और कहा, ‘मैं यह देखना चाहती थी कि कौन खूबसूरत लड़की ड्राइव कर रही है।’ नंदा के इतना कहते ही दोनों के बीच की बर्फ की दीवार गिर गई। नंदा शकीला की कार में आकर बैठ गईं और दोनों वहीदा रहमान के घर चली गईं, जो अकेली रहती थीं। इस प्रकार इन तीनों की गहरी दोस्ती आरम्भ हुई और लड़कियों की इस गैंग में बाद में जबीन, आशा पारिख, साधना आदि भी शामिल हो गईं। हालांकि अब इस गैंग की सिर्फ वहीदा रहमान व आशा पारिख ही ज़िंदा हैं, लेकिन इसमें हेलन के शामिल होने के बाद, जबरदस्त आपसी प्रेम के साथ गैंग चल रहा है।
बहरहाल, यह सब आपस में मिलकर बहुत शरारतें करती थीं। नंदा सबसे ज्यादा शरारती थीं। एक दिन नंदा व शकीला बुकऱ्ा पहनकर वहीदा के घर पहुंचीं और कहा कि वह पाकिस्तान से आयीं हैं और वहीदा जी की फैन हैं। लेकिन ऐसा कहते में वह हंस पड़ीं और वहीदा ने उन्हें पहचानकर अंदर बुला लिया। इस गर्ल गैंग के आपसी प्रेम का अंदाज़ा एक घटना से लगाया जा सकता है कि शकीला ने अपने करियर के शुरुआत में मधुबाला के साथ एक फिल्म ‘अरमान’ की थी। उस फिल्म में वह एक गाने और दो सीन में थीं। गाने की शूटिंग के दौरान उन्हें करना यह था कि मधुबाला के आगे आकर ताली बजानी थी, लेकिन वह जैसे ही आगे आतीं, मधुबाला खिलखिलाकर हंस देतीं, जिससे शकीला ताली बजाना भूल जातीं। ऐसा कई बार हुआ तो शकीला बहुत नर्वस हो गईं, वह शूटिंग छोड़कर घर भागना चाहती थीं। इसके बाद उन्होंने मधुबाला के साथ कभी काम नहीं किया।
इसके अनेक वर्षों बाद मधुबाला ने शकीला को अपने घर अकेले बुलाया। वह जाना नहीं चाहती थीं, लेकिन अपने पीर (धर्म गुरु), जो मधुबाला के भी पीर थे, के कहने पर मिलने चली गईं। मधुबाला सफेद साड़ी में थीं, बीमारी की वजह से उनका रंग भी सफेद पड़ गया था, जिसकी सुंदरता को देखकर सब मंत्रमुग्ध हो जाते थे, उसे इस हाल में देखकर शकीला को बहुत अफसोस हुआ। लेकिन इससे भी ज्यादा दु:ख उस समय हुआ जब मधुबाला ने शकीला से उनकी सबसे अच्छी दोस्त वहीदा पर यह बेबुनियाद आरोप लगाया कि वह उनके पति किशोर कुमार के पीछे पड़ी हुई हैं।
यह सुनकर शकीला लौट गईं और फिर कभी मधुबाला से नहीं मिलीं, हालांकि मरने से पहले मधुबाला ने शकीला को एक बार फिर अपने घर पर आमंत्रित किया था, लेकिन वह नहीं गईं। अगर आपको अभी तक शकीला याद नहीं आयी हैं तो यह सुनिये- ‘बाबूजी धीरे चलना’, ‘सौ बार जन्म लेंगे, सौ बार फना होंगे’, ‘बार-बार देखो, हज़ार बार देखो’, ‘लेके पहला पहला प्यार, भरके आंखों में ख़ुमार’...ऐसे सदाबहार गीतों की एक लम्बी सूची है जिन्हें कोई नहीं भुला सका है और इनकी वजह से वह शोख, चंचल, चुलबुली, सुंदर और स्लिम अदाकारा भी सबको याद है जिन पर यह गाने फिल्माये गये थे।
हालांकि अपने करियर के चरम पर शकीला ने शादी करके फिल्मी दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया था, लेकिन आज भी वह इन गीतों के कारण सिने प्रेमियों के दिलों-दिमाग पर छाई हुई हैं। यह 1963 की बात है, उस साल शकीला की दो ज़बरदस्त हिट फिल्में (चाइना टाउन व उस्तादों के उस्ताद) आयीं थीं और उसी वर्ष उन्होंने एक गैर फिल्मी व्यक्ति से विवाह करने का निर्णय लिया और इंग्लैंड में जाकर बस गईं थीं। इसके बाद वह 20 सितम्बर 2017 को मुंबई में अपने निधन से पहले हर साल कम से कम एक बार अपने मुंबई में मरीन ड्राइव स्थित फ्लैट में आकर ठहरती थीं, लेकिन फिल्मी दुनिया की चकाचौंध से पूर्णत: दूर रहती थीं। वह अपने पीछे एक बेटी छोड़ गई हैं। शकीला का जन्म एक जनवरी 1935 को मुंबई में ही हुआ था। उनके माता-पिता का उनके बचपन में ही निधन हो गया था, जिससे उनकी व उनकी दो बहनों (नूर व नसरीन) की परवरिश की ज़िम्मेदारी उनकी मौसी पर आन पड़ी। मौसी के घर के आर्थिक हालात तंग थे, फिर तीन लड़कियों के अतिरिक्त बोझ ने स्थिति बद से बदतर कर दी। मजबूरन मौसी ने शकीला का बाल कलाकार के रूप में फिल्म ‘दास्तान’ (1949) में परिचय कराया, जिसमें शकीला ने वीना की बेटी की भूमिका अदा की थी।
इस प्रकार शकीला का फिल्मी सफर शुरू हुआ। बतौर बाल कलाकार उन्होंने बहुत सी सफल फिल्में कीं। फिर 1954 में गुरुदत्त ने उन्हें ‘आर पार’ में हीरोइन के रूप में लिया और ‘बाबूजी धीरे चलना’ गीत से वह फिल्मी दुनिया में स्थापित हो गईं, निर्माता उनके घर के चक्कर लगाने लगे। गुरुदत्त के साथ भी उन्होंने अनेक फिल्में कीं जैसे ‘सीआईडी’ आदि। चूंकि गुरुदत्त की फिल्मों का जॉनी वॉकर लाज़मी हिस्सा होते थे, तो शकीला का परिवार उनके भी सम्पर्क में आया और इस तरह शकीला की बहन नूर की शादी जॉनी वॉकर से हुई। शकीला ने अपनी मज़र्ी से ही अपना फिल्मी करियर संक्षिप्त (1949-1963) यानी कुल 14 वर्ष का रखा, लेकिन इस अवधि में भी उन्होंने बहुत कामयाबी हासिल की और दिलीप कुमार को छोड़कर उस ज़माने के सभी बड़े कलाकारों जैसे राज कपूर, देवानंद, अशोक कुमार, प्रदीप कुमार, शम्मी कपूर आदि के साथ काम किया। इसके बावजूद वह अपने फिल्मी करियर पर बात करना पसंद नहीं करती थीं। शकीला अपने फिल्मी करियर को याद नहीं रखना चाहती थीं, इसलिए उनके घर पर उनकी कोई फिल्मी तस्वीर व ट्राफी नहीं रही, लेकिन उनके आज भी प्रशंसक हैं, जो उन्हें भूलना नहीं चाहते।
-इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर




