एक बार फिर विफल हुई नैशनल टैस्टिंग एजैंसी
मेडिकल में दाखिले की नीट-यूजी परीक्षा के पेपर लीक के खिलाफ दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन के बाद तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की चर्चा अभी खत्म भी नहीं हुई कि नैशनल टैस्टिंग एजैंसी (एनटीए) का एक और कारनामा सामने आ गया है। एनटीए द्वारा करवाई गई एक और परीक्षा विफल हो गई है। एजैंसी द्वारा यूजीसी नैट की करवाई परीक्षा के 3 पेपर रद्द करने पड़े, क्योंकि उन तीनों पेपर्स में दर्जनों गलतियां मिली है। अब छात्रों को अंग्रेज़ी कॉमर्स और समाज शास्त्र के पेपर दोबारा देने पड़ेंगे। हैरानी की बात है कि केंद्र सरकार द्वारा परीक्षाओं को निष्पक्ष ढंग से करवाने के लिए बनाई गई राष्ट्रीय टैस्ंिटग एजैंसी द्वारा करवाई जाती प्रत्येक दूसरी परीक्षा में किसी न किसी तरह की गड़बड़ी हो रही है। कहीं परीक्षा केंद्र ‘मैनेज’ हो रहे हैं, कहीं पेपर लीक हो जाते हैं और कहीं एनटीए विशेषज्ञ प्रश्न-पत्र सेट करने में विफल हो रहे हैं। यूजीसी नेट का मामला प्रश्न पत्र तैयार करने में विफलता का है। रद्द हुए तीन पेपरों में तथ्यात्मक गलतियों, टाइपिंग की गलतियों के अतिरिक्त प्रश्न सिलेबस से बाहर थे। दो साल पहले 2024 में जब नीट-यूजी के पेपर लीक हुए थे तब राधाकृष्णन आयोग ने एनटीए में सुधार के कई सुझाव दिए थे। इस साल भी नीट-यूजी पेपर लीक होने के बाद संरचनागत सुधारों की ज़रुरत महसूस हुई है, लेकिन सरकार किसी भी सुधार को जल्दी लागू करती प्रतीत नहीं हो रही।
पीएम फंड को लेकर नए सवाल
आखिरकार पीएम केयर्स फंड की 2024-25 की ऑडिट रिपोर्ट सरकार ने देर से ही सही, लेकिन जारी कर दी है। लेकिन इस रिपोर्ट से कुछ सवालों के जवाब नहीं मिले, जबकि कुछ नए प्रश्न खड़े हो गए हैं। मसलन, क्रियान्वयन करने वाली एजेंसियों ने 324 करोड़ रुपये का रिफंड किया। केंद्र को पारदर्शिता समर्थक लोगों के इस प्रश्न का उत्तर देना चाहिए कि ये एजेंसियां कौन हैं और क्या कार्यन्वयन में हुई गडबड़ियों को छिपाने के लिए उन्होंने धन लौटाया है? फिर यह भी अहम सवाल है कि रिपोर्ट के साथ ऑडिट संबंधी टिप्पणियों को पीएम केयर्स की वेबसाइट पर क्यों नहीं डाला गया है? रिपोर्ट के मुताबिक इस कोष में 8,452 करोड़ रुपये हैं जबकि 2024-25 में सिर्फ 88 लाख रुपये यानी 0.01 प्रतिशत हिस्से का उपयोग सहायता देने के लिए किया गया। 93 फीसदी राशि फिक्स्ड डिपॉजिट में रखी गई है, जिससे कोष को 469 करोड़ रुपये का ब्याज हासिल हुआ। मगर सवाल है कि क्या कोष का घोषित मकसद पैसे से पैसा बनाना है? प्रधानमंत्री राष्ट्रीय आपदा कोष के पहले से मौजूद होने के बावजूद कोरोना महामारी के दौरान नरेन्द्र मोदी सरकार ने एक नया कोष बनाने का विवादास्पद फैसला लिया था। शुरू से ही इसको लेकर पारदर्शिता का अभाव रहा। इसे आरटीआई कानून के दाये से बाहर रखा गया। इस सिलसिले में मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी गया, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दखल देने से इन्कार कर दिया। बहरहाल, अब ऑडिट रिपोर्ट से जो सवाल उठे हैं, उनका सरकार को विस्तार से जवाब देना चाहिए। आखिर यह कोष किस दिन के लिए बचा कर रखा जा रहा है?
भाजपा को अगड़ी जातियों की चिंता
बिहार की बांकीपुर सीट पर भाजपा की हार का बिहार की राजनीति पर चाहे जो असर हो, लेकिन इस नतीजे ने उत्तर प्रदेश में भाजपा को चिंता में डाल दिया है। बिहार के मुकाबले उत्तर प्रदेश में सवर्ण आबादी लगभग दोगुनी है। बिहार में जाति गणना के मुताबिक सिर्फ 10.5 फीसदी सवर्ण है, जबकि उत्तर प्रदेश में यह आबादी करीब 20 फीसदी है। हालांकि अगड़ी जातियों का दावा 25 फीसदी है। इसमें सबसे ज्यादा ब्राह्मण हैं। उत्तर प्रदेश में वैश्य अगड़ी जाति में आते हैं, जबकि बिहार में वे दिवंगत सुशील मोदी की कृपा से पिछड़ी जाति में हैं। भाजपा को अहसास है कि हिंदुत्व की व्यापक लहर अब नहीं है। उसे लग रहा है कि एक तरफ उसके सवर्ण समर्थक नाराज़ हैं और दूसरी ओर उनके आरक्षण विरोध की वजह से पिछड़ी जातियों में भी नाराज़गी हो सकती है, जिसका फायदा समाजवादी पार्टी उठा सकती है। बताया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पिछले दिनों दिल्ली आए तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन से मुलाकात में उन्होंने चुनाव और राजनीतिक स्थितियों को लेकर चर्चा की। हालांकि भाजपा नेता इस आधार पर अपने को तसल्ली दे रहे हैं कि प्रशांत किशोर ब्राह्मण हैं इसलिए बांकीपुर में उन्हें सवर्ण वोट मिल गए। उत्तर प्रदेश में अखिलाश यादव को सवर्ण वोट नहीं मिलेगा।
मनन ने डाला आग में घी
बार कौंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने छात्रों और युवाओं का ठंडा पड़ता गुस्सा और भड़का दिया है। वह पिछले करीब 14 साल से बार कौंसिल के अध्यक्ष हैं। भाजपा ने दो साल पहले बिहार में खाली हुई दो राज्यसभा सीटों में एक पर उप-चुनाव के ज़रिए उनको राज्यसभा में भेजा हुआ है। उन्होंने हैदराबाद की नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी और रिसर्च सेंटर (नलसार)के छात्रों को भड़का दिया। असल में नलसार के छात्रों ने दीक्षांत समारोह में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के हाथों सर्टिफिकेट लेने से मना किया था। मुख्य न्यायाधीश और यूनिवर्सिटी प्रशासन कुछ कहता, उससे पहले ही मनन मिश्रा ने ऐलान कर दिया कि इस बैच के छात्रों का वकील के तौर पर एनरॉलमेंट नहीं होगा। उनके इस आदेश पर ऐसा हंगामा मचा कि उन्हें एक घंटे में ही अपना फैसला वापस लेना पड़ा और माफी मांगनी पड़ी, जिसका छात्रों पर कोई असर नहीं हुआ। उनकी इस दंडात्मक कार्रवाई की घोषणा का नतीजा यह हुआ कि नलसार के छात्रों के साथ ही नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी के छात्रों ने भी मुख्य न्यायाधीश के बहिष्कार का ऐलान कर दिया है। असल में अपने को मुख्य न्यायाधीश और सरकार के प्रति समर्पित दिखाने के लिए मनन मिश्रा ने सबको और मुश्किल में डाल दिया। इसीलिए मुख्य न्यायाधीश ने उन्हें फटकार लगाते हुए साफ शब्दों में कहा कि छात्रों और उनके बीच बोलने वाले वह (मनन) कौन होते हैं। मुख्य न्यायाधीश ने छात्रों के बहिष्कार के अधिकार का समर्थन किया, लेकिन मनन मिश्रा की बातों से छात्र इतने भड़क गए कि मुख्य न्यायाधीश की कोशिश भी सफल होती नहीं दिख रही है।
सोशल मीडिया की सफाई
भारतीय जनता पार्टी के पदाधिकारियों की नई टीम घोषित होने के साथ ही एक कमाल का दिलचस्प घटनाक्रम देखने को मिला। सोशल मीडिया के प्रभारी दीपक म्हस्के और उनके साथ सह प्रभारी बनाए गए चार लोग प्रीति गांधी, शिवानंद द्विवेदी, आलोक भट्ट और अरुण यादव के सोशल मीडिया खाते बंद हो गए। उनकी पहुंच (एक्सेस) समाप्त कर दी गई। सब कयास लगाने लगे कि ऐसा क्या हो गया कि सोशल मीडिया टीम का ही सोशल मीडिया अकाउंट बंद हो गया! दरअसल इन सभी पांच लोगों की कई पुरानी पोस्ट्स बहुत आपत्तिजनक हैं, जिनमें इन लोगों ने नस्ली और लिंग भेद वाली टिप्पणियां की है। यहीं नहीं, महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू के बारे में भी बेहद आपत्तिजनक टिप्पणियां हैं। ऐसी सभी पोस्ट्स की सफाई के लिए इनके अकाउंट्स को डिएक्टिवेट किया गया, लेकिन इन लोगों के यह होशियारी दिखाने से पहले ही कांग्रेस के इकोसिस्टम के लोगों ने इनके पोस्ट्स के स्क्रीन शॉट्स ले लिए थे। अब इन लोगों के उन पुराने पोस्ट्स को सोशल मीडिया में वायरल कराया जा रहा है और भाजपा पर कटाक्ष किए जा रहे हैं। हालांकि पार्टी की ओर से कहा गया है कि कोई नेता पुरानी पोस्ट को लेकर शर्मिंदा होने या माफी मांगने का काम नहीं करेगा। पुरानी बातें अपनी जगह है, लेकिन अब उस तरह की पोस्ट नहीं करने को कहा गया है।





