स्वतंत्रता दिवस की रंगीनियां

स्वतंत्रता दिवस पर जब भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लाल किला की प्रचीर से सशस्त्र नक्सलवाद के खात्म का दावा करते हुए ‘दिमागी नक्सलवाद’ के बारे में अनावश्यक चिन्ता प्रकट कर रहे थे तो स्वर्गीय पत्रकार कुलदीर नैय्यर द्वारा 30 वर्ष पहले स्थापित किया गया संगठन ‘हिन्द-पाक दोस्ती मंच’ तथा उसके सहयोगी संगठन फोकलेर रिसर्च अकादमी तथा साफ्मा वाले अटारी सीमा पर मोमबत्तियां की रौशनी में निम्नलिखित घोषणा पत्र सीमा पर उपस्थित श्रेताओं के साथ सांझा कर रहे थे। 
‘भारत, पाकिस्तान तथा बांग्लादेश के आपसी संबंधों की वर्तमान स्थिति पर गहन चिन्ता व्यक्त करते हुए हम इन देशों की सरकारों को अपील करते हैं कि वे आपसी संबंध सुधारें और विवादित मामलों के समाधान के लिए तुरंत बातचीत आरम्भ करें। आपसी तनाव बढ़ा कर इस क्षेत्र को एक और लम्बे युद्ध की ओर धकेलने से संकोच किया जाए। इसके साथ ही हम पाकिस्तान की सरकार से यह भी मांग करते हैं कि वह किसी भी रूप में भारत विरोधी आतंकवादी संगठनों की मदद न करे। पाकिस्तान की धरती का इस्तेमाल करके ड्रोनों के माध्यम से नशीले पदार्थों तथा अवैध हथियारों की भारत में तस्करी करने वाले तत्वों पर सख्ती से पाबंदी लगाई जाए।’
उन्होंने भारत तथा पाकिस्तान की सरकारों से यह भी मांग की थी कि अटारी एवं वाघा सीमा को व्यापार तथा लोगों के यातायात के लिए पुन: खोला जाए। भारत तथा पाकिस्तान के जो लोग एक-दूसरे देश की यात्रा करना चाहते हैं, उन्हें वीज़ा देने का सिलसिला पुन: शुरू किया जाए। करतारपुर साहिब गलियारा भी सिख श्रद्धालुओं के लिए पुन: खोला जाए ताकि वे वहां जाकर गुरुद्वारा साहिब के दर्शन कर सकें। 
भारत तथा पाकिस्तान के 80वें स्वतंत्रता दिवस के दृष्टिगत आगामी स्वतंत्रता दिवस तक उन लोगों के परिवारों के लिए सुलभ वीज़ा नीति शुरू की जाए, जिन्हें 1947 में सीमा के आर-पार पलायन करना पड़ा था, ताकि वे अपने या अपने बुज़ुर्गों के गांवों एवं शहरों को देख सकें। इससे आपसी संबंध सुधाने में मदद मिल सकती है।
जहां प्रधानमंत्री के संदेश को मीडिया ने लगातार 13वीं बार का सम्बोधन घोषित करके उभारा, वहीं हिन्द-पाक दोस्ती सैमिनार पेश हुए मांगों को अजीत प्रकाशन समूह के कार्यकारी सम्पादक सतनाम सिंह माणक महासचिव हिन्द-पाक दोस्ती ने मेरे साथ स्वयं सांझा किया। मैं चाहता हूं कि जब तक इन मांगों को स्वीकार नहीं किया जाता, ये सिलसिला जारी रहना चाहिए। 
हिन्द-पाक दोस्ती के अतिरिक्त मेरे निज को उल्लास देने वाले समाचार मिले। पहली यह कि मेरे धर्म के बेटे प्रो. अमानत गिल लाहौर ने डेली मनोट टाइम्स के ज़रिये मेरे साथ अपने संबंधों को मानवता के पुल कह कर उम्मीद जताई है कि हमारे जैसे संबंध उन लोगों के लिए नई प्रकाश स्तम्भ बन सकते हैं जो आठ दशक से अंधेरा देखते आए हैं। उसने यह आशा व्यक्त की है कि वह अपने धर्म पिता के चरणों में बैठ कर हिन्दुस्तान से पाकिस्तान की सरकारों का धन्यवाद कर सकेगा। उसे उम्मीद है कि वह पल सिख-मुस्लिम दोस्ती का आनंद लेने योग्य समय बनेगा, जिसे मानवता की बाढ़ कहा जा सकता है।
मेरे निज के लिए यह समाचार भी संतोषजनक है कि स्वतंत्रता दिवस के संबंध में कनाडा से प्रकाशित इन्डो-कैनेडियन टाइम्स ने मेरी 1978 में लिखी कहानी ‘अमर कथा’ प्रकाशित करके अपने पाठकों के साथ देश विभाजन का दुख साझा किया है। यह समाचार मुझे कनाडा में रहती बहन हरभजन कौर ढिल्लों नें मुझे दिया। वह जानती हैं कि जिस पुस्तक में मेरी यह कहानी प्रकाशित हुई थी, जो 1982 में केन्द्रीय साहित्य अकादमी द्वारा उच्चतम घोषित की गई थी। इलैक्ट्रानिक मीडिया ज़िन्दाबाद!
अंतिका 
—शरीफ कुंजाही—
केहे दिलां विच अड़च पये ने
 ते केहीयां पइयां गंढां।
नौहां नालों मास निखेड़िया
 कर कर आडीयां वंडां।
़खैरीं मिहरी वसते रसते
 पता नहीं की वरती।
लहुओं लहु दिनां विच हो गई
 फुल्लां वरगी धरती।
भाइयां नालों भाई ओड़क
वक्खरे हुंदे आये।
इह कोई ऐडी गल्ल नहीं सी
 जिस सियापे पाये।
शाह फरीद होरां दे वरगे
जिस धरती ’ते वसे।
नानक,संत कबीर ने जित्थे
राह मिलापड़े दस्से।
ओथे लूती लाण वालियां
 इंज अज्ज लूती लाई। 
ताणे पेटे वालीयां तंदा
 तूं-तूं नवीं सुणाई।
आपने हत्थीं आपने मुंह’ते
मारन लग पये चंडां।
भाई भाइयां नालों रुस्से 
नंगीयां होइयां कंडां। 

#स्वतंत्रता दिवस की रंगीनियां