सज्जन कुमार का अंजाम

सज्जन कुमार का नाम सुनते ही 1984 में दिल्ली में हुए सिख विरोधी दंगों की याद ताज़ा हो जाती है। इंदिरा गांधी के अंग-रक्षकों बेअंत सिंह और सतवंत सिंह द्वारा उन्हें गोलियां मारने के बाद अगले ही दिन से 4 दिन तक दिल्ली और देश के अनेक स्थानों पर सिख विरोधी दंगे भड़के, जिसमें हज़ारों ही सिखों को निर्ममता से मार दिया गया था, उनके घर और कारोबार को तबाह कर दिया गया था और ज्यादातर स्थानों पर गुरुद्वारों तक को भी नुकसान पहुंचाया गया था। चाहे इसके बाद हुई भयानक तबाही और हिंसा संबंधी इंसाफ के लिए कई आयोग बने, ताकि उस समय घटित घटनाक्रम की पारदर्शी जांच करवाकर आरोपियों को कड़ी सज़ा के भागी बनाया जा सके, परन्तु जितना बड़ा भयानक कृत्य यह घटित हुआ था, उसके मुकाबले में देश की अदालतों द्वारा बेहद कम सज़ाएं ही दी जा सकी हैं। 
केन्द्र में कांग्रेस की सरकार थी, उसने इस पूरे घटनाक्रम के सबूतों को मिटाने में अपना पूरा सरकारी तंत्र उपयोग किया और इस दर्दनाक घटनाक्रम के विरुद्ध इंसाफ के स्वरों को बेहद मद्धम कर दिया। अंतत : प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह को इस संबंध में वर्ष 2005 में देश की संसद में माफी मांगनी पड़ी थी। उन्होंने कहा था कि जो कुछ 1984 में घटित हुआ है, वह हमारे संविधान को नकारता है। मैं अपने देश की ओर से जो कुछ घटित हुआ है, उसके लिए शर्म से सिर झुकाता हूं। चाहे पिछले बनाए जांच आयोगों द्वारा इंसाफ के लिए कोई ज्यादा बात आगे नहीं बढ़ी, परन्तु 2014 में मोदी सरकार के बनते ही एक बार फिर जांच आयोग बनाया गया, जिससे सज्जन कुमार जैसे मुख्य आरोपियों को सज़ा का भागी बनाया गया। और कई आरोपियों के साथ सी.बी.आई. द्वारा लम्बी जांच के बाद उच्च अदालत द्वारा आरोपी ठहराए जाने के बाद 2018 में उसे सज़ा सुनाई थी। चाहे इस सज़ा के बाद उसने वर्ष 2018 में कांग्रेस से त्याग-पत्र दे दिया था परन्तु ज्यादातर कांग्रेसी फिर भी उसका प्रत्येक तरह से पक्ष-पोषण करते रहे। 40 वर्षों से अनेक संगठनों और एच.एस. फूलका जैसे भी इंसाफ के लिए गुहार लगाते अदालतों के चक्कर काटते रहे परन्तु इसके बावजूद सिख मनों में उभरा यह रोष कम नहीं हुआ।
सज्जन कुमार के सामने आए गुनाहों संबंधी उसे फांसी दिए जाने की मांग की जाती रही थी। चाहे सज्जन कुमार की मौत जेल की सज़ा काटते ही हुई है परन्तु इस समाचार ने एक बार फिर पुराने ज़ख्म ज़रूर हरे कर दिए हैं, जिन पर मरहम लगाने की ज़रूरत है। ऐसे समय में पहले अनेक बार कांग्रेसियों ने सार्वजनिक रूप में सज्जन कुमार के साथ-साथ जगदीश टाइटलर और अन्य आरोपियों का किसी न किसी रूप में समर्थन ज़रूर किया है परन्तु अब उसकी मौत के बाद हरियाणा के सांसद दपिन्द्र हुड्डा ने अपने बयान से एक बार फिर ज्यादातर कांग्रेसियों की मानसिकता को उजागर कर दिया है। दपिन्द्र हुड्डा, जोकि हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपिन्द्र हुड्डा के पुत्र हैं, ने सज्जन कुमार संबंधी कहा ‘देश के राजनीतिक दृश्य में ऐसी क्षति हुई है, जिसकी पूर्ति सम्भव नहीं हो सकती, सज्जन कुमार जी न सिर्फ दिल्ली, दिल्ली देहाती, बल्कि पूरे उत्तर भारत की ऐसी शख्सियत थे, जो लोगों के साथ जुड़े हुए थे।  उनकी उदाहरण हमारे पूरे देश में दी जाती है।’
दपिन्द्र हुड्डा कांग्रेस के एक महत्त्वपूर्ण और वरिष्ठ नेता हैं, उनके इस बयान का एक बार फिर जवाब कांग्रेस नेतृत्व को देना होगा कि एक इंसानियत से गिरे हुए कातिल व्यक्ति, जिसे विभिन्न अदालतों ने बड़ी सज़ाएं देने की घोषणा की हो, को किस तरह उचित ठहराने का यत्न किया जा सकता है। नि:संदेह सज्जन कुमार को उस समय दिल्ली और देश में घटित निर्ममता की एक उभरती उदाहरण कहा जा सकता है।

—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

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