उच्च् स्तरीय जांच समिति का गठन
2026 नीट पेपर लीक के मामले को लेकर नई दिल्ली के जंतर-मंतर में 6 जून को कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा धरना शुरू किया गया था, जो लगभग डेढ़ माह तक चला था। इसने देश भर के युवाओं का ध्यान आकर्षित किया और इसमें और कई विद्यार्थी संगठन भी शामिल हो गए, जिनमें वामपंथी संगठन ऑल इंडिया स्टूडैंट फैडरेशन, ऑल इंडिया स्टूडैंट एसोसिएशन और स्टूडैंट फैडरेशन ऑफ इंडिया के युवा भी शामिल हुए। वे नीट परीक्षा में अनियमितताएं होने के कारण केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान का त्याग-पत्र मांग रहे थे। कॉकरोच जनता पार्टी मई, 2026 को डिजिटल मीडिया द्वारा बनी थी। अभिजीत दीपके नामक युवक ने इस संबंध में राजनीतिक व्यंग्य के रूप में एक पोस्ट डाली थी। जिसमें भारत के चीफ जस्टिस सूर्यकांत की युवाओं को कॉकरोच कहने संबंधी टिप्पणी के विरुद्ध प्रतिक्रिया प्रकट की गई थी।
इस पोस्ट के बाद लाखों ही युवाओं ने इसके प्रति समर्थन दिया। चाहे चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने बाद में इस टिप्पणी संबंधी यह बयान दिया था कि कॉकरोच वाली टिप्पणी तो उन्होंने उन वकीलों संबंधी की थी, जो ज्यादातर फर्जी डिग्री के आधार पर पिछले दरवाज़े से इस पेशे में आए हैं। उन्होंने बेरोज़गार युवाओं की तुलना कॉकरोच से नहीं की थी परन्तु इस टिप्पणी को युवा वर्ग के एक बड़े भाग ने समूचे बेरोज़गार युवाओं संबंधी की गई टिप्पणी मान लिया। इस रोष स्वरूप ही कॉकरोच जनता पार्टी का गठन हुआ। इसे भारी समर्थन इसलिए मिला था, क्योंकि ज़मीनी स्तर पर आज करोड़ों युवा बेरोज़गारी के आलम में विचरण कर रहे हैं। इस नई पार्टी को भारी समर्थन फैली इस निराशा के कारण ही मिला है। आज के युवाओं की अनिश्चितता वाली स्थिति का यह रोष प्रकटावा प्रतिनिधित्व करता है। धर्मेन्द्र प्रधान के त्याग-पत्र को लेकर लगा यह धरना 20 जुलाई को उस समय बड़े हंगामे में बदल गया जब इन युवाओं ने 20 जुलाई को चल रहे संसद सत्र के दौरान संसद भवन की ओर जाने की घोषणा कर दी थी। मोदी सरकार के विरुद्ध 30,000 से भी अधिक युवाओं का यह रोष मार्च सरकार के समूचे कार्यकाल में सबसे बड़ा कहा जा सकता है। संसद की ओर जाने के लिए बज़िद युवाओं और पुलिस के बीच बड़ी झड़पें हुईं, जिनमें सैकड़ों ही पुलिस कर्मचारी और युवा घायल हुए।
इस संबंध में उच्च अदालत में कई याचिकाएं भी दायर की गईं। मंगलवार को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा विद्यार्थियों के विरोध प्रदर्शन से जुड़े गम्भीर मुद्दों और आरोपों की स्वतंत्र जांच के लिए एक सर्वोच्च स्तरीय समिति के गठन की घोषणा की गई है, जिसमें एक पूर्व सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जज शामिल होंगे। एक सेवानिवृत्त डी.जी.पी. स्तर के अधिकारी भी इसमें शामिल होंगे और एक पूर्व सी.बी.आई. के निदेशक भी समिति का हिस्सा होंगे। यह समिति पूरी पारदर्शिता से पिछले समूचे घटनाक्रम की जांच-पड़ताल करेगी। इसलिए सी.सी.टी.वी. फुटेज और संबंधित सभी शिकायतों की भी विस्तारपूर्वक जांच की जाएगी। इस संबंध में दिल्ली पुलिस ने हलफनामा दायर करते हुए अधिक बल प्रयोग करने के आरोपों को नकारा है और कहा है कि प्रदर्शन शुरू में शांतिपूर्ण था, परन्तु भीड़ के एक हिस्से द्वारा बैरीकेडों की कई परतें खोल कर संसद की ओर बढ़ने का यत्न करने के बाद स्थिति अनियंत्रित हो गई। इसके बाद पुलिस को चरणबद्ध ढंग से बल प्रयोग करना पड़ा। विगत अवधि से इस घटनाक्रम संबंधी विभिन्न प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कांग्रेस और अन्य विपक्षी पार्टियां भी इस मामले पर सरकार की तीव्र आलोचना कर रही हैं परन्तु एक निश्चित समय में पारदर्शी ढंग से सामने आई उक्त समिति की रिपोर्ट इस घटनाक्रम के संबंध में उचित समाधान करने में सहायक हो सकती है, जिसके आधार पर ही किसी स्पष्ट परिणाम पर पहुंचने की संभावना बन सकेगी।
—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

