आगामी चुनावों के लिए भाजपा की नई कार्यकारिणी 

किसी राजनीतिक दल की नई कार्यकारिणी सिर्फ पदों और चेहरों की सूचीभर नहीं होती, यह उसके भविष्य की राजनीति का भी अपने में एक नक्शा लिए होती है। भाजपा की 65 सदस्यीय कार्यकारिणी में 51 नये चेहरे हैं, इसे इसी नज़र से देखना चाहिए। भाजपा की यह कार्यकारिणी अपेक्षाकृत नये चेहरों से सजी हुई है। इसलिए यह सिर्फ संगठनात्मक बदलाव नहीं है, यह देश की फिलहाल सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी की अगली पीढ़ी तैयार करने की मजबूत रूपरेखा का हिस्सा है। पिछले डेढ़ दशक में नरेन्द्र मोदी व अमित शाह की जोड़ी ने अपने इर्दगिर्द भाजपा की जो सबसे शक्तिशाली चुनावी मशीनरी खड़ी की है, अब उसके लिए सिर्फ अगले चुनाव को जीतनेभर की जिम्मेदारी नहीं है बल्कि अगले चुनाव जिताने वाली मशीनरी के भी नवीनीकरण की जिम्मेदारी है। शायद इस लंबी चौड़ी कार्यकारिणी में नये-पुराने सदस्यों का मिश्रण इसी का संकेत देता है। क्याेंकि पिछले डेढ़ दशकों में भाजपा ने राजनीतिक ऊर्जा, संगठनात्मक पकड़ और चुनावी क्षमताओं की जो मिसाल पेश की है, वह असाधारण है। 
इसलिए भाजपा के अपेक्षाकृत नये अध्यक्ष नितिन नबीन के लिए चुनावी जीत के संदर्भ में बड़ी लकीर खींचने के लिए बहुत ज्यादा उद्यम की ज़रूरत होगी। इसीलिए गुजरे 17 अगस्त, 2026 को भाजपा ने जो अपनी पार्टी के राष्ट्रीय पदाधिकारियों की टीम घोषित की है, उसमें 6 सदस्य 40 वर्ष से कम उम्र के हैं, 15 सदस्य 40 से 49 साल की उम्र के हैं और 21 सदस्य 50 से 59 साल की आयु के हैं। टीम में 12 महिलाएं, 6 अल्पसंख्यक समुदायों से आने वाले सदस्य भी हैं। पार्टी का यह पुनर्गठन 2026 से 2029 के बीच होने वाली विधानसभा चुनाव और फिर अगले लोकसभा चुनाव की तैयारियों को ध्यान में रखकर किया गया है और ध्यान की इस रूपरेखा में जिस प्रदेश को लेकर सबसे ज्यादा ध्यान दिया गया है, वह उत्तर प्रदेश है, जहां अगले वर्ष यानी 2027 में विधानसभा चुनाव होना है। शायद इसलिए नई राष्ट्रीय टीम में 8 सदस्य उत्तर प्रदेश से शामिल किये गये हैं। विशेष बात यह है कि जिन 2 राष्ट्रीय उपाध्यक्षों को उत्तर प्रदेश से कार्यकारिणी में जगह दी गई है, उनमें से एक महिला वर्ग से दूसरा अल्पसंख्यक वर्ग से है।
सांसद रेखा वर्मा को महिला वर्ग से तथा तारिक मंसूर को अल्पसंख्यक वर्ग से भाजपा की इस नई कार्यकारिणी में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पद दिये गये हैं। जाहिर है इन दोनों के बनाये जाने का लक्ष्य महिलाओं और अल्पसंख्यकों के मतों को आकर्षित करना है। सांसद रेखा वर्मा और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति तारिक मंसूर हालांकि जमीनी नेता नहीं हैं, लेकिन पार्टियां मानकर चलती हैं कि किसी समुदाय का नेता अपने समुदाय के वोट आकर्षित करता है। उत्तर प्रदेश से कई अन्य नेताओं को भी इस कार्यकारिणी में जगह मिली है, जिसमें एक और चर्चित नाम स्मृति ईरानी का है, जिन्हें राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया है। जबकि दूसरे राष्ट्रीय महासचिव जो उत्तर प्रदेश से आएंगे वो हरीश द्विवेदी हैं। इसके अलावा डॉ. भोला सिंह को राष्ट्रीय सचिव, अमरपाल मौर्य को ओबीसी मोर्चा का अध्यक्ष, कुवंर वासित अली को अल्पसंख्यक मोर्चा का अध्यक्ष तथा संगीता यादव को भी राष्ट्रीय सचिव बनाया गया है। भाजपा की इस नई टीम में सबसे ज्यादा सदस्य दिल्ली से लिए गये हैं, जो कि 10 हैं। 
दूसरे नंबर पर 8 सदस्य उत्तर प्रदेश है, तीसरे नंबर पर 6 सदस्यों के साथ मध्य प्रदेश, चौथे नंबर पर 5 सदस्यों के साथ महाराष्ट्र, 5वे नंबर 4-4 सदस्यों के साथ राजस्थान, गुजरात और उत्तराखंड हैं। जबकि बिहार से कार्यकारिणी में 3 और पंजाब, ओड़ीसा, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, केरल, छत्तीसगढ़ और हरियाणा से 2-2 सदस्य इस कार्यकारिणी में हैं। जबकि 6 राज्यों और 1 केन्द्र शासित प्रदेश जिसमें त्रिपुरा, चंडीगढ़, झारखंड, कर्नाटक, तमिलनाडु, नागालैंड और असम इन सभी प्रदेशों से एक-एक सदस्य को भाजपा की केंद्रीय कार्यकारिणी में जगह मिली है। भाजपा ने अपनी नई कार्यकारिणी में 12 महिलाआें को जगह देकर, हालांकि महिलाओं को घोषित 33 प्रतिशत की हिस्सेदारी अपनी कार्यकारिणी में तो नहीं दी, लेकिन 18.5 प्रतिशत की यह हिस्सेदारी पहले से काफी ज्यादा है। 
बहरहाल भाजपा ने 65 सदस्यों की जो नई कार्यकारिणी चुनी है, उसमें से सिर्फ 14 पुराने चेहरे ही रिपीट हुए हैं। जिन 13 राष्ट्रीय उपाध्यक्षों में 5 को रिपीट किया गया है, उनमें वंसुधरा राजे सिंधिया, बैजयंत पांडा, रेखा वर्मा, लाल सिंह आर्य (हालांकि पद बदला) और तारिक मंसूर को ही रिपीट किया गया है। इसी तरह राष्ट्रीय महासचिव पद में भी जो 8 सदस्य है, उनमें सिर्फ दो विनोद तावड़े और सुनील बंसल को ही रिपीट किया गया है। इसी तरह 16 राष्ट्रीय सचिवों में सिर्फ अनिल एंटनी तथा संगठन के तीनों पदों में जिन्हें रिपीट किया गया है, वो हैं बीएल संतोष, शिव प्रकाश तथा सौदान सिंह हैं। लेकिन सौदान सिंह का भी पद बदल दिया गया है। कोषाध्यक्ष दो बनाये गये हैं और दोनों ही नये हैं एक है पीयूष गोयल और दूसरे हैं राजेश मंगल। सोशल मीडिया में कोई भी पुराना पदाधिकारी रिपीट नहीं किया गया है। हां, मीडिया प्रभारी पद के 4 सदस्यों में से एक अनिल बलूनी को ज़रूर रिपीट किया गया है। इसी तरह मोर्चा अध्यक्ष सात बनाये गये हैं और उनमें से कोई रिपीट नहीं हुआ। जबकि कार्यालय तथा अन्य जिम्मेदारियों के जिन सात पदाधिकारियों को चुना गया है, उनमें से दो- तरुण चुघ तथा ऋतुराज सिन्हा को रिपीट किया है, लेकिन इन दोनों के पद बदल दिये गये हैं। इस नई टीम में सबसे महत्वपूर्ण नियुक्ति स्मृति ईरानी की है, जिन्हें उत्तर प्रदेश का राष्ट्रीय प्रभारी महासचिव बनाया गया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री ईरानी की राजनीतिक पहचान राष्ट्रीय स्तर की है और अमेठी से उनका पुराना संबंध भी उत्तर प्रदेश राजनीति में उन्हें विशिष्ट बनाता है। ऐसे में उनकी जिम्मदारी सीधे 2027 के विधानसभा चुनावों की संगठनात्मक तैयारी से जुड़ती है। ऐसे में भाजपा के सामने बड़ी चुनौती यह है कि वह अपने पारंपरिक सामाजिक आधार को बनाये रखते हुए गैर- यादव, पिछड़ों, दलितों और मुस्लिम समुदाय के कुछ हिस्सों तक अपनी पहुंच बनाएं यह उस पर चुनावों के बहुत पहले से ही दबाव है। 
भाजपा ने पहली बार पसमांदा मुसलमानों तक अपनी पकड़ बनाने के लिए स्पष्ट रणनीति जारी कर दी है। इसलिए प्रोफेसर तारिक मंसूर को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाये रखा गया है और पश्चिम उत्तर प्रदेश के कुंवर वासित अली को भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया है, जो महत्वपूर्ण संकेत देता है। जहां तक तारिक मंसूर का सवाल है तो अलीगढ़ विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति हैं और उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य भी हैं। इसलिए उनकी भूमिका केवल चुनावी कार्यकर्ता की नहीं बल्कि शिक्षित मुस्लिम वर्ग और संस्थागत सामाजिक संपर्क के लिहाज से भी इस नियुक्ति को देखा जा रहा है।  हालांकि 2027 के उत्तर प्रदेश चुनाव में यह रणनीति कितनी प्रभावी रहेगी, इसका फैसला आगामी चुनावी आंकड़े नहीं करेंगे बल्कि यह बात करेगी कि आखिर भाजपा उत्तर प्रदेश में मुस्लिमों के बीच अपनी कितनी घुसपैठ बना पाने में सफल रही है।
-इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर 

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