धान की भरपूर फसल होने की सम्भावना

पंजाब कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के निदेशक डॉ. गुरजीत सिंह बराड़ के अनुसार इस वर्ष धान की भरपूर फसल होने की सम्भावना है। कृषि विभाग द्वारा किया गया सर्वेक्षण दर्शाता है कि धान और बासमती की फसल बहुत आशाजनक खड़ी है। बारिश चाहे कुछ देरी से हुई, परन्तु ट्यूबवेलों को प्रतिदिन लगातार आठ घंटे बिजली मिलने और अपेक्षित बारिश होने से फसल अच्छी हो गई। धान और बासमती का रकबा भी बढ़ कर 32.76 लाख हेक्टेयर से बढ़ कर 32.78 लाख हेक्टेयर के पास आ गया (क्योंकि कई स्थानों पर देरी से 10 अगस्त तक भी किसान पूसा बासमती 1509 किस्म लगाते रहे)। गत वर्ष धान-बासमती की काश्त के अधीन 32.43 लाख हेक्टेयर रकबा था। इस वर्ष दोनों के रकबे में वृद्धि हुई है। धान 25.90 लाख हेक्टेयर और बासमती लगभग 7 लाख हेक्टेयर में बोई गई। आईसीएआर-इंडियन एग्रीकल्चरल रिसर्च इंस्टीच्यूट के निदेशक डॉ. सी.एच. श्रीनिवासा राव कहते हैं कि बासमती की किस्म पूसा बासमती-1509 जो निर्यात की जाती है और पकने में कम समय लेती है, कभी बार तो यह किस्म मानसून के पानी से ही पक जाती है, विभिन्नता के पक्ष से यह बेहतर किस्म सिद्ध हो रही है।
धान की काश्त बढ़ने से और कपास-नरमा, मक्का का रकबा कम होने से फसली विभिन्ता संबंधी नकारात्मक रूझान दिखाई दे रहा है। धान की काश्त का रकबा कम करने के सरकार द्वारा किए गए सभी यत्न विफल रहे। प्रसिद्ध कृषि और अर्थ-शास्त्र वैज्ञानिक डॉ. सरदारा सिंह जौहल और जी.एस. खुश के धान का रकबा 10 लाख हेक्टेयर कम करने के परामर्श भी सफल नहीं हुए। भविष्य में भी धान की काश्त का रकबा कम होने की कोई सम्भावना दिखाई नहीं देती जब तक कि पीएयू और अन्य अनुसंधान संस्थानों द्वारा ऐसी वैकल्पिक फसलें उपलब्ध नहीं की जातीं, जो धान जितना मुनाफा दे सकें। केन्द्र सरकार द्वारा बांस की काश्त को जंगल की बजाय कृषि की फसल नोटिफाई करने के बाद पंजाब सरकार ने 350 हेक्टेयर रकबा बांस की काश्त के अधीन लाने की योजनाबंदी की है। इसके लिए केन्द्र ने पंजाब को 3.5 करोड़ रुपये की मदद दी है। पंजाब सरकार ने पंचायतों की शामलात ज़मीनें कृषि एवं किसान कल्याण विभाग को सौंप कर बांस की नर्सरियां स्थापित करने और काश्त करवाने के लिए कदम उठाए हैं। जिन पर पूरा खर्च सरकार द्वारा किया जाएगा तथा मुनाफा पंचायतों के पास पहुंचेगा। इसके अतिरिक्त कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा मूंगफली की काश्त करवाने की योजना बनाई गई है, जिसके लिए किसानों को 500 क्ंिवटल बीज दिए जाएंगे। अरहर और तिलहन की फसलों पर भी ज़ोर दिया जाएगा। कुछ रकबा फलों और सब्ज़ियों की काश्त के अधीन बढ़ाने के लिए कदम उठाए जाएंगे। हालांकि विशेषज्ञों के अनुसार यह पूरी योजना धान की तेज़ी से बढ़ रही काश्त को तब तक नहीं रोक सकेगी, जब तक वैकल्पिक लाभदायक फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य, सरकारी खरीद आदि की सुविधाएं उपलब्ध नहीं की जातीं।   बासमती की विदेशों और घरेलू मंडी में बढ़ रही मांग के कारण कुछ रकबा बासमती की काश्त के अधीन बढ़ने की सम्भावना है। अभी भी उत्तर प्रदेश में पूसा बासमती 1509 किस्म हरियाणा की मंडियों में आकर 3700 से 4000 रुपये प्रति क्ंिवटल तक बिक रही है। जैसे पंजाब में पंजाब प्रीज़र्वेशन ऑफ सब-स्वाइल वाटर एक्ट-2009 लागू है और मध्य जून से पहले धान की काश्त नहीं हो सकती, परन्तु उत्तर प्रदेश ऐसी कोई रोक नहीं, वहां के किसान पूसा बासमती-1509 किस्म की खरीफ के मौसम में दो फसलें लेकर अधिक मुनाफा कमा रहे हैं। किसानों का तीन फसली चक्र की ओर रूझान बढ़ रहा है। पंजाब में भू-जल स्तर अब बहुत तेज़ी से नीचे नहीं जा रहा, जैसे कुछ समय पहले नीचे जा रहा था। फिर पंजाब सरकार धान की सीधी बिजाई (डीएसआर) का रकबा भी बढ़ा रही है, जिससे पानी की बचत हुई है। एक अनुमान के अनुसार इस वर्ष धान व बासमती का रिकार्ड उत्पादन होने की सम्भावना है, जिस कारण इसके भंडारण और मंडीकरण में दिक्कतों आ सकती हैं। इस समय गत वर्ष के 20 प्रतिशत उत्पादन की छंटाई नहीं हुई जो मिलों और सरकारी गोदामों में पड़ा है। केन्द्र सरकार ने आश्वासन दिया है गोदामों में पड़ा चावल इस सीज़न की पैदावार आने से पहले दूसरे राज्यों को भेज दिया जाएगा। 
पिछले सीज़न में 156 लाख टन धान की सरकारी खरीद की गई थी, जो इस वर्ष 180 लाख टन तक बढ़ने की उम्मीद है। इसके बावजूद किसानों के चेहरे मुस्कुरा रहे हैं और उन्हें मंडीकरण एवं भंडारण में कोई मुश्किल आने की सम्भावना नहीं प्रतीत होती, क्योंकि आगे पंजाब विधानसभा के चुनाव आ रहे हैं और इस संबंधी पंजाब एवं केन्द्र सरकार दोनों किसानों को खुश करने का पूरा यत्न करेंगी।

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