बदइंतजामी : आस्था की कीमत जीवन देकर चुकाते श्रद्धालु 

देश भर के धार्मिक तीर्थ स्थलों मंदिरों पर बदइंतजामी चरम पर है कमोवेश सभी जगह एक सी हालत है कुप्रबंध का फायदा उठा कर व्यवस्था में लगे सेवादार सुविधा शुल्क लेकर अपनी जेब भरते हैं और चोर रास्ते से लाइन तोड़ कर दर्शन कराते हैं जबकि आम श्रद्धालु घंटों भूख प्यास सह कर भी लाइन में लगकर अपनी बारी का इंतजार करता है। अधिकांश बड़े मंदिरों पर तो बाकायदा पैसे देकर वीआईपी दर्शन की सुविधा को ही वैधता दे दी गई है। बहरहाल इस सब बदइंतजामी के चलते अब आस्था का मोल श्रद्धालु अपनी जान देकर चुकाने को मजबूर हैं श्रावण मास का तीसरा सोमवार 17 अगस्त 2026 श्रद्धालुओं के जीवन पर भारी पड़ गया। इस दिन विभिन्न राज्यों में धार्मिक स्थलों पर हुई भगदड़ और हादसों में कुल 27 लोगों की मौत हो गई। बिहार के लखीसराय स्थित अशोकधाम मंदिर में भगदड़ से 7 श्रद्धालुओं की जान चली गई, जबकि कई अन्य हादसों में कम से कम बीस जान गयीं हैं जबकि हताहतों की तादाद सैकड़ों की संख्या में है। दरअसल यह हादसों की पहली बार नहीं है हिन्दू धर्म स्थानों पर कुप्रबंध अव्यवस्था रखरखाव में गड़बड़ी संकीर्ण गलियारे और श्रद्धालुओं की बढ़ती तादाद असंयमित व्यवहार के साथ ही अफवाहों की साजिशें हर पर्व त्योहार दर्शन स्नान मेलों में हादसों की श्रृंखला बना रहे हैं। 
आपको बता दें कि बिहार के अशोकधाम मंदिर में सावन के तीसरे सोमवार पर जलाभिषेक के दौरान बिजली का खंभा गिरने और अफवाह फैलने से मची भगदड़ में 7 श्रद्धालुओं की मौत और 19 से अधिक घायल हुए। वहीं मध्यप्रदेश में उज्जैन के महाकाल मंदिर सहित चार राज्यों में विभिन्न हादसों और भीड़ के दबाव के कारण कुल 27 लोगों की जान चली गई। अभी दो माह पहले ही महाराष्ट्र के परभणी ज़िले की मानवत तहसील स्थित यशवाड़ी मारुति मंदिर में शनिवार को हुआ दर्दनाक हादसा पूरे देश को झकझोर दिया। मंदिर परिसर के सामने बना सभा मंडप अचानक भरभराकर गिर पड़ा, जिसके कारण कई श्रद्धालु मलबे में दब गए इसमें 6 लोगों की मौत हो गई थी। 
आपको याद होगा कि महाकुंभ मेला, प्रयागराज जनवरी 2025 मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर संगम में पवित्र स्नान के लिए लाखों श्रद्धालु एकत्र हुए थे। अखाड़ा मार्ग पर तीर्थयात्रियों के अत्यधिक दबाव से अचानक बैरिकेड्स ढह गए। इस दर्दनाक हादसे में 30 से अधिक लोगों की मौत हुई और 60 से ज्यादा घायल हुए। इसी तरह तिरुमाला वेंकटेश्वर मंदिर, आंध्रप्रदेश में जनवरी 2025 में वैकुंठ एकादशी त्योहार के दौरान वीआईपी और सामान्य दर्शन टिकट लेने के लिए हजारों श्रद्धालुओं के बीच धक्का-मुक्की शुरू हुई। इस भीड़ के अनियंत्रित होने से मची भगदड़ में 6 श्रद्धालुओं की मौत हुई और 20 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए। वहीं हाथरस सत्संग, उत्तर प्रदेश 2 जुलाई 2024 को एक धार्मिक आयोजन में बरती गयी लापरवाही सैकड़ों श्रद्धालुओं की जान ले गयी। यह हाल के वर्षों की सबसे भीषण घटनाओं में से एक है। क्षमता से तीन गुना अधिक यानी करीब 2.5 लाख लोग एक अस्थायी टेंट में जमा हो गए थे। बाबा के जाने के बाद धूल छूने की होड़ और अत्यधिक गर्मी व उमस के कारण मची भगदड़ में 121 लोगों की मौत हो गई। 
माता वैष्णो देवी भवन जनवरी 2022 को नए साल के मौके पर जम्मू-कश्मीर के कटरा में स्थित वैष्णो देवी मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच हुई रेलमपेल में 12 लोगों की जान चली गई थी। रतनगढ़ माता मंदिर, दतिया मध्यप्रदेश में अक्तूबर 2013 नवरात्रि के दौरान मंदिर की ओर जा रहे श्रद्धालुओं के बीच पुल टूटने की अफवाह उड़ी, जिससे मची भगदड़ में 89 लोगों की मौत हुई थी। छठ घाट पर नवंबर 2012 में बिहार की राजधानी पटना में छठ पर्व के दौरान नदी घाट पर अचानक मची अफरा-तफरी के कारण 20 श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी। नैना देवी मंदिर, हिमाचल प्रदेश में अगस्त 2008 भूस्खलन और चट्टानें गिरने की झूठी अफवाह के बाद फैली दहशत से 162 से अधिक श्रद्धालुओं की कुचलकर मौत हो गई थी। चामुंडा देवी मंदिर, जोधपुर में सितंबर 2008 नवरात्रि के दौरान मंदिर परिसर में बम होने की अफवाह फैलने से मची भयंकर भगदड़ में करीब 250 लोगों की जान चली गई थी। सबरीमाला, केरल जनवरी 2011 मकरज्योति के दर्शन कर लौट रहे श्रद्धालुओं के बीच वाहन दुर्घटना के बाद मची भगदड़ में 104 से अधिक तीर्थयात्रियों की मौत हुई थी। मंधारदेवी मंदिर, महाराष्ट्र जनवरी 2005 में वार्षिक यात्रा के दौरान नारियल के पानी से सीढ़ियां फिसलनी होने के कारण लोग गिरते गए, जिसमें 340 से अधिक श्रद्धालु मारे गए थे।
पिछले दिनों यूपी के वृन्दावन में इस्कॉन मंदिर के गेट पर नगर निगम द्वारा लगाए गए शॉवर कूलर में अचानक करंट उतर आया। इसकी चपेट में आने से एक 21 वर्षीय श्रद्धालु की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। राजस्थान के खाटू श्याम मंदिर में उमड़ने वाली भारी भीड़, कुप्रबंधन और उचित कतारें न होने के कारण अक्सर भगदड़ और विवाद जैसी स्थितियां सामने आती है। प्रत्येक घटना के बाद केवल शोक व्यक्त करना पर्याप्त नहीं होगा। आवश्यक है कि राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन इन हादसों की निष्पक्ष जांच कराएं और इन तमाम हादसों के पीछे के तमाम कारणों का विश्लेषण कर जिम्मेदार दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।

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