पुन: स्थापित हो आकाशवाणी और दूरदर्शन की प्रतिष्ठा
देश में रंगीन टेलीविजन प्रसारण शुरू होने के बाद दूरदर्शन और आकाशवाणी (ऑल इंडिया रेडियो) की लोकप्रियता में भारी गिरावट आने से निजी समाचार चैनलों का प्रभाव बेहद बढ़ गया है। सभी निजी समाचार चैनल दिन की एक चर्चित खबर को प्रसारित करते रहते हैं, जबकि राष्ट्रीय महत्व और व्यापक जनहित से जुड़े महत्वपूर्ण समाचारों की उपेक्षा कर दी जाती है। सभी टीवी चैनलों (निजी तथा दूरदर्शन) के लिए एक समाचार बुलेटिन प्रसारित करने के बाद दिन के मुख्य समाचार पर विश्लेषणात्मक टिप्पणी अनिवार्य कर देनी चाहिए। हिन्दी समाचार बुलेटिनों के लिए यह प्रसारण रात्रि 8:30 बजे से 9:00 बजे तक तथा अंग्रेज़ी समाचार बुलेटिनों के लिए रात 9:00 बजे से 9:30 बजे तक होना चाहिए। इसके लिए वर्तमान समय में थोड़ा परिवर्तन किया जाए ताकि ‘सामयिकी’ मुख्य हिन्दी समाचार बुलेटिन के तुरंत बाद आए, जैसे ‘स्पॉटलाइट’ वर्तमान में अंग्रेज़ी न्यूज़ बुलेटिन के बाद प्रमुख स्थान रखता है। इसके अतिरिक्त उर्दू समाचार बुलेटिन को अन्य क्षेत्रीय भाषाओं के समाचार बुलेटिनों के साथ प्रसारित किया जाए।
आकाशवाणी के अन्य समाचार बुलेटिनों के समय में परिवर्तन करके इन्हें हिन्दी और अंग्रेज़ी समाचार बुलेटिन से पहले प्रसारित किया जाए। प्रात: 8:00 बजे हिन्दी समाचार के बाद पांच मिनट का ‘समाचार पत्रों की टिप्पणियां’ कार्यक्रम हो, फिर सुबह 8:15 बजे अंग्रेज़ी समाचार तथा 8:30 बजे क्षेत्रीय भाषाओं के समाचार प्रसारित हों।
दो नाम क्यों : यह समझ से परे है कि जिस संस्थान का आधिकारिक हिन्दी नाम ‘आकाशवाणी’ है, उसके लिए ‘ऑल इंडिया रेडियो’ और ‘आकाशवाणी’ जैसे दो अलग-अलग नाम क्यों प्रचलित हैं। यह सर्वविदित है कि व्यक्तिवाचक संज्ञाओं का अनुवाद नहीं किया जाता। इसलिए उचित होगा कि ब्रिटिश काल में दिए गए ‘ऑल इंडिया रेडियो’ नाम की बजाय अब स्वायत्त सरकारी प्रसारक को केवल ‘आकाशवाणी’ के नाम से जाना जाए, जैसे ‘प्रसार भारती’ और ‘दूरदर्शन’ को अंग्रेज़ी एवं अन्य भाषाओं में अपने हिन्दी नामों से जाना जाता है।
अहम ऑडियो रिकार्डिंग्स कहां हैं : यह अत्यंत खेदजनक है कि प्रसार भारती राष्ट्रीय अभिलेखागार ने केन्द्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के आदेश के बाद पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना के भाषण की ऑडियो रिकार्डिंग तो उपलब्ध करवा दी, लेकिन विश्व प्रसिद्ध हिन्दी समाचार वाचक देवकी नंदन पांडे द्वारा पढ़े गए महत्वपूर्ण समाचार बुलेटिनों की रिकार्डिंग्स सुरक्षित नहीं रखीं। पांडे इतने प्रतिष्ठित समाचार वाचक थे कि आकाशवाणी से सेवानिवृत्त होने के बाद भी उन्हें संजय गांधी की मौत का समाचार बुलेटिन पढ़ने के लिए विशेष रूप से बुलाया गया था। वे अशोक बाजपेयी, शिव सागर मिश्र, विनोद कश्यप और रामानुज प्रसाद सिंह जैसे लोकप्रिय हिन्दी समाचार वाचकों में शामिल थे। इसी प्रकार आकाशवाणी के पास अंग्रेज़ी के प्रसिद्ध समाचार वाचक मेली-विले-डीमेलो भी थे। दूरदर्शन के पास बहुत ही संतुलित एवं गरिमापूर्ण हिन्दी एवं अंग्रेज़ी समाचार वाचक होते थे, जिन्हें पुरानी पीढ़ी आज भी याद करती है। आज के बहुत-से निजी समाचार चैनलों के एंकर ऊंची आवाज़, उत्तेजना और सनसनीखेज़ प्रस्तुति के लिए अधिक जाने जाते हैं।
विश्व रेडियो दिवस : बहुत कम लोग जानते हैं कि 12 फरवरी को विश्व रेडियो दिवस मनाया जाता है। चाहे तेज़ी से विकसित होती तकनीक और टेलीविजन नेटवर्क के विस्तार के कारण रेडियो का महत्व कम हो गया है, फिर भी पुरानी पीढ़ी आज भी ‘लहरें’, ‘सिबाका गीतमाला’, ‘हवा महल’, ‘आपकी पसंद’, ‘आपकी चिट्ठी मिली’, बाल कार्यक्रम, रात्रिकालीन नाटक तथा अनेक अन्य प्रसिद्ध रेडियो कार्यक्रमों को स्नेहपूर्वक याद करती है।
दूरदर्शन चैनलों का विलय हो : सोमवार को प्रकाशित होने वाले अधिकांश समाचार पत्र समाचार एजेंसियों पर निर्भर रहते हैं। भारत में अधिकांश समाचार राजनीति होते हैं और शनिवार व रविवार की छुट्टी के दौरान राजनीतिक गतिविधियां अक्सर कम होती हैं। इसके अतिरिक्त इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया के अधिकांश संवाददाता रविवार को साप्ताहिक अवकाश पर होते हैं। इस कारण आजकल महत्वपूर्ण समाचार कई दिनों तक सभी टीवी समाचार चैनलों पर लगातार दिखाया जाता है, जिससे दर्शक ऊब जाते हैं। 15 सितम्बर, 2021 से राज्यसभा टीवी और लोकसभा टीवी का विलय कर ‘संसद टीवी’ बनाया जाना एक स्वागतयोग्य कदम था। संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही का सीधा प्रसारण उनकी महत्ता के अनुसार किया जा सकता है, जबकि दोनों सदनों की प्रमुख झलकियां प्राइम टाइम में संसद टीवी के साथ-साथ विभिन्न दूरदर्शन चैनलों पर भी दिखाई जा सकती हैं। बहुत कम दर्शकों वाले दूरदर्शन चैनलों को एकट्ठा करके सार्वजनिक फंडों की अनावश्यक बर्बादी रोकी जा सकती है। सभी केबल और डिश टीवी ऑपरेटरों के लिए दूरदर्शन के 25 चैनलों के साथ संसद टीवी का प्रसारण पहले ही अनिवार्य है। इन चैनलों को चैनल सूची के शुरुआती नंबरों पर, मनोरंजन चैनलों में डीडी नेशनल और डीडी भारती को पहले और दूसरे स्थान पर तथा समाचार चैनलों में डीडी न्यूज़ और संसद टीवी को पहले और दूसरे स्थान पर रखा जाना चाहिए।
(लेखक सबसे अधिक पत्र लिखने के लिए गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड धारक तथा आरटीआई सलाहकार हैं)
-इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर



